केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह बस्तर पंडुम 2026 के समापन समारोह में शामिल, कहा- बस्तर की पहचान बारूद नहीं संस्कृति है

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह शुक्रवार को छत्तीसगढ़ के बस्तर पंडुम 2026 के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा सहित कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि बस्तर की असली पहचान बारूद नहीं, बल्कि यहां की समृद्ध संस्कृति, कला और विरासत है।

Bastar Pandum 2026: Cultural Renaissance

अमित शाह ने कहा कि कुछ वर्ष पहले तक बस्तर नक्सल हिंसा, बंदूक की गोलियों और आईईडी धमाकों के डर से सहमा रहता था, लेकिन आज वही बस्तर अपनी सांस्कृतिक पहचान के साथ देश के सामने खड़ा है। बस्तर पंडुम में 12 विधाओं के माध्यम से खान-पान, गीत, नृत्य, नाटक, वेशभूषा, परंपरा और वन औषधि जैसी सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित किया गया, जिसमें 55 हजार से अधिक आदिवासियों की सहभागिता रही। यह बस्तर के नक्सल भय से मुक्त होने का प्रमाण है।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर की संस्कृति को नई ऊर्जा देने का कार्य किया है। पिछले बस्तर पंडुम में जहां 7 विधाओं में प्रतियोगिताएं आयोजित हुई थीं, वहीं इस बार पांच नई विधाओं को जोड़ा गया। इस आयोजन में सात जिलों, 1885 ग्राम पंचायतों और 32 जनपद मुख्यालयों से प्रतिभागियों ने भाग लिया।

अमित शाह ने कहा कि बस्तर जैसी समृद्ध कला और संस्कृति विश्व के किसी भी जनजातीय क्षेत्र में दुर्लभ है। यह केवल बस्तर की नहीं, बल्कि पूरे भारत की सांस्कृतिक धरोहर है। उन्होंने कहा कि बस्तर की जनजातियों ने प्रभु राम के समय से अपनी संस्कृति को सहेजकर रखा है और आने वाले समय में यहां के नृत्य और कलाएं राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान बनाएंगी।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का स्पष्ट विजन है कि बस्तर की संस्कृति देश और दुनिया तक पहुंचे। मोदी सरकार आदिवासी जनजातियों के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और बस्तर की कला, नृत्य और संस्कृति को वैश्विक सम्मान दिलाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि इतिहास केवल किताबों में नहीं, बल्कि जनमानस की स्मृतियों में जीवित रहता है।

अमित शाह ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस और उनकी 150वीं जयंती को जनजातीय गौरव वर्ष घोषित करना, प्रधानमंत्री मोदी के जनजातीय समाज के प्रति सम्मान का प्रमाण है। सरकार ने जनजातीय शिल्प, संस्कृति, व्यंजन और वन उत्पादों के व्यावसायिक उपयोग को बढ़ावा दिया है। पांच लाख से अधिक वन उत्पादों और पारंपरिक शिल्प की ब्रांडिंग और मार्केटिंग की व्यवस्था की गई है।

उन्होंने बताया कि कला, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले बस्तर के कई लोगों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। इसके साथ ही 200 करोड़ रुपये की लागत से ट्राइबल म्यूजियम की स्थापना की गई है, जिसमें स्वतंत्रता संग्राम में योगदान देने वाले जनजातीय नायकों की स्मृतियों को संजोया गया है।

गृह मंत्री ने कहा कि बस्तर पंडुम के प्रतिभागियों को राष्ट्रपति भवन में आमंत्रित किया जाएगा, जहां वे अपनी कला और संस्कृति का प्रदर्शन करेंगे। यह बस्तर और उसके कलाकारों के लिए गर्व का विषय है।

नक्सलवाद पर कड़ा संदेश देते हुए अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई का मूल उद्देश्य आदिवासी किसानों, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा है। उन्होंने नक्सलियों से आत्मसमर्पण की अपील करते हुए कहा कि जो लोग हथियार छोड़ेंगे, सरकार उनका सम्मानजनक पुनर्वास करेगी। हालांकि, हथियार उठाने वालों को जवाब भी हथियार से ही दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि अगले पांच वर्षों में बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी क्षेत्र बनाया जाएगा। नई पर्यटन गतिविधियां रोजगार के अवसर पैदा करेंगी। बंद पड़े स्कूल, अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र फिर से शुरू किए जाएंगे। सड़क, मोबाइल नेटवर्क, पोस्ट ऑफिस और बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। कई गांवों में दशकों बाद तिरंगा फहराया गया है।

अमित शाह ने बताया कि बस्तर में 118 एकड़ में नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है, जिससे आदिवासी युवाओं को रोजगार मिलेगा। 3500 करोड़ रुपये की रावघाट-जगदलपुर रेल परियोजना, नदी जोड़ो परियोजना और नई सिंचाई योजनाओं पर काम चल रहा है। इन योजनाओं से बिजली उत्पादन और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने कहा कि आज बस्तर में कर्फ्यू जैसा माहौल नहीं है। गांवों में रात के समय सांस्कृतिक कार्यक्रम हो रहे हैं। बस्तर ओलंपिक के सफल आयोजन के बाद अब बस्तर पंडुम को और व्यापक रूप देने की योजना है। अंत में उन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई में योगदान देने वाले सुरक्षाबलों और बलिदान देने वाले जवानों के परिवारों के प्रति आभार व्यक्त किया और विश्वास जताया कि तय समय सीमा में बस्तर पूरी तरह नक्सल मुक्त होगा।

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