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Mamata Banerjee: बंगाल के स्कूलों में गाना होगा ‘बांग्लार माटी', ममता दीदी के इस आदेश के पीछे क्या है राजनीति?

Mamata Banerjee Government Order: पश्चिम बंगाल में 2026 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं उससे पहेल ही राज्य का राजनीतिक माहौल गरमाने लगा है। खास तौर पर बंगाल में SIR को लेकर ममत दीदी ने केंद्र सरकार के खिलाफ हल्ला बोला है।

इसी बीच राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए राज्य के सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में हर सुबह की एसेंब्ली में राज्य गीत 'बांग्लार माटी, बांग्लार जल' को अनिवार्य कर दिया है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला....

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राज्य ने क्या कहा?

राज्य माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने इस संबंध में सभी उच्च प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को अधिसूचना जारी की। अधिसूचना में कहा गया है कि अब से हर सुबह की प्रार्थना सभा में राज्य गीत का नियमित रूप से गायन अनिवार्य होगा। शिक्षा विभाग का कहना है कि यह पहल राज्य की सांस्कृतिक पहचान और एकता के प्रतीक के रूप में की गई है।

राज्य सरकार का मानना है कि यह कदम न केवल बंगाल की सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देगा, बल्कि विद्यार्थियों में राज्य की पहचान, इतिहास और एकता की भावना को भी मज़बूत करेगा। शिक्षा मंत्री बसु ने कहा, रवींद्रनाथ टैगोर के शब्द सिर्फ कविता नहीं हैं, बल्कि बंगाल की आत्मा की आवाज़ हैं। इन्हें रोज़ गाकर बच्चे अपने राज्य और उसकी मिट्टी से भावनात्मक जुड़ाव महसूस करेंगे।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, 6 नवंबर को जारी यह आदेश ऐसे समय में आया है जब राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) को लेकर तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक तनातनी चल रही है। इसी बीच, तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने असम कांग्रेस के एक नेता की गिरफ्तारी की भी आलोचना की, जिन्हें रवींद्रनाथ टैगोर के ही एक अन्य गीत 'आमार सोनार बांग्ला' (जो वर्तमान में बांग्लादेश का राष्ट्रगान है) गाने पर हिरासत में लिया गया था।

राज्य गीत 'बांग्लार माटी' का क्या है इतिहास?

राज्य के शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु ने कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा 1905 में लिखा गया यह गीत बंगाल की आत्मा और अस्मिता का प्रतीक है। यह गीत ब्रिटिश शासन के दौरान बंगाल विभाजन के विरोध में उठी राष्ट्रीय चेतना का हिस्सा था। बसु ने कहा, "यह प्रसिद्ध गीत अब बंगाल के प्रत्येक सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूल में हर दिन की शुरुआत में गाया जाएगा। राज्य गीत और राष्ट्रगान का संयुक्त गायन सामाजिक और सांप्रदायिक एकता को मज़बूत करेगा।"

'बांग्लार माटी, बांग्लार जल' (Bāṅlār Māṭi, Bāṅlār Jal) टैगोर की वह रचना है, जो बंगाल की मिट्टी, उसकी संस्कृति और मानवीय एकजुटता का प्रतीक मानी जाती है। 1905 में जब ब्रिटिश सरकार ने बंगाल का विभाजन किया था, तो टैगोर ने इस गीत को बंगाली अस्मिता के समर्थन में लिखा था।

कैसे बना 'बांग्लार माटी' राज्य गीत

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सितंबर 2023 में एक नागरिक सम्मेलन (Citizens' Convention) आयोजित किया था, जिसमें बंगाल के लिए उपयुक्त राज्य गीत चुने जाने पर चर्चा हुई। इस सम्मेलन में राजनीतिक दलों, धार्मिक नेताओं और समाज के प्रमुख नागरिकों ने भाग लिया। सर्वसम्मति से 'बांग्लार माटी, बांग्लार जल' को राज्य गीत के रूप में स्वीकार किया गया। उसी वर्ष राज्य विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित कर इसे आधिकारिक रूप से राज्य गीत घोषित किया।

इसके बाद सरकार ने आदेश जारी कर यह सुनिश्चित किया कि राज्य गीत को राष्ट्रगान के साथ सभी राजकीय कार्यक्रमों में अनिवार्य रूप से गाया जाए। अब यह आदेश शिक्षा जगत तक भी विस्तारित कर दिया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस आदेश का उद्देश्य "सांस्कृतिक एकजुटता और बंगाली पहचान को पुनः सुदृढ़ करना" है।

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