BJP President: लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों के बाद RSS सतर्क, संगठन की मजबूती जोर

BJP President: बीजेपी के नए अध्यक्ष के चुनाव में हो रही देरी की वजह से मीडिया में कयासों का दौर जारी है। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि पार्टी के नए अध्यक्ष के चुनाव में संघ (RSS) की मुहर लगी है। जेपी नड्डा का कार्यकाल लोकसभा चुनाव के बाद भी खत्म हो गया था। एक साल से ज्यादा वक्त बीतने के बाद भी नए अध्यक्ष का चुनाव नहीं हो सका है।

माना जा रहा है कि इसके पीछे संघ और बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व में एक नाम को लेकर सहमति नहीं बन रही थी। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि नए अध्यक्ष के चुनाव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ही चली है।

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BJP प्रेसिडेंट के नाम पर संघ ने लिया अंतिम फैसला

बीजेपी के नए अध्यक्ष के लिए रेस में कई नाम थे, लेकिन सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि मनोहर लाल खट्टर के नाम पर सहमति बनी है। माना जा रहा है कि खट्टर अमित शाह की पहली पसंद नहीं थे, लेकिन संघ का ही सिक्का चला है। अमित शाह की पहली पसंद धर्मेंद्र प्रधान थे, लेकिन खट्टर का लंबे समय तक संघ के लिए काम करना उनके पक्ष में गया। इस चुनाव के साथ ही ऐसे कयास भी लगाए जा रहे हैं कि संघ एक बार फिर अब फ्रंटफुट पर आ गया है और मोदी-शाह की अजेय जोड़ी की ताकत सीमित होने लगी है।

BJP President: अब संघ ही लेगा पार्टी से जुड़े अहम फैसले

बीजेपी का हमेशा कहना रहा है कि संघ की भूमिका सिर्फ सलाह देने तक ही सीमित रही है। दूसरी ओर आरएसएस भी इसी लाइन को दोहराता है कि संघ सीधे तौर पर पार्टी के फैसलों को प्रभावित नहीं करता है। हालांकि, व्यावहारिक तौर पर देखें, तो संघ और बीजेपी को एक-दूसरे से अलग करके नहीं देखा जा सकता है। आरएसएस की संगठन क्षमता का फायदा बीजेपी को चुनावी सफलता में मिल रहा है। 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पीएम बने और अमित शाह ने अध्यक्ष पद का जिम्मा संभाला। इसके बाद मोदी और शाह की जोड़ी में बीजेपी ने कई राज्यों में चुनावी सफलता का स्वाद चखा और 2019 में लोकसभा चुनाव जीतने में भी सफल रहे।

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एक व्यक्ति एक पद नियम के तहत शाह 2019 में जब गृहमंत्री बने, तो अमित शाह ने अध्यक्ष का पद छोड़ा और जेपी नड्डा को कमान मिली। बीजेपी के अंदर ही नहीं पार्टी को करीब से जानने वाले पत्रकारों, विश्लेषकों और संघ के करीबी भी एकमत से कहने लगे कि बीजेपी में अब मोदी और शाह का ही दबदबा है। सरकार से लेकर संगठन तक इनकी ही चलती है। हालांकि, लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों के बाद स्थिति बदलती दिख रही है।

जेपी नड्डा के बाद संघ के पसंदीदा चेहरे पर लगी मुहर

लोकसभा चुनाव 2024 में बीजेपी बहुमत के आंकड़े से दूर रही है और पार्टी को हिंदी पट्टी के राज्यों में बड़ा नुकसान हुआ। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान में पार्टी को नुकसान हुआ और सूत्रों के मुताबिक, संघ ने इसे बहुत गंभीरता से लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो संघ एक बार फिर वैचारिक आधार पर टिके रहने, कार्यकर्ताओं से संवाद और संगठन मजबूत करने पर जोर दे रहा है। इसके लिए संघ ने स्पष्ट किया कि पार्टी अध्यक्ष के चुनाव में जातीय समीकरणों के बजाय संगठन क्षमता पर जोर दे। इसके अलावा, कार्यकर्ताओं की अनदेखी नहीं होनी चाहिए और बीजेपी को एक व्यक्ति केंद्रित चेहरे के तौर पर नहीं पहचाना जाना चाहिए।

यही वजह है कि संघ प्रमुख मोहन भागवत ने 75 साल में रिटायर होने की बात दोहराई है। माना जा रहा है कि यह सीधा संकेत पीएम मोदी के लिए ही है। मौजूदा संकेतों को देखकर ऐसा लग रहा है कि बीजेपी एक बार फिर अब संघ की शरण में है। आरएसएस ही अब आगे की रणनीति बनाने से लेकर फैसलों में अहम भूमिका निभाने वाला है।

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