Bakrid 2025: कौन-सी नस्ल के बकरे सबसे महंगे और क्यों? तोतापरी से तुर्की दुंबा तक चौंकाने वाले हैं दाम
Bakrid 2025 Goat Price Range India : ईद-उल-अजहा यानी बकरीद पर्व के मात्र तीन दिन बचे हैं। 6-7 जून 2025 को दुबई से लेकर भारत तक, सभी जगह बकरीद का पर्व मनाया जाएगा। ऐसे में बकरों का बाजार भी गुलजार हो चुका है। अपनी पसंद और कूबत के मुताबिक लोग मंडी में बकरों की खरीद में जुटे हैं।
कहीं कीमत 20 हजार है तो कहीं 10 लाख तक। लेकिन, खरीद में सबसे पहले बात आती है- नस्ल की। मंडी में तोतापुरी, जमुनापारी, बीटल, तुर्की दुंबा जैसे बकरों की नस्ल काफी डिमांड रहती है। नवाबों के शहर लखनऊ की बात की जाए तो, तुर्की दुंबा काफी डिमांड में रहता है। अच्छी नस्ल, भारी-भरकम, लंबी हाइट और ताकतवर हर चीजें बकरों के दाम में उछाल लाती हैं। काजू-पिस्ता और बादाम जैसी डाइट बकरों का वजन 1 से 2 क्विंटल तक पहुंच देती है। खरीददार सबसे पहले बकरे की चुस्ती देखकर ऊंचे दाम देने तक के लिए तैयार हो जाते हैं। आइए जानते हैं कौन सी नस्ल का बकरा सबसे महंगा?

मार्केट में लंबे कान वाले बकरों की डिमांड भी काफी ज्यादा होती है। लोग मानते हैं कि ये देखने में ज्यादा खूबसूरत और खास लगते हैं, इसलिए इनके रेट भी ज्यादा होते हैं। कुछ बकरे ऐसे होते हैं, जिनकी कीमत ₹1 से लेकर ₹10 लाख तक बताई जा रही है, वहीं कुछ तो करोड़ों में भी लिस्टेड हैं। लेकिन सवाल ये है - आखिर कौन-से बकरे सबसे महंगे होते हैं और क्यों? आइए जानते हैं...
नस्ल सबसे पहले देखी जाती है
बकरे की नस्ल उसकी कीमत तय करने में सबसे बड़ा रोल निभाती है। जैसे-
1. तोतापरी (Totapari)
- कहां पाए जाते हैं: राजस्थान, गुजरात
- खासियत: तोते जैसी नुकीली नाक, लंबा चेहरा, आकर्षक रूप
- कीमत: ₹1 लाख से ₹10 लाख तक
2. जमनापारी (Jamunapari)
- कहां पाए जाते हैं: उत्तर प्रदेश (इटावा), मध्य प्रदेश, बिहार
- खासियत: लंबा शरीर, सफेद रंग, कानों और गले पर लाल धारियां
- कीमत: ₹15,000 से ₹50,000 तक
3. बरबरी (Barbari)
- कहां पाए जाते हैं: उत्तर प्रदेश (आगरा, अलीगढ़, एटा)
- खासियत: छोटे, खड़े कान; मजबूत शरीर; 25-30 किलोग्राम वजन
- कीमत: ₹12,000 से ₹50,000 तक
4. बीटल (Beetal)
- कहां पाए जाते हैं: पंजाब (गुरदासपुर, फिरोजपुर, अमृतसर)
- खासियत: लंबे कान, घुमावदार सींग, 50-60 किलोग्राम वजन
- कीमत: ₹60,000 से ₹4 लाख तक
5. जखराना (Jakhrana)
- कहां पाए जाते हैं: राजस्थान (अलवर)
- खासियत: काले रंग का शरीर, मुंह और कमर पर सफेद धब्बे, 50-60 किलोग्राम वजन
- कीमत: ₹1 लाख से अधिक
6. गोहिलवाड़ी (Gohilwadi)
- कहां पाए जाते हैं: गुजरात (भावनगर, अमरेली, जूनागढ़)
- खासियत: घने काले बाल, ट्यूबलर कान, 45-50 किलोग्राम वजन
- कीमत: ₹50,000 से ₹2 लाख तक
7. ब्लैक बंगाल (Black Bengal)
- कहां पाए जाते हैं: पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, असम
- खासियत: काला रंग, छोटा कद, उच्च प्रजनन क्षमता
- कीमत: ₹20,000 से ₹40,000 तक
8. तुर्की दुंबा (Turkey Dumba )
- कहां पाए जाते हैं: तुर्की
- खासियत: भारी शरीर, अधिक चर्बी, छह दांत
- कीमत: ₹1.70 लाख तक
9. अजमेरी (Ajmeri)
- कहां पाए जाते हैं: राजस्थान (अजमेर)
- खासियत: सुंदर दिखने वाले, मध्यम आकार के
- कीमत: अजमेरी नस्ल के बकरे की कीमत ₹4 लाख तक बताई गई है।
ऐसे भी होती है कीमत डिसाइड?
- शरीर की बनावट और खासियतें: अगर बकरे का कद लंबा हो, चमकदार बाल हों, वजन 100 किलो से ज़्यादा हो और चलने में 'रॉयल' लगे - तो उसकी कीमत आसमान छूती है। खासतौर पर जिन बकरों के बालों पर 'अल्लाह' या 'मोहम्मद' जैसे शब्दों की आकृति दिखे, या चंद्रमा जैसी डिजाइन हो - वो बकरे लाखों में बिकते हैं।
- दांत की गिनती भी है जरूरी: धार्मिक मान्यता के अनुसार, बकरा तभी क़ुर्बानी के योग्य होता है जब उसमें दो, चार या छह दांत हों। ऐसे में दांतों की संख्या भी उसकी वैल्यू तय करती है।
- एक्स्ट्रा केयर और पोषण: कुछ बकरों को बादाम, दूध, केसर और ड्रायफ्रूट्स वाला खास खाना दिया जाता है। ये ना सिर्फ उनके वजन और सेहत को बेहतर करता है, बल्कि उनकी कीमत भी दोगुनी कर देता है।
- ट्रेंडिंग फीचर्स: 'हैंडशेक' बकरा और सेल्फी स्टार्स: आजकल कुछ बकरे ऐसे भी तैयार किए जाते हैं जो हाथ मिलाते हैं, झुकते हैं या सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके होते हैं। ऐसे "ट्रेंडिंग बकरे" लोगों के आकर्षण का केंद्र होते हैं और ₹5 लाख से ऊपर तक बिकते हैं।

