'हिंदी थोपी नहीं जा सकती, उत्तरी राज्यों में तेलुगु क्यों नहीं पढ़ाई जाती', भाषा विवाद पर बोले नारा लोकेश

Nara Lokesh: आंध्र प्रदेश के आईटी और मानव संसाधन विकास मंत्री नारा लोकेश ने हिंदी थोपे जाने की आशंकाओं को खारिज कर दिया है। नारा लोकेश ने कहा कि भारत की भाषाई विविधता इस तरह के किसी भी कदम को रोक देगी। नारा लोकेश ने इस बात पर जोर दिया कि हर राज्य अलग है और उसे अपनी स्थानीय भाषा को बढ़ावा देने की आजादी होनी चाहिए।

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2025 में बोलते हुए नारा लोकेश ने कहा, ''हिंदी थोपी नहीं जा सकती है। मुझे नहीं लगता कि भारत में थोपे जाने की घटनाएं होंगी। मेरा मानना ​​है कि हर राज्य अलग है। जब मैं शिक्षा मंत्री से मिला, तो उनका ध्यान राज्य में शिक्षा के माध्यम के रूप में तेलुगु को बढ़ावा देने पर अधिक था।"

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उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार ने मातृभाषाओं को मजबूत करने में भरोसा दिखाया है। उन्होंने क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने के प्रयासों का नेतृत्व करने के लिए टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू को भी श्रेय दिया।

नारा लोकेश बोले- हिंदी को थोपा नहीं जा सकता

नारा लोकेश ने नई शिक्षा नीति के तहत भारत के सभी राज्यों में हिंदी को बढ़ावा देने पर कहा कि भारत में भाषाई विविधता है इसलिए हिंदी को थोपा नहीं जा सकता। नारा लोकेश ने तीन-भाषा नीति से आगे बढ़ाते हुए भारतीय छात्रों को जर्मन और जापानी जैसी वैश्विक भाषाएं सीखने की भी वकालत की।

उन्होंने कहा, "जर्मनी और जापान में नौकरी के कई अवसर खुल रहे हैं, खास तौर पर नर्सों और होमकेयर पेशेवरों के लिए। हमने नर्सों को जर्मन और जापानी भाषा सिखाने के लिए समझौते किए हैं, जिससे विदेशों में गतिशीलता और रोजगार के अवसर सुनिश्चित होंगे।"

नारा लोकेश बोले- उत्तरी राज्यों में तेलुगु क्यों नहीं पढ़ाई जा सकती?

बहुभाषावाद के महत्व पर जोर डालते हुए लोकेश ने सवाल उठाया कि उत्तरी राज्यों में तेलुगु क्यों नहीं पढ़ाई जा सकती। उन्होंने कहा, "बच्चों को वह सीखने का अवसर दें जो वे सीखना चाहते हैं। मैं हिंदी में काफी धाराप्रवाह हूं, हैदराबाद से हूं ना, हिंदी अच्छी है।" उन्होंने जोर देकर कहा कि आधुनिक दुनिया में कई भाषाएं सीखना जरूरी है।

तेलंगाना CM रेवंत रेड्डी ने भी हिंदी को थोपे जाने का किया था विरोध

एक दिन पहले इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2025 में बोलते हुए तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने हिंदी को थोपे जाने का कड़ा विरोध किया और कहा कि इसे जबरन थोपे जाने के बजाय एक विकल्प के रूप में रहना चाहिए।

भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा हिंदी को बढ़ावा दिए जाने की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा, "हिंदी राष्ट्रीय भाषा नहीं है। मोदीजी हिंदी के लिए बहुत प्रयास कर रहे हैं, लेकिन तेलुगु दूसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। आपने इसके लिए क्या किया है?"

रेड्डी ने पीएम मोदी पर तीखा कटाक्ष करते हुए बताया कि उन्होंने हिंदी सीखने का फैसला क्यों किया। उन्होंने तंज करते हुए कहा, "हिंदी में बोल रहा हूं न? मोदी जी को जवाब देने के लिए हिंदी सीखी न।" उन्होंने तर्क दिया कि भाषा को अवसर का साधन होना चाहिए, न कि मजबूरी, उन्होंने याद दिलाया कि कैसे कॉलेजों में छात्रों के पास जर्मन, फ्रेंच या संस्कृत पढ़ने का विकल्प होता है।

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