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दिल्ली CM का एक और झूठ, जानिए कितने झूठे दावे कर चुके हैं केजरीवाल!

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बेंगलुरू। वर्ष 2015 में राजधानी दिल्ली की सत्ता पर काबिज हुई आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल अपने सफेद झूठों के लिए मशहूर हैं। केजरीवाल इतनी बेबाकी और आत्मविश्वास से झूठ बोलते है कि अच्छे-अच्छे विश्लेषक कान खुजाते हुए किताबों में घुस जाते हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे अरविंद केजरीवाल संभवतः पहले ऐसे राजनीतिक है, जिनके एक-एक झूठ पर पूरी दुनिया ने ताली बजाई है।

Kejriwal

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2013 और दिल्ली विधानसभा चुनाव 2015 के चुनावी कैंपेन में केजरीवाल के झूठे बयानों की एक पूरी फेहरिस्त हैं। यह अलग बात है कि सत्ता पर काबिज होने के बाद केजरीवाल को अपने हरेक झूठ के लिए माफीनामा तक लिखना पड़ गया। एक आंकड़े के मुताबिक केजरीवाल पर उनके झूठे आरोपों के लिए एक दर्जन से अधिक मानहानि के मामले दर्ज कराए गए थे, जिसके लिए उन्हें बाकायदा माफीनामा लिखना पड़ गया था।

Saurabh

केजरीवाल ने एक बार फिर गत 4 नवंबर से राजधानी दिल्ली में लागू ऑड-इवेन ट्रैफिक नियम पर सफेद झूठ बोला है। दिल्ली के मुखिया ने दिल्ली सरकार द्वारा जारी किए एक विज्ञापन में दावा करते हुए कहा था कि दिल्ली में ऑड-इवेन लागू होने के बाद दिल्ली प्रदूषण यानी पीएम लेवल में 25 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। मालूम हो दिल्ली में 2018 में भी ऑड-इवेन लागू किया गया था।

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केजरीवाल का दावा किया था कि वर्ष 2016-2018 के बीच पीएम लेवल घटकर औसतन 115 रह गया है, जिसका औसत वर्ष 2012 और 2014 के बीच 154 था, लेकिन पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था ग्रीन पीस इंडिया ने केजरीवाल के दावों को सफेद झूठ करार दिया है।

ग्रीन पीस इंडिया ने जारी बयान में कहा है कि दिल्ली सीएम केजरीवाल का उक्त दावा सही नहीं है कि पिछेल कुछ वर्षों के दौरान राजधानी दिल्ली के वायु प्रदूषण में 25 फीसदी कमी आई है। हालांकि ग्रीन पीस के दावों को हमेशा की तरह एक बार आम आदमी पार्टी अपने दावों पर अड़ी हुई है, क्योकि केजरीवाल के झूठतंत्र और लोकतंत्र की सीढ़ी बनाने वाली सर्वे एजेंसी बिना पते वाली मकान में रहते हैं, जहां तक पिछले पांच वर्षो में दुनिया की कोई खुफिया एजेंसी नहीं पहुंच पाई है।

Kejriwal

एनजीओं के विश्लेषण के मुताबिक दिल्ली और आसपास के राज्यों में वायु गुणवत्ता निगरानी और उपग्रह के आंकड़ों के साथ ही पेट्रोल-डीजल जैसे जीवाश्म ईंधनों की बढ़ती खपत दिल्ली सरकार के दावों की पोल खोलते हैं, लेकिन आप प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज। जी हां, वहीं सौरभ भारद्वाज जिन्होंन दिल्ली विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाकर इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को हैक करने झूठा दावा किया था। सौरभ भारद्वाज ने संस्था के दावों पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि उनकी पार्टी के लिए संस्था के विश्लेषण बेकार है।

