लोकसभा विशेषाधिकार समिति के सामने पेश हुए निशिकांत दुबे, राहुल की सदस्यता खत्म करने की मांग
राहुल गांधी ने लोकसभा में मोदी सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। इस मामले में निशिकांत दुबे ने उनकी सदस्यता खत्म करने की मांग की।

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद निशिकांत दुबे शुक्रवार को लोकसभा विशेषाधिकार समिति के सामने पेश हुए। वहां पर उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता खत्म करने की मांग की। दुबे का आरोप है कि राहुल ने राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान भ्रामक, अपमानजनक, असंसदीय और आपत्तिजनक बयान दिया। जिस पर उनके खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव की मांग की जाती है।
लोकसभा सांसद सुनील सिंह ने दुबे को समिति में गवाह के तौर पर पेश होने को कहा। पैनल के प्रमुख सुनील सिंह के अलावा उसमें टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी, कांग्रेस के के. सुरेश, सीपी जोशी, दिलीप घोष, राजू बिस्टा और बीजेपी के गणेश सिंह शामिल हैं। बैठक में के. सुरेश और कल्याण बनर्जी जैसे सांसदों ने तर्क दिया कि इस तरह के उल्लंघन के लिए कोई आधार नहीं था क्योंकि वायनाड के सांसद का भाषण पहले ही हटा दिया गया था।
सूत्रों के मुताबिक डीएमके, एमपी टी आर बालू आज कमेटी के सामने मौजूद नहीं थे, लेकिन उन्होंने पैनल को लिखा है कि ऐसा कोई विशेषाधिकार नहीं है, जो राहुल के खिलाफ कोई दलील दे सके। वहीं दुबे ने ये भी कहा कि राहुल गांधी के खिलाफ तीन विशेषाधिकार नोटिसों को स्थानांतरित करने की आवश्यकता है। दुबे ने 1976 की उस घटना का भी हवाला दिया, जब सुब्रमण्यम स्वामी को राज्यसभा से बर्खास्त कर दिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा की कार्रवाई से इसे हटा दिया गया था, लेकिन राहुल के सोशल मीडिया हैंडल से उनको नहीं हटाया गया।
सूत्रों के मुताबिक दुबे ने कहा कि किसी भी राज्य के नेता या राज्य के प्रमुख के अधिकार और स्थिति को कम करना राष्ट्रीय हित से समझौता करना है। राहुल ने अडानी के खिलाफ जो आरोप लगाए वो भारत के हित के खिलाफ हैं, क्योंकि इजराइल और बांग्लादेश में उनके कई प्रोजेक्ट चल रहे। राहुल गांधी ने तर्क दिया कि बीजेपी शासन में अडानी ग्रुप का बांग्लादेश के साथ बिजली संयंत्र समझौता हुआ, जबकि 2011 में तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह और बांग्लादेशी पीएम शेख हसीना के बीच समझौता हुआ था।












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