गोली लगने से पहले विवेक तिवारी ने पत्‍नी कल्‍पना को फोन कर बताई थी ये बात

लखनऊ। उत्‍तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शुक्रवार देर रात करीब डेढ़ बजे यूपी पुलिस के सिपाही ने चेकिंग के लिए कार न रोकने पर एक शख्‍स पर गोली चला दी। गोली लगते ही कार अंडरपास के पिलर टकराई और कार में बैठे शख्‍स की मौत हो गई। जिस व्‍यक्ति को पुलिस ने गोली मारी, उनका नाम है- विवेक तिवारी। वह Apple कंपनी में सेल्‍स मैनेजर थे। विवेक तिवारी की पत्‍नी का नाम है कल्‍पना, जिन्‍होंने बताया कि गोली लगने की घटना ठीक पहले उनकी विवेक से बात हुई थी। कल्‍पना ने बताया कि विवेक ने फोन करके उनसे कहा था कि वह सना को छोड़ने के बाद घर आएंगे। विवेक ने कल्‍पना से कहा था कि वह टीम मेंबर सना को घर छोड़ने के बाद आएंगे।

और क्‍या-क्‍या खुलासे किए विवेक की पत्‍नी कल्‍पना ने

और क्‍या-क्‍या खुलासे किए विवेक की पत्‍नी कल्‍पना ने

कल्‍पना ने आगे बताया कि विवेक से बात होने के कुछ देर बाद उन्‍होंने दोबारा फोन लगाया, लेकिन इस बार फोन उनके पति ने नहीं उठाया था। मतलब तब तक हादसा हो चुका था, लेकिन पत्‍नी कल्‍पना को इसका अंदेशा तक नहीं था कि उनके पति के साथ क्‍या हो चुका है। कल्‍पना बताती हैं कि उन्‍होंने जब दोबारा फोन किया तो एक शख्‍स ने उन्‍हें बताया कि एक्‍सीडेंट हो गया है और लोहिया अस्‍पताल पहुंच जाएं। इसके बाद कल्‍पना लोहिया अस्‍पताल गईं तो वहां भी उन्‍हें यही बात बताई गई कि छोटा-मोटा एक्‍सीडेंट हुआ है। कुछ देर बाद डॉक्‍टर ने बताया कि उनके पति के सिर में चोट लगी थी, जिसकी वजह से काफी खून बह गया है और उन्‍हें बचाया नहीं जा सका।

कल्‍पना ने सीएम योगी आदित्‍यनाथ से पूछा सवाल

कल्‍पना ने प्रदेश के सीएम जवाब मांगा है। वह कहती हैं, 'मैं मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ से जवाब चाहती हूं, पुलिस ने मेरे पति को मार दिया। वो जिस भी हालत में थे, लेकिन उन्‍हें गोली क्‍यों मारी गई। आरटीओ से नंबर के जरिए जानकारी ले लेते, घर आते, पर गोली क्‍यों मारी।

और कौन-कौन है विवेक के परिवार में

और कौन-कौन है विवेक के परिवार में

विवेक तिवारी के पिता का नाम उदय नारायण है, वह बैंक में मैनेजर थे। उनका एक भाई है, जिसका नाम है नीरज। वह विवेक तिवारी से छोटा है। विवेक के दो बच्‍चे हैं, जिनके नाम हैं शिवी और सानू।

मुंह पर कपड़ा बांधकर मीडिया के सामने आई चश्‍मदीद सना

मुंह पर कपड़ा बांधकर मीडिया के सामने आई चश्‍मदीद सना

जिस वक्‍त विवेक तिवारी पर गोली चलाई गई, उस वक्‍त वह सहकर्मी सना को घर छोड़ने जा रहे थे। वह घटना की चश्‍मदीद गवाह है। ऐसा कहा जा रहा है कि सना पर पुलिस दबाव बना रही है। हालांकि, सना ने इससे इनकार किया है। सना ने कहा, 'मैं तो सिर्फ इतना चाहती हूं कि दोषी को सख्‍त सजा मिले। मैं किसी दबाव में नहीं हूं।

क्‍यों चलाई पुलिसवाले ने विवेक पर गोली

पुलिस का कहना है कि चेकिंग के दौरान एक काले रंग की महिंद्रा एक्‍सयूवी 500 कार को रुकने का इशारा किया गया था। कार सवार ने रुकने की बजाय स्‍पीड तेज कर दी। इस भगदड़ में पुलिस की बाइक पर सवार दो सिपाहियों को चोट लगी। इन्‍हीं दोनों सिपाहियों में से एक ने गोली चला दी। पोस्‍टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक, गोली विवेक की ठुड्ढी में लगी और गर्दन व सिर के बीच जाकर फंसी। इसी वजह से काफी खून बहा और विवेक को बचाया नहीं जा सका।

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