Saurabh

सीएम केजरीवाल के झूठे दावों की खुली पोल को केंद्र सरकार के सुप्रीम कोर्ट में दिए हलफनामें से ढांकने की कोशिश करते हुए सौरभ भारद्वाज ने कहा कि केंद्र ने उच्चतम न्यायालय में दायर एक हलफनामे में कहा है कि दिल्ली में प्रदूषण घटा है। यह पहली बार है केजरीवाल एंड पार्टी को अपने झूठ को छिपाने के लिए केंद्र सरकार के हलफनामे की शरण लेनी पड़ी है वरना खुद को स्वयंभू मानने वाली आम आदमी पार्टी ग्रीन पीस इंडिया की तरह सबको खारिज करती आई है। सौरभ भारद्वाज के मुताबिक इस वर्ष अक्टूबर और नवंबर में प्रदूषण पराली जलाने से हो रहा है।

Kejriwal

हालांकि केजरीवाल के झूठ के एक लंबी फेहरिस्त है, जिसकी परत दर परत इतनी लंबी-चौड़ी है कि एक झूठीमहागाथा लिखी जा सकती है, लेकिन केजरीवाल हैं कि मानते ही नहीं है। झूठ के सहारे दिल्ली की सत्ता पर काबिज हुए दिल्ली के सीएम केजरीवाल की यह व्यक्तिगत फितरत है या राजनीतिक जरूरत, यह शोध का विषय है, लेकिन केजरीवाल को सावधान हो जाना चाहिए, क्योंकि आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 में उनके किए 70 वादों अथवा 75 झूठों का इम्तिहान जरूर लेगी।

दिल्ली की हवा में जहर है, तो 5 साल में केजरीवाल ने क्यों कुछ नहीं किया?

झूठे दावों के लिए बार- बार केजरीवाल को मांगनी पड़ माफी

झूठे दावों के लिए बार- बार केजरीवाल को मांगनी पड़ माफी

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम मजीठिया से लिखित रूप में उस आरोप के लिए माफी मांगनी पड़ गई थी, जिसमें उन्होंने मजीठिया को ड्रग के धंधे में लिप्त बताया था। इसके बाद केजरीवाल को दो और माफीनामे लिखने पड़े। एक केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और दूसरे कपिल सिब्बल एवं उनके पुत्र अमित सिब्बल के लिए, जिन पर केजरीवाल झूठे आरोप लगाए थे। इसी तरह दिवंगत बीजेपी नेता व पूर्व वित्त मंत्री अरूण जेटली पर लगाए झूठे आरोपों के लिए केजरीवाल को माफीनामा लिखना पड़ गया था।

दिल्ली में जनलोकपाल विधेयक लाने वाले थे केजरीवाल

दिल्ली में जनलोकपाल विधेयक लाने वाले थे केजरीवाल

एक्टविस्ट से पॉलिटिक्स में घुसे केजरीवाल ने दिल्ली की जनता से वादा किया था कि सत्ता में आने पर आम आदमी पार्टी सबसे पहला काम जनलोकपाल विधेयक को पास कराएगी। रामलीला मैदान में इस विधेयक को पास करवाया जाएगा, लेकिन बाद में इस पर केजरीवाल का कहना था कि केंद्र सरकार ने एक आदेश जारी किया है इस कारण जनलोकपाल विधेयक अभी पास नहीं हो सकेगा। केंद्र सरकार से जनलोकपाल के लिए इजाजत लेनी होगी। इस तरह झूठ बोलकर दिल्ली विधानसभा चुनाव में भ्रष्टाचार और जनलोकपाल के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी सत्ता पर तो काबिज हो गए, लेकिन सत्ता में आते ही तथाकथित ईमानदार केजरीवाल झूठे साबित हो गए। जबकि इस मामले में सच्चाई यह है कि केंद्र सरकार ने जनलोकपाल कानून पर पत्र बहुत पहले ही जारी कर चुकी थी। दूसरी बार लोकपाल विधेयक पास होने के बाद ही सरकार ने राज्यों को लोकायुक्त बनाने का अधिकार दे दिया है। यही नहीं, दिल्ली में लोकायुक्त पहले से ही काम कर रहा है।

