देश में बिक रहे हैं नवजात, लड़की का 1 लाख तो लड़के का 2 लाख रुपए

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कोलकाता। देश में नवजातों की तस्करी और उसको बेचे जाने के एक इंटरनेशनल रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना इलाके में एक प्राइवेट नर्सिंग पिछले दो सालों से नवजातों के सौदे का यह काला कारोबार कर रहा था।

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child sold racket

देश-विदेश में बेचे जा रहे थे बच्चे

देश और विदेश में जिन दंपतियों के बच्चे नहीं थे, उनके हाथ प्राइवेट नर्सिंग होम नवजातों को बेच देता था। सीआईडी ने इस मामले पर पर्दा उठाया तो मानव तस्करी के इस अमानवीय कारोबार के बारे में कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आईं।

लड़के का दाम लड़की से ज्यादा

नवजातों को अलग-अलग दामों पर बेचा जाता था। जिन लड़कियों के रंग साफ नहीं थे, उनकी कीमत 80,000 रुपए से 1 लाख रुपए तक थी। गोरी बच्चियों की कीमत 1 से 1.5 लाख रुपए रखी गई थी।

लड़कों को लड़कियों से ऊंची कीमत पर बेचा जाता था। लड़के के लिए कम से कम 2 लाख रुपए वसूले जाते थे।

बिस्किट के कार्टून में बंद मिले बच्चे

जब पुलिस ने सोहन नर्सिंग होम और पॉली क्लिनिक पर छापा मारा तो तीन दिन पहले पैदा हुए दो बच्चे बिस्किट के कार्टून में बंद मिले। एक 6 दिन का बच्चा कमरे में मिला।

सीआईडी का कहना है कि इन बच्चों को बिस्किट के कार्टून में बंदकर सप्लाई किया जाता था ताकि किसी को कोई शक न हो।

पुलिस और सीआईडी इस मामले की छानबीन में लगी है। बताया जा रहा है कि नर्सिंग होम, अब तक 30 से ज्यादा नवजातों को बेच चुका है।

डॉक्टर और एनजीओ तस्करी में शामिल

इस नर्सिंग होम में काम करने वाले डॉक्टर टीके विश्वास को पुलिस तलाश रही है। इस मानव तस्करी में एक एनजीओ भी शामिल है। पुलिस का कहना है कि कोलकाता के सरकारी मेडिकल कॉलेज का एक रिटायर्ड डॉक्टर भी इस रैकेट में शामिल है।

इस केस में हुई है 8 की गिरफ्तारी

दो महिलाओं सहित 8 लोगों को इस केस में पुलिस ने एरेस्ट किया है। एनजीओ चलाने वाले सत्यजीत सिन्हा व उत्पल ब्यापारी और पॉली क्लिनिक के मालिक बाग्बुल बैद्य व उसकी पत्नी नज्मा बीवी को पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। नर्सिंग होम के मालिक अशदुज्जमान को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।

कैसे काम करता था यह स्मगलिंग रैकेट

सीआईडी अधिकारियों ने बताया है कि नर्सिंग होम और पॉली क्लिनिक में जो बच्चे पैदा होते थे, उनके मां-बाप को यह बताया जाता था कि नवजात जिंदा नहीं पैदा हुआ। ये मां-बाप अक्सर गरीब होते थे और वे नर्सिंग होम का विरोध नहीं कर पाते थे। जो मां-बाप विरोध करते थे, पैसा देकर उनका मुंह बंद कर दिया जाता था। ये बेहद गरीब लोगों को अपना शिकार बनाते थे।

जब मां-बाप को बताया जाता था कि उनका बच्चा मर चुका है तो वे उसकी लाश को देखने से मना कर देते थे। अगर कोई महिला अबॉर्शन कराने आती थी तो उसे भी पैसा देकर बच्चे को जन्म देने के लिए कहा जाता था। एनजीओ चलाने वाला सत्यजीत सिन्हा इन बच्चों के लिए कस्टमर तलाशता था।

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English summary
In West Bengal, a nursing home and poly-clinic were running a baby trafficking racket with the help of an NGO.
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