दुनिया का सबसे महंगा बकरा
अब तक का रिकॉर्ड 1985 में बना था जब ब्रिटेन में अंगोरा नस्ल का बकरा \$82,600 (लगभग ₹70 लाख) में बिका था। भारत में भी कई बकरों की कीमत ₹1 करोड़ से ऊपर बताई जा चुकी है, हालांकि ये कीमतें प्रतीकात्मक या बोली पर आधारित होती हैं।
कीमत नहीं, नियत जरूरी
ईद-उल-अजहा (Eid Ul-Adha 2025) कुर्बानी का त्योहार है, जिसमें नियत और भावना का महत्व होता है। लेकिन हर साल की तरह इस साल भी बकरों की रॉयल नस्लों और उनके लाजवाब रूप-रंग ने बाजार की चमक बढ़ा दी है।
बकरीद क्यों मनाई जाती है?
इस्लामी मान्यता के अनुसार, हजरत इब्राहीम को अल्लाह ने सपना दिखाया, जिसमें उन्हें अपने सबसे प्यारे बेटे हज़रत इस्माईल (अलैहिस्सलाम) को अल्लाह के नाम पर कुर्बान करने का आदेश मिला। उन्होंने यह आदेश एक ईश्वरीय आज्ञा मानकर पालन करने का निश्चय किया। जब वे बेटे को कुर्बान करने चले, तो अल्लाह ने उनके त्याग और भक्ति से प्रसन्न होकर इस्माईल की जगह एक दुम्बा (मेंढ़ा) भेजा और उसे कुर्बान करवा दिया। तब से हर साल दुनिया भर के मुसलमान इस दिन जानवर की कुर्बानी देकर अल्लाह के प्रति अपनी भक्ति और त्याग दिखाते हैं।
कुर्बानी का मकसद क्या है?
- 1. त्याग और समर्पण की भावना
- 2. अहम (ego) की कुर्बानी
- 3. समानता और सेवा का भाव
- 4. सामाजिक एकता
बकरीद कब मनाई जाती है?
- बकरीद इस्लामी कैलेंडर के अनुसार 12वीं और आखिरी महीने 'जिलहिज्जा' की 10वीं तारीख को मनाई जाती है।
- हज यात्रा (मक्का, सऊदी अरब) के दौरान अराफात के मैदान में खड़े होने के अगले दिन इसे मनाया जाता है।












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