गुजरात: सत्ता में होती कांग्रेस अगर बचा ली होती पुरानी सीटें

नई दिल्ली। यह बात चौंकाने वाली है, मगर सच है। कांग्रेस के लिए गुजरात के चुनाव नतीजे कुछ इस तरह है मानो काश ऐसा होता! काश! कांग्रेस ने अपनी पुरानी जीती हुई सीटों को बचा लिया होता। ऐसी 30 से ज्यादा सीटें हैं जहां कांग्रेस 2012 में चुनाव जीती थी, लेकिन इस बार चुनाव हार गयी। हालांकि कांग्रेस ने कई नयी सीटें जीती हैं और कुल मिलाकर उसे पिछले चुनाव के मुकाबले लगभग 10 सीटें अधिक हासिल हुई है। फिर भी कहा जा सकता है कि कांग्रेस के हाथ से जीत फिसल गयी।

हार्दिक पटेल से गठजोड़ ने बचायी कांग्रेस की लाज

हार्दिक पटेल से गठजोड़ ने बचायी कांग्रेस की लाज

मगर, इस विश्लेषण के भी कई मायने हैं। कांग्रेस को जो नयी सीटें हासिल हुई हैं वह पाटीदारों की भूमिका ज्यादा है और निश्चित रूप से इसका श्रेय हार्दिक पटेल को जाता है। यह राहुल गांधी की रणनीति ही रही कि कांग्रेस के लिए अंतिम नतीजा उतना अपमानजनक नहीं रहा। अन्यथा जितनी सीटें कांग्रेस ने पिछले चुनावों के मुकाबले हारी हैं, अगर हार्दिक का साथ नहीं होता तो आज कांग्रेस गुजरात में मुंह दिखाने लायक नहीं होती।

कांग्रेस को मिले वोटों का प्रतिशत बढ़ा

कांग्रेस को मिले वोटों का प्रतिशत बढ़ा

कांग्रेस को मिले वोटों पर नज़र डालें तो उसे 41 फीसदी से कुछ ज्यादा वोट मिले हैं जो 2012 के विधानसभा चुनाव में मिले लगभग 38.93 फीसदी से अधिक है। बीजेपी और कांग्रेस के बीच 2012 में लगभग 9 फीसदी वोटों का फासला था। इस बार यह फासला घटकर 7 फीसदी हो गया है।

1.9 फीसदी मतदाताओं ने किया NOTA का इस्तेमाल

1.9 फीसदी मतदाताओं ने किया NOTA का इस्तेमाल

एक बार और गौर करने की है कि 1.9 फीसदी मतदाताओं ने NOTA का इस्तेमाल किया है। यह वही आंकड़ा है जो बीजेपी और कांग्रेस के बीच घटा है। ये मत भी कांग्रेस अपनी ओर खींच सकती थी और अपने प्रदर्शन में सुधार कर सकती थी। वहीं अगर बीजेपी ने यह मत हासिल कर लिया होता, तो दोनों दलों के बीच मतों का अंतर पूर्ववत बना रहता।

बीजेपी-कांग्रेस के बीच वोटों का अंतर करीब 2 फीसदी घटा

बीजेपी-कांग्रेस के बीच वोटों का अंतर करीब 2 फीसदी घटा

बीजेपी और कांग्रेस के बीच वोट प्रतिशत का अंतर लगभग 7.6 फीसदी है। यह छोटा अंतर नहीं है। यह इस तथ्य के बावजूद है कि इस बार गुजरात विधानसभा चुनाव में पहले के मुकाबले कम मतदान हुए। ऐसी परिस्थिति में रुझान ये कहते हैं कि मतदाताओँ में सत्ता परिवर्तन के लिए उत्साह नहीं है। जब उत्साह होता है तो वोटों का प्रतिशत बढ़ जाता है। अब जरा गौर कीजिए कि मतदान का प्रतिशत कम रहा, फिर भी सत्ताधारी दल को मत कम मिलने के बजाए उसे अधिक मत मिले। यह चमत्कार ही है।

बीजेपी के भी बढ़े वोट

बीजेपी के भी बढ़े वोट

गुजरात में बीजेपी की जीत छोटी नहीं है। 22 साल तक सत्ता में रहने के बाद अगर किसी पार्टी को 49 फीसदी से ज्यादा वोट हासिल हो रहे हैं तो यह किसी चमत्कार की तरह है। पिछले चुनाव में मिले वोट से यह लगभग 1 फीसदी ज्यादा है। बीजेपी को 2012 में 47.85 फीसदी वोट मिले थे। बीजेपी को मिले वोट चुनाव के पूर्वानुमानों से कहीं अधिक हैं।

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