सूर्य पर फिर हुआ विस्फोट, धरती से इस दिन टकराएगा भूचुंबकीय तूफान, 21,85,200 km प्रति घंटे होगी रफ्तार
कोलकाता, 30 मार्च: इसी साल जनवरी में सूर्य पर एक विस्फोट हुआ था, जिसकी चपत अरबपति अमेरिकी कारोबारी एलन मस्क को भी लग चुकी है। इसके चलते उनकी कम से कम 40 स्पेसलिंक सैटेलाइट बर्बाद हो गए थे। गौरतलब है कि उन्हीं की सैटेलाइट प्रोजेक्ट की वजह से अभी यूक्रेन में कई लोग अपनों से बिछड़ जाने के बावजूद संपर्क कायम कर पा रहे हैं। लेकिन, यहां खबर ये है कि एकबार फिर से सूरज की सतह पर काफी शक्तिशाली विस्फोट हुआ है। इसके चलते एकबार फिर से धरती से भूचुंबकीय तूफान के टकराने की आशंका पैदा हुई है, जिसकी रफ्तार 21,85,200 किलोमीटर प्रति घंटे बताई जा रही है।

सूर्य पर फिर हुआ विस्फोट
नए सौर चक्र में सूर्य बहुत ही ज्यादा सक्रिय हो रहा है और इसकी वजह से एक कोरोनल मास इजेक्शन (सीएमई) हुआ है, जो बहुत ही तेज रफ्तार से धरती की ओर बढ़ा चला आ रहा है। कोलकाता स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन स्पेस साइंसेज एट इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च ने अनुमान जताया है कि इसकी वजह से पैदा हुई असीम ऊर्जा और प्लाजमा पृथ्वी से टकराएगी। कोरोनल मास इजेक्शन सूर्य की सतह पर सबसे बड़े विस्फोटों में से एक है। इसकी वजह से अंतरिक्ष में कई लाख मील प्रति घंटे तक की रफ्तार से अरबों टन पदार्थ फैल सकते हैं।

ग्रहों, उपग्रहों और संचार नेटवर्क को खतरा
सूरज से निकली यह ऊर्जा विभिन्न ग्रहों से होते हुए गुजर सकती है, जिसके चलते उसके रास्ते में आने वाला कोई भी ग्रह या अंतरिक्ष यान या उपग्रह प्रभावित हो सकता है। जब वास्तव में कोई कोरोनल मास इजेक्शन (सीएमई) पृथ्वी से होकर गुजरता है तो यह हमारे उपग्रहों के उपकरणों और धरती के रेडियो संचार नेटवर्क को बाधित या फिर पूरी तरह से तबाह कर सकता है। हमारी पृथ्वी इन प्राकृतिक घटनाओं की गवाह कई बार बन चुकी है।

गुरुवार को टकरा सकता है भू-चुंबकीय तूफान
बीते 28 मार्च को सूरज के सक्रिय क्षेत्रों 12975 और 12976 से यह सोलर फ्लेयर्स (सूर्य की धधकती ऊर्जा) मुक्त हुआ था। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन स्पेस साइंसेज एट इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च ने कहा है कि जब यह सोलर फ्लेयर्स पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराएगा तो कोरोनल मास इजेक्शन की वजह से मध्यम भू-चुंबकीय तूफान उठने की संभावना है। इसके एक ट्वीट के मुताबिक, 'हमारा मॉडल 31 मार्च को 496-607 किलोमीटर/सेकंड की गति से पृथ्वी से टकराने की बहुत ही ज्यादा संभावना की ओर इशारा कर रहा है।' (1 किलीमीटर प्रति सेकंड यानी 3600 किलोमीटर प्रति घंटे)

एनओएए ने भी लगाई भविष्यवाणी पर मुहर
अमेरिका के नेशनल ओशीऐनिक एंड एटमोस्फेरिक एडिमिनिस्ट्रेशन (एनओएए) स्थित स्पेस वेदर प्रेडिक्शन सेंटर ने भी इस सेंटर के अनुमानों को सही बताया है और भविष्यवाणी की है कि जी3 क्लास का भूचुंबकीय तूफान 31 मार्च को धरती से टकराएगा। इसने यह चेतावनी भी जारी की है कि इसकी वजह से सैटेलाइट के पार्ट्स में सर्फेस चार्जिंग की घटनाएं हो सकती हैं, पृथ्वी की निचली कक्षा वाले सैटेलाइट का खिंचाव बढ़ सकता है और इससे पैदा हुई समस्याओं के निदान तलाशने पड़ सकते हैं। (ऊपर की तस्वीरें-प्रतीकात्मक)

फरवरी में तबाह हुए थे 40 स्टारलिंक सैटेलाइट
पृथ्वी से भूचुंबकीय तूफान की टकराने की यह कोई पहली घटना नहीं है। इसी साल फरवरी की शुरुआत में इसकी चपेट में एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स भी आ चुकी है। इसकी वजह से उनके 40 स्टारलिंक सैटेलाइट तबाह हो गए थे। तब पिछले 30 जनवरी को सूरज पर विस्फोट हुआ था और इसकी वजह से कोरोनल मास इजेक्शन पैदा हुआ था। यह स्थिति सूर्य पर करीब 4 घंटे रही थी।
भविष्य में और भी ज्यादा शक्तिशाली सौर विस्फोट की आशंका
यही नहीं इस सेंटर ने सूरज की सतह पर ऐसे नए क्षेत्र के बारे में भी बताया है, जो भविष्य में इससे भी ज्यादा फ्लेयर्स पैदा कर सकता है। इसके मुताबिक एआर12975 और एआर12976 क्षेत्र चुंबकीय तौर पर जुड़े हुए हैं और संभावना है कि ये एक्स क्लास फ्लेयर पैदा कर सकते हैं। गुरुवार के प्रभाव से अरुणोदय (ऑरोरा) की स्थिति बनने की संभावना है, जिसे कम ऊंचाई पर देखा जा सकता है। इसके चलते पावर ग्रिड और संचार नेटवर्क भी प्रभावित हो सकते हैं।












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