Bengal Politics: बंगाल में SIR पर सियासत! अभिषेक बनर्जी ने कहा- BJP नेता सर्टिफिकेट मांगें, तो पेड़ से बांध दो

Bengal Politics : पश्चिम बंगाल में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सियासी माहौल गर्माने लगा है। एनआरसी और वोटर लिस्ट संशोधन (SIR) को लेकर मचा बवाल अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है।

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने केंद्र की बीजेपी सरकार और चुनाव आयोग पर राज्य में डर और असुरक्षा फैलाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इसी माहौल की वजह से कोलकाता के पास एक व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली, जिससे बंगाल की राजनीति में नया तूफान खड़ा हो गया है।

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sir पर भड़के अभिषेक बनर्जी

अभिषेक बनर्जी ने बुधवार को पनिहाटी इलाके में उस 57 वर्षीय व्यक्ति के परिवार से मुलाकात की, जिसने कथित रूप से आत्महत्या कर ली। उन्होंने कहा कि यह घटना "स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR)" प्रक्रिया के चलते फैली घबराहट की वजह से हुई है।

बनर्जी ने कहा कि बीजेपी और चुनाव आयोग ने बंगाल में ऐसा डर पैदा कर दिया है कि लोग दस्तावेजों के नाम पर अपनी जिंदगी खत्म करने को मजबूर हो रहे हैं। SIR की शुरुआत 28 अक्टूबर को 12 राज्यों में की गई थी, जिनमें बंगाल भी शामिल है। इस प्रक्रिया के तहत निर्वाचन आयोग वोटर लिस्ट में नामों की जांच कर रहा है, लेकिन टीएमसी इसे "NRC की तैयारी" बता रही है।

"बीजेपी नेताओं से सर्टिफिकेट मांगो, फिर बांध दो"

अभिषेक बनर्जी ने अपने भाषण में लोगों से अपील की कि वे बीजेपी नेताओं से सवाल करें। उन्होंने कहा कि अगर कोई बीजेपी नेता आपसे आपके माता-पिता या दादा-दादी का सर्टिफिकेट मांगे, तो उन्हें रोक लो। उनसे कहो कि पहले वो अपने मां-बाप के सर्टिफिकेट दिखाएं। अगर नहीं दिखा पाए तो उन्हें किसी पेड़ या खंभे से बांध दो। लेकिन ध्यान रहे, उन्हें मारना मत - सिर्फ बांधना है। उन्होंने कहा कि "हम हिंसा में विश्वास नहीं करते, लेकिन बीजेपी की राजनीति का जवाब जनता को देना होगा।

बंगाल में फिर छिड़ी नागरिकता बहस

टीएमसी का आरोप है कि SIR के ज़रिए बीजेपी और चुनाव आयोग NRC जैसे माहौल को दोहरा रहे हैं। NRC का उद्देश्य यह तय करना था कि कौन नागरिक है और कौन नहीं। टीएमसी का कहना है कि NRC और CAA (Citizenship Amendment Act) दोनों से गरीब और जिनके पास डाक्यूमेंट्स नहीं उन लोगों को सबसे ज़्यादा नुकसान होगा। अभिषेक बनर्जी ने अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सीधे निशाना साधते हुए कहा "क्या अमित शाह और ज्ञानेश कुमार खुद अपने दादा-दादी के दस्तावेज दिखा पाएंगे? जब वो नहीं दिखा सकते, तो आम जनता से क्यों मांग रहे हैं?"

वहीं बीजेपी ने इस पूरे मामले को राजनीति से प्रेरित बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि आत्महत्या की असली वजह की जांच पुलिस को करने दी जानी चाहिए, लेकिन टीएमसी इस दुखद घटना का राजनीतिक फायदा उठा रही है।

यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब बंगाल में मार्च 2026 तक विधानसभा चुनाव होने हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहले ही आरोप लगा चुकी हैं कि बीजेपी "एनआरसी के नाम पर डर फैलाने" की साजिश कर रही है। अब अभिषेक बनर्जी के बयान के बाद बंगाल की सियासत एक बार फिर "नागरिकता बनाम साजिश" के बहस में फंसती दिख रही है।

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