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Bengaluru Water Crisis: बूंद बूंद को तरसी सिलिकॉन वैली, आम से लेकर खास तक परेशान, कैसे हल होगी समस्या?

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में जल आपू्र्ति की चरमराती जल व्यवस्था के बीच के टेंशन बढ़ गई है। लाखों लोगों के घरों तक पर्याप्त पानी की सप्लाई नियमित रूप से नहीं हो पा रही है। शहर के कई इलाकों में जलापूर्ति ठप्प है। ऐसे में लोगों को निजी टैंकरों का सहारा लेना पड़ रहा है। एक अनुमान के मुताबिक वर्तमान में शहर में 60 फीसदी आबादी इन्हीं टैंकरों के सहारे पानी की कमी को पूरा कर रही है।

बेंगलुरू में पेयजल की 50 प्रतिशत मांग भूजल से पूरी की जाती है। जबकि शेष कावेरी नदी के जल को शोधित करके पूरा किया जाता है। शहर में वारट हार्वेस्टिंग का ढांचा भी परी तरह से प्रभावी नहीं है। ऐसे में इस साल बारिश से पहले ही भूजल स्तर काफी नीचे चला गया है।

Bengaluru Water Crisis

बेंगलुरु के शहर के कई इलाकों में जलापूर्ति ठप्प है। ऐसे में लोगों को निजी टैंकरों का सहारा लेना पड़ रहा है। एक अनुमान के मुताबिक वर्तमान में शहर की तकरीबन 60 फीसदी आबादी इन्हीं टैंकरों के सहारे पानी की कमी को पूरा कर रही है।

शहर की लगभग आधी पानी की मांग भूजल से पूरी होती है और बाकी कावेरी नदी द्वारा पूरी की जाती है। उनका कहना है कि बोरवेल खत्म हो गए हैं, जल निकायों पर अतिक्रमण हो गया है। वर्षा जल संचयन प्रणालियों का कार्यान्वयन खराब स्थिति में है।

'बुनियादी ढांचे के लिए राजस्व की आवश्यकता'
उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि मंगलुरु में प्रीमियम एफएआर पहले से ही प्रदान किया जा रहा है। ढांचागत विकास के लिए सरकार अधिक धन की आवश्यकता है। एक बयान में डिप्टी सीएम ने कहा,"हम जो करने की कोशिश कर रहे हैं वह प्रमुख बुनियादी ढांचे के विकास के लिए धन प्राप्त करना है। मंगलुरु में, हमने पिछले कुछ वर्षों में 2,000 करोड़ रुपए एकत्र किए हैं।"

'बनाएं मास्टर प्लान'
वहीं एक्सपर्ट्स का कहना है कि प्रीमियम एफएआर के जरिए सरकार को राजस्व की प्राप्ति होती है। जिसके चलते डेवलपर्स एक निश्चित राशि का भुगतान करने के बाद अधिक मंजिला इमारत बनाने की अनुमति मिल जाती है। लेकिन इससे शहर का बुनियादी ढांचा प्रभावित होता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक अधिक आबादी के लिए बुनियादी आवश्यकताओं को पूरी करने वाली सुविधाओं के लिए एक मास्टर प्लान की आवश्यकता है।

बेंगलुरु घनी आबादी वाला शहर
डच जियोलोकेशन टेक्नोलॉजीफर्म टॉमटॉम (TomTom) के अनुसार, बेंगलुरु 2023 में भारत का सबसे भीड़भाड़ वाला शहर बना रहा, जबकि वैश्विक स्तर पर यह छठे स्थान पर आ गया। 2022 में, बेंगलुरु विश्व स्तर पर लंदन के बाद दूसरा सबसे भीड़भाड़ वाला शहर था। 2023 में अपने 13वें ट्रैफिक इंडेक्स में, टॉमटॉम ने पाया कि बेंगलुरु के सिटी सेंटर में 10 किलोमीटर की यात्रा करने में लगने वाले औसत समय में एक मिनट का सुधार हुआ। जबकि 2022 में एक यात्री को 29 मिनट और 10 सेकंड लगे, जबकि 2023 में, यह 28 मिनट था 10 सेकंड था।

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