बीजू पटनायक: ट्रेंड पायलट थे नवीन पटनायक के पिता, इंडोनेशिया के PM-उपराष्ट्रपति को जकार्ता से किया था रेस्क्यू
ओडिशा के पूर्व सीएम बीजू पटनायक एक बहुत ही माहिर पायलट थे। उन्होंने अपने कौशल का परिचय विश्व युद्ध और कश्मीर में पाकिस्तान के खिलाफ भी दिया था। वह इंडोनेशिया के पीएम और वाइस प्रेसिडेंट को भी रेस्क्यू कर लाए थे।

ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की पहल पर उनके पिता बीजू पटनायक से जुड़ी एक पहचान को कोलकाता से भुवनेश्वर में स्थापित किया जा रहा है। यह पहचान है, सात दशक से भी पुराना विमान Dakota (DC-3) VT-AUI, जो देश की आजादी से पहले और बाद में कई ऐतिहासिक ऑपरेशन का हिस्सा रह चुका है। बीजू पटनायक ओडिशा के मुख्यमंत्री बनने से पहले कलिंग एयरलाइंस के मालिक और एक बेहतरीन पायलट भी थे। वह ऐसे पायलट थे, जिन्होंने डच और ब्रिटिश सेना की चुनौतियों का सामना करके अपने विमान में जकार्ता से इंडोनेशिया के प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति को सुरक्षित निकाल लिया था। अब जब उनका पुराना विमान कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से भुवनेश्वर स्थित बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर शिफ्ट किया गया है, तब उनके ऐतिहासिक और अंतराष्ट्रीय व्यक्तित्व की चर्चा भी आवश्यक हो जाती है।
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भुवनेश्वर एयरपोर्ट पर स्थापित होगा बीजू पटनायक का विमान
ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक के डकोटा विमान के हिस्सों को बुधवार को जब कोलकाता से सड़क मार्ग से भुवनेश्वर लाया जा रहा था, तो सैकड़ों लोग उस पुराने खस्ताहाल विमान की एक झलक पाने को बेताब नजर आ रहे थे। Dakota (DC-3) VT-AUI को तीन हिस्सों में बांटकर विशाल लॉरियों में रखकर भुवनेश्वर के बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर स्थापित किया जाना है। बीजू पटनायक ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के पिता और राज्य के पूर्व सीएम थे। उनका डकोटा विमान दशकों से कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर यूं ही धूल फांक रहा था। 8 टन वजनी और करीब 64 फीट 8 इंच लंबे इस विमान को रखने के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने भुवनेश्वर के बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 1.1 एकड़ की जमीन आवंटित की है। (बीजू पटनायक की तस्वीर ओडिशा सरकार की वेबसाइट के सौजन्य से)

रॉयल इंडियन एयर फोर्स में पायलट थे बीजू पटनायक
नवीन पटनायक के पिता ने कलिंग एयरलाइंस की स्थापना की थी, जो अपने कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) स्थित मुख्यालय से करीब एक दर्जन डकोटा विमान संचालित करती थी। बीजू पटनायक बचपन से उड्डयन के क्षेत्र में बड़ी दिलचस्पी रखते थे। पायलट बनने के लिए उन्होंने दिल्ली फ्लाइंग क्लब से 1930 के दशक की शुरुआत में ट्रेनिंग लेनी शुरू की थी। पूरी तरह से ट्रेंड होने के बाद 1936 में वह रॉयल इंडियन एयर फोर्स में पायलट बने।

द्वितीय विश्व युद्ध में ट्रांसपोर्ट कमांड में काम किया
बीजू पटनायक के रॉयल इंडियन एयर फोर्स में शामिल हुए कुछ ही वर्ष हुए थे कि द्वितीय विश्व युद्ध छिड़ गया। इस दौरान उन्होंने रॉयल इंडियन एयर फोर्स के एयर ट्रांसपोर्ट कमांड में काम किया और बर्मा (म्यामांर) में जापान के खिलाफ ब्रिटिश सेना के लिए लड़ाई लड़ी। लेकिन, इस दौरान उन्होंने अपने विमान उड़ाने के कौशल का इस्तेमाल देश की स्वाधीनता के लिए भी करना नहीं छोड़ा।

पायलट बनकर स्वतंत्रता सेनानियों की सेवा की
बर्मा में अंग्रेजों के लिए लड़ने वाले भारतीय जवानों पर उन्होंने 'भारत छोड़ो' पर्चियां भी एयर ड्रॉप किया। गुपचुप तरीके से उन्होंने दिग्गज स्वतंत्रता सेनानियों जैसे कि जयप्रकाश नारायण, राम मनोहर लोहिया और अरुणा आसफ अली को भी गंतव्य तक पहुंचाने का काम किया, जो अंग्रेजों से छिप कर रह रहे थे। लेकिन, देश की आजादी के लिए उनका यह कार्य अंग्रेजों से ज्यादा दिन तक छिपा नहीं रह सका और 1943 में उन्हें चार साल के लिए जेल में डाल दिया गया।

इंडोनेशिया के पीएम को जकार्ता से किया था रेस्क्यू
जुलाई 1947 की बात है। भारत आजादी के मुहाने पर खड़ा था। 32 साल के बीजू पटनायक को एक फोन कॉल आया। दूसरी और जवाहर लाल नेहरू थे, जो अगले महीने स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री बनने की तैयारियों में जुटे थे। उन्होंने पटनायक से एक असाधारण अनुरोध किया। उनसे इंडोनेशिया के प्रधानमंत्री सुतन सजहरीर और उपराष्ट्रपति मोहम्मद हत्ता को जकार्ता से रेस्क्यू करके लाने को कहा, जिन्हें डच और ब्रिटिश सेना ने नजरबंद कर रखा था। डच सेना की धमकियों की चुनौती स्वीकार करते हुए पटनाक अपनी पत्नी और को-पायलट ज्ञानवती पटनायक के साथ अपने ही Dakota (DC-3) VT-AUI विमान से जकार्ता पहुंचे और दोनों इंडोनेशियाई नेताओं को अगले दिन सिंगापुर और दो दिन बाद दिल्ली लेकर आ गए।

पाकिस्तान के खिलाफ कश्मीर मिशन में भी दिया योगदान
इंडोनेशिया बीजू पटनायक के उस रेस्क्यू मिशन से इतना प्रभावित हुआ कि उन्हें अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भूमिपुत्र' से दो-दो बार सम्मानित किया। हालांकि, आजादी के बाद अपनी खुद की एयरलाइंस कंपनी होने के बावजदू पायलट के रूप में उन्होंने अपनी जिम्मेदारी से मुंह पीछे नहीं मोड़ा। जब स्वतंत्रता के बाद पाकिस्तानी सेना ने कबाइलियों की आड़ में कश्मीर की ओर कूच करना शुरू किया तो भारतीय सेना को कश्मीर पहुंचाने वाले मिशन में पटनायक भी शामिल हो गए। 1953 में उन्होंने अपने कलिंग एयरलाइंस को इंडियन एयरलाइंस में शामिल कर दिया। (कुछ तस्वीरें ट्विटर से)












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