Bharat Bandh 2025: रेलवे ट्रैक से लेकर पेट्रोल पंप तक ठप, कई राज्यों में दिखा भारत बंद का असर
Bharat Bandh 9 July 2025: केंद्र सरकार की श्रम नीतियों और आर्थिक सुधारों के खिलाफ देशभर की 10 प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा बुलाए गए भारत बंद का असर कुछ ही राज्यों तक सीमट के रह गया। पब्लिक ट्रांस्पोर्ट से लेकर रेलवे ट्रैक और राष्ट्रीय राजमार्गों तक पर प्रदर्शन हुए, जिससे आम जनजीवन भी प्रभावित हुआ।
यह बंद केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित श्रम सुधारों और आर्थिक नीतियों के विरोध में किया गया, जिन्हें यूनियनें श्रमिकों के अधिकारों को कमजोर करने वाला बता रही हैं।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार प्रो-कॉर्पोरेट रिफॉर्म के नाम पर संगठित और असंगठित दोनों तरह के श्रमिक वर्ग के हितों को नजरअंदाज कर रही है।
रेलवे ट्रैक पर प्रदर्शन, सड़कों पर आगजनी
बिहार के जहानाबाद और पश्चिम बंगाल के जाधवपुर जैसे स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने रेलवे ट्रैक जाम कर दिए। जाधवपुर स्टेशन पर वामपंथी यूनियन के सदस्यों ने पुलिस की मौजूदगी के बावजूद ट्रैक पर बैठकर विरोध जताया। कोलकाता में सड़कों पर टायर जलाकर मार्ग अवरुद्ध किए गए, जिससे सामान्य यातायात भी बाधित हुआ।
ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में सीआईटीयू से जुड़े कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया, जिसकी वजह से कई पेट्रोल पंप बंद रहे। उधर, केरल के कोट्टायम में व्यापारी भी बंद में शामिल हो गए, जिससे मॉल और दुकानों पर ताले लटकते नजर आए।
उत्तर बंगाल में बंद के दौरान कुछ अनोखा नजारा भी देखने को मिला। यहां उत्तर बंगाल राज्य परिवहन निगम (NBSTC) के बस ड्राइवरों ने सुरक्षा के लिए ड्यूटी पर हेलमेट पहनकर काम किया। ANI से बात करते हुए एक ड्राइवर ने कहा, "हम कामगार हैं, बंद का समर्थन करते हैं, लेकिन काम करना भी जरूरी है। सुरक्षा के लिहाज़ से हेलमेट पहन रहे हैं।"
तमिलनाडु में सामान्य रहा जनजीवन
जहां उत्तर भारत और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में भारत बंद का खासा असर देखने को मिला, वहीं तमिलनाडु खासकर चेन्नई में सामान्य जनजीवन जारी रहा। बसें अपने निर्धारित समय पर चलीं और दुकानों पर भी ग्राहकों की आवाजाही बनी रही।
ओडिशा में हाईवे जाम, कर्नाटक में हल्का असर
ओडिशा के खुर्दा जिले में सीआईटीयू के सदस्यों ने राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम कर दिया, जिससे आवागमन बाधित हुआ। वहीं कर्नाटक के हुबली में बंद का प्रभाव सीमित रहा। हालांकि कई यूनियनों जैसे सीआईटीयू, इंटक और एटक ने निजीकरण और मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ जोरदार विरोध जताया।
प्रमुख यूनियनों का समर्थन
इस बंद को 10 प्रमुख ट्रेड यूनियनों का समर्थन प्राप्त था, जिनमें शामिल हैं:
- इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTUC)
- ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC)
- हिंद मजदूर सभा (HMS)
- सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (CITU)
- ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (AIUTUC)
- ट्रेड यूनियन कोऑर्डिनेशन सेंटर (TUCC)
- सेल्फ एम्प्लॉयड वीमेंस एसोसिएशन (SEWA)
- ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (AICCTU)
- लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन (LPF)
- यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस (UTUC)
ट्रेड यूनियनों की प्रमुख मांगें
- खाली सरकारी पदों पर तत्काल भर्ती
- मनरेगा के तहत काम के दिनों की संख्या और मजदूरी में वृद्धि
- श्रम कोड में बदलाव की प्रक्रिया पर रोक
- निजीकरण की नीतियों को तत्काल वापस लेने की मांग
- सभी असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा की गारंटी
इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक केंद्र सरकार की ओर से बंद पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई थी। हालांकि जानकारों का कहना है कि इतनी व्यापक भागीदारी और जन-असंतोष को देखते हुए सरकार श्रम कोड की लागू करने की समय-सीमा की समीक्षा कर सकती है।
भारत बंद 2025 ने यह स्पष्ट कर दिया कि देश के श्रमिक वर्ग में सरकार की नीतियों को लेकर भारी असंतोष है। रेलवे ट्रैक से लेकर पेट्रोल पंप, बस अड्डों से लेकर दुकानों तक, हर जगह यह संदेश साफ था-"मजदूरों की आवाज़ को अनसुना मत करो।" अब यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्र सरकार इस विरोध को कैसे लेती है और आगे क्या कदम उठाती है।












Click it and Unblock the Notifications