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मरी नहीं अभी जिंदा है भंवरी देवी, बेंगलुरू में कर रही है लाइफ एन्जॉय: इंदिरा विश्‍नोई

आपको बता दें कि भंवरी देवी हत्‍याकांड में इंदिरा विश्‍नोई सहित कुल 16 लोग सलाखों के पीछे हैं। जानकारी के मुताबिक 2 जून को इंदिरा विश्‍नोई को गिरफ्तार किया गया था।

जयपुर। राजस्‍थान की राजनीति एक बार फिर भंवरी देवी के भंवरजाल में फंसती दिख रही है। जी हां कुछ दिन पहले मध्‍य प्रदेश के देवास से गिरफ्तार हुई हत्‍याकांड की मुख्‍य आरोपी इंदिरा विश्‍नोई ने एक नया खुलासा कर राजस्थान की सियासत में हलचल मचा दी है। शनिवार को पेशी के दौरान इंदिरा विश्‍नोई ने कहा कि भंवरी देवी मरी नहीं जिंदा है और पुलिस ने जो हड्डियां बरामद कीं, वो भी उसकी नहीं थीं।

मरी नहीं अभी जिंदा है भंवरी देवी, बेंगलुरू में कर रही है लाइफ एन्जॉय: इंदिरा विश्‍नोई

इंदिरा ने यह भी कहा कि भंवरी देवी बेंगलुरू में रहती है। आपको बता दें कि भंवरी देवी हत्‍याकांड में इंदिरा विश्‍नोई सहित कुल 16 लोग सलाखों के पीछे हैं। जानकारी के मुताबिक 2 जून को इंदिरा विश्‍नोई को गिरफ्तार किया गया था। अगले दिन ही यानी कि 3 जून को ही इंदिरा को सात दिनों की रिमांड पर भेजा दिया गया था। आज रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद इंदिरा को सीबीआई ने सुबह एमएम 2 कोर्ट में पेश किया जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया। भंवरी देवी हत्‍याकांड: 5 साल से फरारी काट रही मास्‍टर माइंड इंदिरा विश्‍नोई गिरफ्तार

जब इंदिरा कोर्ट से बाहर आ रही थीं, तो एक मीडियाकर्मी ने उससे पूछा लिया कि क्या भंवरी जिंदा है, तो इंदिरा ने जवाब दिया कि हां भंवरी जिंदा है। हालांकि उसकी यह बात सुनकर वहां मौजूद सीबीआई अधिकारी व लोगों ने ठहाका लगाया।

इंदिरा ने किया पेशी के दौरान ड्रामा

इंदिरा को जब पेशी के लिए कोर्ट लाया गया तो पहले तो वह शांत रही। फिर सुनवाई शुरू होते ही उसने कहा कि मुझ पर किसी ने काला जादू किया है। मैं ज्यादा कुछ नहीं बोल सकती। उसके बाद कोर्ट ने सुनवाई पूरी होने पर इंदिरा को जेल भेजने को कहा। उल्‍लेखनीय है कि करोड़ों की जायदाद की मालकिन जोधपुर की आलीशान हवेली छोड़कर सीबीआई की आंखों में धूल झोंकने के लिए देवास में नर्मदा नदी के किनारे संन्यासी की झूठी जिंदगी जी रही थी।

इंदिरा ने बदल लिया था अपना नाम

इंदिरा विश्नोई देवास के करीब 150 किलोमीटर दूर नेमावर में नर्मदा के तट पर राजस्थान के ही एक पराशर परिवार के पास रह रही थी। पिछले 200 सालों से जोधपुर का ये पराशर परिवार देवास में रहता है। इंदिरा ने यहां अपना नाम बदलकर गीताबाई रख लिया था। गीताबाई बन चुकी इंदिरा दिखावे के लिए नर्मदा के तट पर बने एक आश्रम में पूजा-पाठ के लिए आती थी। पति ने दाढ़ी बनाने से किया इंकार तो पत्‍नी ने कर दिया यह खौफनाक कांड

चोरी-चोरी मिलती थी पति से

इंदिरा से शुरूआती पूछताछ में पता चला है कि जेल में बंद पूर्व विधायक और इंदिरा के भाई मलखान सिंह विश्नोई ने उसके लिए सारा इंतजाम किया था। इंदिरा आसपास के इलाकों में जाकर चोरी-छिपे अपने बेटे और पति से भी मिलती रहती थी। इंदिरा स्थानीय लोगों से कम ही बातचीत करती थी।

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