Asaduddin Owaisi: 'चीन के बिना पाकिस्तान अपाहिज, आतंकवाद के लिए हो रहा फंड का इस्तेमाल', ओवैसी का तीखा वार
Asaduddin Owaisi News: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर पाकिस्तान पर करारा हमला बोला है। ओवैसी ने साफ कहा कि चीन के बिना पाकिस्तान एक 'अपाहिज' देश है, जो खुद से कुछ करने की स्थिति में नहीं है।
ओवैसी ने यह भी कहा कि यह अब पूरी तरह से साफ है कि चीन के बिना पाकिस्तान कुछ भी नहीं है। चीन के समर्थन के बिना वे बिल्कुल अपंग हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर गए बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल में उन्होंने बताया कि कैसे पाकिस्तान ने चीन की मदद से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) को प्रतिबंध सूची में शामिल होने से रोक दिया। यह बातें ओवैसी ने एक मीडिया चैनल से बात करते हुए कही।

22 अप्रैल का पहलगाम हमला और पाकिस्तान का हाथ
TRF वही आतंकी संगठन है जो लश्कर-ए-तैयबा का मुखौटा ग्रुप है और 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए उस आतंकी हमले का जिम्मेदार है, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी। हमले के बाद भारत ने सीमापार आतंकियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की थी, जिसे 'ऑपरेशन सिंदूर' नाम दिया गया।
फंड पाकिस्तान को, फायदा सेना को
ओवैसी ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान को जो अंतरराष्ट्रीय फंड मिल रहा है, वो उसके नागरिकों की बेहतरी पर खर्च नहीं हो रहा, बल्कि सीधा सेना को जा रहा है। उन्होंने कहा कि 2022 में सऊदी अरब ने पाकिस्तान को 2 बिलियन डॉलर दिए और हाल ही में 30 मिलियन डॉलर का लोन भी रिन्यू किया, जबकि IMF ने भी बेलआउट के तहत 2 बिलियन डॉलर दिए हैं।
FATF की ग्रे लिस्ट में फिर शामिल हो पाकिस्तान?
ओवैसी ने अंतरराष्ट्रीय मंचों से अपील की है कि वे पाकिस्तान को फिर से FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल करें, ताकि आतंक को मिलने वाले आर्थिक सहयोग पर लगाम लगाई जा सके।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का मजबूत पक्ष
उन्होंने कहा कि बैजयंत पांडा के नेतृत्व वाले भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने सऊदी अरब में TRF की गतिविधियों और पाकिस्तान के दोहरे चरित्र को उजागर किया। ओवैसी ने कहा कि अब यह केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है कि वह अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों पर दबाव बनाए और पाकिस्तान की नीतियों को बेनकाब करे।
FATF क्या है?
FATF यानी Financial Action Task Force, एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है, जो मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering), टेरर फाइनेंसिंग (Terror Financing), और अवैध फाइनेंशियल नेटवर्क को रोकने के लिए मानक तय करती है और निगरानी रखती है। इसकी स्थापना 1989 में की गई थी और इसका मुख्यालय पेरिस, फ्रांस में है। FATF की लिस्ट दो तरह की होती हैं- ग्रे लिस्ट (Grey List) और ब्लैक लिस्ट (Black List)।
FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल होने का क्या मतलब?
अगर कोई देश FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल किया जाता है, तो इसका सीधा मतलब है कि उस देश की सरकार ने आतंकी वित्तपोषण (Terror Funding) और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं या उनके सिस्टम में गंभीर कमियां हैं। FATF यह मानता है कि ऐसा देश वैश्विक फाइनेंशियल सिस्टम के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।












Click it and Unblock the Notifications