आंध्र में TDP-BJP-JSP के साथ आने से कितना बदला समीकरण? क्या जगन मोहन रेड्डी का जलवा कायम रहेगा?

Andhra Pradesh Election: आंध्र प्रदेश में इस बार का लोकसभा और विधानसभा चुनाव तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के नेता चंद्रबाबू नायडू के लिए सियासी तौर पर 'करो या मरो' जैसा है। दूसरी तरफ सत्ताधारी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के सुप्रीमो मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी के लिए भी यह बहुत ही मुश्किल लड़ाई है।

आंध्र प्रदेश में चौथे चरण में लोकसभा की सभी 25 और विधानसभा की सभी 175 सीटों के लिए सोमवार को चुनाव हुए हैं। जहां, जगन मोहन रेड्डी को अपनी सरकार की लोकप्रिय योजना पर यकीन है, वहीं नायडू को राज्य सरकार की पांच साल की एंटी-इंकंबेंसी और फिर से उठ खड़ा हुआ विपक्षी गठबंधन एनडीए में यकीन है।

ap chunav

2019 में आंध्र प्रदेश में जगन रेड्डी ने विपक्ष का कर दिया था सफाया
पवन कल्याण की जन सेना पार्टी, बीजेपी, टीडीपी गठबंधन में एक नई सहयोगी की भूमिका में आकर इनका मनोबल बढ़ाने की कोशिश करती नजर आई है। 2019 में वाईएसआरसीपी ने विधानसभा की 151 सीटें और लोकसभा की 22 सीटें जीतकर विधायकों और सांसदों के अंक गणित में विपक्ष की लगभग सफाया कर दिया था।

वाईएसआरसीपी और एनडीए में सीधा मुकाबला
इस बार मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी को अपनी सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ 'नवरत्नालु प्लस' की चुनावी गारंटियों पर भरोसा है। वहीं टीडीपी, बीजेपी और जन सेना (जेएसपी) गठबंधन ने जगन सरकार की नाकामियों को उजागर करके और बेरोजगारी मिटाने के उसके वादों की नाकामी पर उसे घेरने की कोशिश की है। कांग्रेस भी चुनाव मैदान में है, जिसने अपनी गंवाई हुई प्रतिष्ठा की वापसी के लिए काफी मुश्किल से जोर लगाने की कोशिश की है।

राजधानियों की नहीं सुलझा है विवाद
जगन अमरवाती को विधायी राजधानी और कुर्नूल को न्यायिक राजधानी के रूप में विकसित करने के वादे कर चुके हैं। 2024 में चुनाव जीतते ही वे विशाखापत्तनम को राज्य सरकार की राजधानी घोषित करने जैसे वादे भी कर चुके हैं। जबकि, टीडीपी चीफ ने तीन-तीन राजधानी बनाने की उनकी घोषणा की कड़ी आलोचना की है।

मुस्लिम आरक्षण के मसले पर मुश्किल में दिखी है टीडीपी
इस बार आंध्र प्रदेश चुनाव में मुस्लिम आरक्षण का मुद्दा भी चुनावों में हावी रहा है और इसपर काफी हो-हल्ला करने के बावजूद टीडीपी कमजोर विकेट पर बैटिंग करती नजर आई है। जहां जगन ने 4 फीसदी मुस्लिम आरक्षण को सुरक्षित रखने का वादा किया है, वहीं चंद्रबाबू नायडू की ओर से इसका भरोसा दिए जाने के बावजूद बीजेपी के सख्त विरोध की वजह से उन्हें इस मुद्दे पर पड़ने वाले मुसलमान वोट का नुकसान उठाना पड़ सकता है।

बीजेपी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से लेकर तमाम शीर्ष नेताओं ने किसी भी हालात में मुस्लिम आरक्षण नहीं होने देने की बात कही है और इसे रेड्डी ने नायडू के खिलाफ हथियार बनाकर खूब इस्तेमाल करने की कोशिश की है।

जहां वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने मासिक कल्याणकारी पेंशन को 3,000 रुपए से बढ़ाकर 3,500 रुपए करने का वादा किया है तो एनडीए की ओर से बेरोजगार युवकों को 3,000 रुपए महीने की वित्तीय सहायता देने की बात कही गई है।

टीडीपी हारी थी, लेकिन उसका जनाधार आज भी मजबूत है
2019 के विधानसभा चुनावों में टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी को मिली सीटों में तो काफी बड़ा गैप था, लेकिन वोट शेयर के मामले में चंद्रबाबू नायडू ने उतनी बुरी स्थिति के बावजूद अपना एक मजबूत जनाधार साबित किया था। मसलन, विधानसभा चुनावों में वाईएसआर कांग्रेस को 49.95% वोट मिले थे तो टीडीपी को 39.17% पड़े थे।

आंध्र प्रदेश का चुनाव परिणाम अप्रत्याशित हो सकता है!
इसी तरह से साथ ही हुए लोकसभा चुनावों में जगन मोहन की पार्टी को लगभग 50% वोट मिले थे तो चंद्रबाबू नायडू की पार्टी को करीब 41% मत पड़ थे। दोनों ही चुनावों में भाजपा को लगभग 1% वोट आए थे। बीते पांच वर्षों में राज्य में काफी कुछ बदला है। तब जगन मोहन रेड्डी सहानुभूति लहर की वजह से तूफान बने हुए थे तो इस बार नायडू की गिरफ्तारी ने उन्हें एक बड़ा चुनावी हथियार थमा दिया है।

इस तरह से आंध्र प्रदेश का इस बार का चुनाव का परिणाम बहुत ही चौंकाने वाला हो सकता है, जिसमें कल्याणकारी योजनाओं की भरमार है तो 'अंडर करंट' क्या गुल खिलाता है, यह बहुत बड़ी सवाल बना हुआ है।

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