Bihar assembly elections 2020: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 35 साल से चुनाव क्यों नहीं लड़ते ?
नई दिल्ली- जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार इस दफे सातवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं। लेकिन, यह सुनकर आश्चर्य लगता है कि उन्होंने पिछले 35 वर्षों से कभी भी विधानसभा का चुनाव ही नहीं लड़ा। नीतीश कुमार जैसे राजनेता के लिए ये बात थोड़ी सी अटपटी लग सकती है कि जिनके दम पर एक पार्टी बिहार में 15 वर्षों से सत्ता में है, उसका नेता खुद आम मतदाताओं का सामना नहीं करता। नीतीश अभी भी बिहार विधान परिषद के सदस्य हैं और उनका कार्यकाल 2024 तक है। वो पिछला विधानसभा चुनाव 1985 में अपने गृह क्षेत्र नालंदा जिले के हरनौत विधानसभा से लड़े थे और वह इलाका हमेशा से जेडीयू का प्रभाव वाला इलाका माना जाता है।
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एनडीए जीता तो सातवीं बार सीएम बनेंगे नीतीश
अगर बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में एनडीए को सफलता मिली तो नीतीश कुमार सातवीं बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बनेंगे। बीच में 9 महीने के लिए जीतन राम मांझी ने जरूर क्रिकेट के 'नाइट वॉचमैन' की भूमिका निभाई थी। पहली बार साल 2000 में वो महज 8 दिनों के लिए ही सीएम बने थे। 2005 में सीएम बनने के बाद पहली बार उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया। 2010 में वे फिर सीएम बने, लेकिन मई 2014 के लोकसभा चुनावों में पार्टी की हार के बाद उन्होंने इस्तीफा देकर जीतन राम मांझी को सीएम बनवा दिया। 2015 के फरवरी में उन्होंने फिर से मांझी से कमान ले ली। 2015 के नवंबर में विधानसभा जीतकर आरजेडी के साथ सरकार बनाई, लेकिन जुलाई 2017 में उन्होंने फिर इस्तीफा दे दिया और उसी रात बीजेपी के साथ सरकार बनाई और इस तरह से छठी बार सीएम पद की शपथ ली।
पहली बार 2006 में एमएलसी बने नीतीश
सीएम के तौर पर इतना लंबा कार्यकाल रहने के बावजूद नीतीश ने कभी भी सीधे जनता के बीच से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचने की जरूरत नहीं समझी। 2000 में वो इतने कम दिनों के लिए सीएम बने थे कि उन्हें विधानसभा के किसी भी सदन का सदस्य बनने की आवश्यकता नहीं पड़ी। संविधान के तहत मुख्यमंत्री या किसी मंत्री को शपथ लेने के बाद 6 महीने के अंदर किसी भी सदन का सदस्य बनना अनिवार्य है। बिहार देश के उन 6 राज्यों में शामिल है, जहां उच्च सदन यानि विधान परिषद भी है। बिहार के अलावा ये राज्य हैं- उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना, जहां दोनों सदन हैं। नीतीश कुमार जब 2005 में दूसरी बार मुख्यमंत्री बने तब भी विधानसभा या विधान परिषद दोनों में से किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे। बिहार में अभी-अभी चुनाव हुए थे और विधानसभा की कोई सीट खाली भी नहीं थी। कुछ महीने बाद यानि 2006 की शुरुआत में ही विधान परिषद का चुनाव होना था तो उन्होंने उसी सदन का सदस्य बनकर विधायिका में पहुंचने का फैसला किया।
35 साल से विधानसभा चुनाव नहीं लड़े नीतीश
विधान परिषद के सदस्य राज्यसभा की तरह 6 वर्षों के लिए चुने जाते हैं। इस तरह से उनकी सदस्यता 2012 में खत्म होने वाली थी। नीतीश चाहते तो 2010 का विधानसभा चुनाव लड़ सकते थे। लेकिन, उन्होंने सदन में दोबारा पहुंचने के लिए दो साल इंतजार किया और 2012 में फिर से एमएलसी बनकर ही विधायिका में दाखिल हुए। यहीं से नीतीश पर खुद चुनाव का सामना करने से कन्नी काटने के आरोप भी लगने शुरू हुए। संयोग से जनवरी, 2012 में ही विधान परिषद के शताब्दी समारोह में नीतीश को इस पर जवाब देने का मौका मिल गया। उन्होंने कहा, 'मौजूदा 6 साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद मैं फिर से विधान परिषद के लिए ही चुनाव लड़ूंगा।' वे बोले कि 'मैं अपनी पसंद से एमएलसी बना हूं न कि किसी मजबूरी के कारण...क्योंकि ऊपरी सदन एक सम्मानजनक संस्था है।' यही वजह है कि 2015 में भी उन्होंने विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ा और 2018 में तीसरी बार विधान परिषद बने हैं। वैसे यह भी मानना रहा है कि खुद चुनाव लड़ने का मतलब है कि एक सीट पर ज्यादा फोकस करना, उससे बाकी सीटों पर असर पड़ सकता है।
लगातार 6 बार लोकसभा के लिए चुने जा चुके हैं
नीतीश कुमार ने विधानसभा का पहला चुनाव 1977 में हरनौत विधानसभा सीट से लड़ा था। लेकिन, वह पहला ही चुनाव हार गए थे। उसके बाद वे 1985 में लड़े और जीते भी। 1989 में उन्होंने पहली बार बाढ़ लोकसभा चुनाव लड़ा और तब के कांग्रेस के दिग्गज नेता रामलखन सिंह यादव को हरा दिया। ये वही रामलखन सिंह यादव थे, जिन्हें उस चुनाव से पहले शेर-ए-बिहार के नाम से भी बुलाया जाता था। उसके बाद से लगातार 6 बार (1989-91,96,98,99,2004) बाढ़ या नालंदा लोकसभा चुनाव क्षेत्र से नीतीश लगातार चुनाव जीतते रहे। हालांकि, 2004 में उन्होंने बाढ़ और नालंदा दोनों जगहों से भाग्य आजमाया था, लेकिन बाढ़ में उन्हें नाकामी हाथ लगी थी। एमएलसी के तौर पर नीतीश कुमार का मौजूदा टर्म 2024 में खत्म हो रहा है। तब तक वो अपनी जिंदगी के 74 बसंत देख चुके होंगे।












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