'तुमने पुकारा हम चले आए', मशहूर सिंगर सुमन कल्याणपुर का हुआ निधन, कहलाती थीं दूसरी लता मंगेशकर
Suman Kalyanpur Death: भारतीय संगीत जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अपनी मधुर और सुरीली आवाज़ से करोड़ों श्रोताओं के दिलों में खास जगह बनाने वाली दिग्गज पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने मुंबई स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। हिंदी, मराठी, गुजराती समेत कई भारतीय भाषाओं में अपने यादगार गीतों से पहचान बनाने वाली सुमन कल्याणपुर के निधन से संगीत प्रेमियों और फिल्म जगत में शोक की लहर है।
मराठी सिनेमा से शुरू हुआ था सुनहरा सफर
सुमन कल्याणपुर ने अपने गायन करियर की शुरुआत वर्ष 1953 में मराठी सिनेमा से की थी। उनका पहला गीत 'शुक्राची चांदनी' था, जिसने उनके संगीत सफर की नींव रखी। इसके बाद उन्होंने हिंदी फिल्म 'दरवाजा' से बॉलीवुड में कदम रखा और फिल्म के चार गीत गाकर अपनी अलग पहचान बनाई।

रेडियो से फिल्मों तक का यादगार सफर
बचपन से ही गायन और चित्रकला में रुचि रखने वाली सुमन ने कॉलेज के दिनों में संगीत की विधिवत शिक्षा प्राप्त की। वर्ष 1952 में उन्हें ऑल इंडिया रेडियो पर गाने का अवसर मिला, जिसने उनके करियर को नई दिशा दी। इसके बाद उन्हें लगातार फिल्मों में गाने के प्रस्ताव मिलने लगे और उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

महान गायकों के साथ दिए अमर युगल गीत
अपने लंबे और सफल करियर के दौरान सुमन कल्याणपुर ने मोहम्मद रफी, मन्ना डे और तलत महमूद जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ कई यादगार युगल गीत गाए। उनकी गायकी की मिठास और भावपूर्ण प्रस्तुति ने उन्हें संगीत जगत की विशिष्ट पहचान दिलाई।
850 से अधिक हिंदी गीतों को दी अपनी आवाज
सुमन कल्याणपुर ने हिंदी, मराठी और गुजराती समेत कई भाषाओं में गीत गाए। उन्होंने 850 से अधिक हिंदी गाने रिकॉर्ड किए, जिनमें 'ज़िंदगी इम्तेहान लेती है', 'बहना ने भाई की कलाई में' और आजकल तेरे-मेरे प्यार के चर्चे जैसे लोकप्रिय गीत शामिल हैं। उनकी आवाज़ की तुलना अक्सर लता मंगेशकर से की जाती थी, जिसके कारण उन्हें 'दूसरी लता मंगेशकर' भी कहा जाता था।
पद्म भूषण समेत कई सम्मानों से हुईं सम्मानित
संगीत के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान को देखते हुए उन्हें कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया। उन्हें गदिमा अवॉर्ड और भारत सरकार के पद्म भूषण सहित अनेक पुरस्कार प्राप्त हुए। उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।












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