 केजरीवाल ने कहा था कि वो नहीं लेंगे सुरक्षा और गाड़ी

केजरीवाल ने कहा था कि वो नहीं लेंगे सुरक्षा और गाड़ी

दिल्ली के मुख्यमंत्री बनने से पहले अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली की जनता से कहा था कि वो सुरक्षा नहीं लेंगे और वीआईपी कल्चर से दूर रहेंगे, लेकिन सच्चाई यह है कि वर्तमान में केंद्र सरकार और उत्तरप्रदेश सरकार दोनों से केजरीवाल को जेड श्रेणी सुरक्षा ले रखी है। भाजपा ने एक इंस्पेक्टर का नाम जारी किया है जो हर समय केजरीवाल के साथ रहता है। यह केजरीवाल के सुरक्षा के दावों की पोल खोलता है।

अरविंद केजरीवाल कभी इन्कम टैक्स कमिश्नर नहीं रहे

अरविंद केजरीवाल कभी इन्कम टैक्स कमिश्नर नहीं रहे

राजनीति में उतरने से पहले दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने बड़ी-बड़ी डींगे हांकते हुए कहा था कि उन्होंने बड़े अधिकारी की नौकरी छोड़कर समाजसेवा को अपना लक्ष्य बनाया। केजरीवाल हमेशा कहते रहते हैं कि वो इन्कम टैक्स विभाग में कमिश्नर पद पर आसीन थे, चाहते तो खूब पैसे कमा सकते थे, लेकिन उसे छोड़कर राजनीति में आए हैं, क्योंकि वो राजनीति में सेवा करने आए हैं जबकि सच्चाई यह थी कि केजरीवाल कभी इनकम टैक्स विभाग में टैक्स कमिश्नर रहे ही नहीं है। इसकी तस्दीक रेवेन्यू अफसरों की एसोसिएशन ने की है।

शीला दीक्षित के खिलाफ 370 पन्नों का सबूत नहीं दिखा पाए

शीला दीक्षित के खिलाफ 370 पन्नों का सबूत नहीं दिखा पाए

दिल्ली के मुख्यमंत्री बनने से पहले दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत शीला दीक्षित सरकार के घोटालों लेकर आंदोलन करने वाले अरविंद केजरीवाल ने वर्ष 2010 में दिल्ली में हुए कॉमनवेल्थ खेलों में हुए घोटाले के 370 पेज का सबूत बाबा रामदेव के नेतृत्व में थाने में देने का दावा किया था जबकि सच्चाई यह है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद अब इन घोटालों पर केजरीवाल पर कह रहे हैं कि अगर किसी के पास शीला दीक्षित के खिलाफ सबूत हैं, तो वे उन्हें दें, वो उनके खिलाफ कार्रवाई करेंगे। यानी खुद थाने में सबूत दर्ज करवाने का दावा करने वाले केजरीवाल अचानक कार्रवाई के लिए दूसरों से सबूत मांगने लगे।

केजरीवाल ने बिजली की कीमतों में वृद्धि को लेकर बोला झूठ

केजरीवाल ने बिजली की कीमतों में वृद्धि को लेकर बोला झूठ

राजधानी दिल्ली में बिजली के दामों में बढ़ोतरी को लेकर केजरीवाल ने पूर्ववर्ती शीला दीक्षित सरकार को कई बार घेरा और कई घरों में जाकर तो केजरीवाल ने मीटरों के तार भी काटे। यही नहीं, आम आदमी पार्टी के घोषणापत्र में उन्होंने बिजली की दरें आधी करने का वादा किया। दिल्ली में सरकार बनने पर केजरीवाल ने इस पर अमल तो किया, लेकिन यह आधी दर केवल 400 यूनिट तक, जो किसी भी तरीके से बड़े तबके के लिए बिल्कुल लाभदायक नहीं था जबकि वोट उन्हें हर तबके से मिला था।

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English summary
Delhi CM Arvind kejriwal had claimed in one of Advertisement of Delhi government that Delhi pollution reduced by 25 percent between 2016-2018 but NGO called Green peace India rejected Delhi CM claim. However Delhi CM famous for his false claim before coming power in Delhi state.
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