अनुराग कश्यप का मोदी सरकार पर हमला, बोले- बिल वही पास हो रहे जिसमें सरकार का भला

नई दिल्ली: बॉलीवुड निर्देशक अनुराग कश्यप अपनी बेबाकी के लिए जाने जाते हैं। अनुराग कश्यप उन 49 लोगों में शामिल थे, जिन्होंने मॉब लिंचिंग के खिलाफ पीएम मोदी को चिट्ठी लिखी थी। उन्होंने गुरुवार को बजट सत्र के दौरान पास हुए बिलों पर सवाल उठाते हुए मोदी सरकार पर तंज कसा है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि लोकसभा में वो ही बिल पास हो रहे हैं, जिसमें सरकार का भला हो। उनका ये वीडियो काफी वायरल हो रहा है।

अनुराग कश्यप का सरकार पर तंज

अनुराग कश्यप का सरकार पर तंज

बॉलीवुड डायरेक्टर अनुराग कश्यप ने गुरुवार को ट्वीट कर लिखा कि लोकसभा में बिल वही पास हो रहे हैं जिसमें सरकार का भला है । और जो बिल नहीं बनाए जा रहे हैं , उसमें भी सरकार का भला है । लोगों के भले के लिए कोई अमेण्डमेंट भी होना चाहिए । गौरतलब है कि मोदी सरकार के अपने दूसरे कार्यकाल के पहले संसद सत्र में लोकसभा में एनआईए संशोधन बिल पास कराया है। इसके अलावा सरकार ने आरटीआई संशोधन बिल भी लोकसभा से पास करा लिया था। ये बिल कल राज्यसभा में भी पास हो गया।

पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी में यही कहा है

अनुराग कश्यप ने एक टीवी पत्रकार के ट्वीट को रिट्वीट करते हुए लिखा कि आरटीआई अमेण्डमेंट बिल पास हो गया । आतंकवादी क़रार कर के ६ महीने कस्टडी में रखने का बिल पास हो गया। लिंचिंग के ख़िलाफ़ भी एक बिल पास हो जाए तो मजाल टीएमसी के गुंडों की या मायनॉरिटीज़ की , कि वो ऐसा करें ? सोचिए । प्रधानमंत्री को लिखी चिट्ठी मैं यही बात लिखी है ।

अनुराग कश्यप ने लेटर में क्या था

अनुराग कश्यप ने लेटर में क्या था

49 दिग्गजों के पीएम मोदी के लिखे लेटर में अनुराग कश्यप के भी हस्ताक्षर थे। इस लेटर में कहा गया था कि आज 'जय श्री राम' आज एक भड़काऊ युद्ध बन गया है। राम बहुसंख्यक समाज के लिए पवित्र है। राम का नाम लेना बंद कर दें। देश में लिंचिंग के मामलों पर मशहूर हस्तियों ने कहा है कि मुसलमानों, दलितों और और अल्पसंख्यकों की लिंचिंग को तुरंत रोका जाना चाहिए। 23 जुलाई को लिखे इस लेटर में कहा गया था कि प्रधानमंत्री जी आपने संसद में इस तरह की लिंचिंग की आलोचना कि लेकिन ये पर्याप्त नहीं है। वास्तव में अपराधियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई?

एनआईए और आरटीआई बिल में ये बदलाव

एनआईए और आरटीआई बिल में ये बदलाव

एनआईए बिल में संशोधन के बाद एनआईए उस व्यक्ति को आतंकवादी घोषित कर पाएगी जिसके आतंक से संबंध होने का शक हो। गौरतलब है कि साल 2008 में हुए 26/11 मुंबई आतंकवादी हमले के बाद साल 2009 में यूपीए 1 में एनआईए का गठन किया गया था। अमित शाह ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा था कि उनके दिल में 'अर्बन नक्सल' के लिए कोई दया नहीं है। वहीं सूचना के अधिकार में किए गए संशोधन के मुताबिक मुख्य सूचना आयुक्त एवं सूचना आयुक्तों तथा राज्य मुख्य सूचना आयुक्त एवं राज्य सूचना आयुक्तों के वेतन, भत्ते और सेवा के अन्य निबंधन एवं शर्ते केंद्र सरकार द्वारा तय किए जाएंगे। इस संशोधित बिल का जमकर विरोध हो रहा है। यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी और समाजसेवी अन्ना हजारे ने भी इस पर आपत्ति दर्ज कराई है।

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