रेलवे ट्रैक पर बदहवास चल रहा था अनाथ बच्चा, लोको पायलट ने परिवार वालों से मिलाने के लिए क्या किया ? जानिए

मुंबई, 24 जुलाई: सेंट्रल रेलवे के एक लोको पायलट ने एक गुमशुदा और अनाथ बच्चे को उसके परिवार वालों से मिलाने के लिए जो किया है, ऐसा आमतौर पर कम ही सुनने को मिलता है। लोको पायलट ने बिना अपनी ड्यूटी से समझौता किए उस बच्चे को अपने साथ बिठाया, उसे खाना खिलाया और ड्यूटी पूरी होने के बाद उसे उसके परिवार वालों से मिलवाने की मुहिम में जुट गया। काफी प्रयासों के बाद उसका मिशन कामयाब हुआ और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल के जरिए 12 साल के उस बच्चे के परिवार वालों से संपर्क हो गया।

लोको पायलट ने एक गुमशुदा बच्चे को बचाया

लोको पायलट ने एक गुमशुदा बच्चे को बचाया

भारतीय रेलवे के एक युवा लोको पायलट ने अपनी ड्यूटी के दौरान एक ऐसा काम किया है, जिसकी काफी वाहवाही हो रही है। आमतौर पर कोई रेलवे ड्राइवर अपनी जिम्मेदारी से भरपूर ड्यूटी में इस कदर डूबा होता है कि उसे अपने काम से अलग हटकर सोचने का समय ही नहीं होता। लेकिन, लोको पायलट रविंद्र कुमार सैनी ने जो किया है, उसकी जितनी भी तारीफ की जाए वह कम है। वह जब एक माल गाड़ी लेकर जा रहे थे तो महाराष्ट्र के पनवेल-रोहा रूट पर एक दूर-दराज उजाड़ से इलाके में रेलवे ट्रैक के किनारे से बहुत ही थके हुए और परेशान बच्चे पर उनकी नजर पड़ी। 12 साल के उस मासूम को देखकर सैनी से रहा नहीं गया। उन्हें पता चल गया था कि यह बच्चा अपने परिवार से बिछड़ गया है। बिना वक्त गंवाए उन्होंने उस बच्चे को अपने संरक्षण में लेने का फैसला कर लिया।

पहले बच्चे को अपने संरक्षण में ले लिया

पहले बच्चे को अपने संरक्षण में ले लिया

रविंद्र कुमार सैनी सेंट्रल रेलवे में लोकोमोटिव पायलट हैं और वह राष्ट्रीय स्तर के रेलवे की प्रतियोगिता में बॉक्सिंग प्लेयर होने के नाते मेडल भी जीत चुके हैं। लेकिन, इस बार उन्होंने अपनी ड्यूटी के साथ, एक बच्चे को सहारा देने का जो जज्बा दिखाया है, उसके लिए कोई मेडल भी कम पड़ जाता है। सैनी ने बच्चे को तुरंत न सिर्फ अपनी टिफिन से खाना खिलाया, बल्कि एक दिन के अंदर उसके परिवार वालों से संपर्क करने में भी सफल हुए। (लोको पायलट सैनी की तस्वीर-सौजन्य टीओआई अखबार की कटिंग से)

ट्रेन से माल उतरते समय नजर पड़ी थी

ट्रेन से माल उतरते समय नजर पड़ी थी

बुरी तरह से परेशान और कम से कम एक दिन से भूखे-प्यासे रेलवे लाइन के सहारे चल रहे उस बच्चे की स्थिति जब थोड़ी सुधरी तो उसने बताया कि उसके माता-पिता इस दुनिया में नहीं हैं और वह उत्तर प्रदेश का रहने वाला है। उसने यह भी बताया कि वह अपनी मौसी के साथ पनवेल आया था, जिनसे वह बिछड़ गया है। 11 जुलाई को सैनी की उसपर तब नजर पड़ी थी, जब उनकी ट्रेन से माल उतारा जा रहा था। उन्होंने देखा कि बच्चा किसी से रास्ता पूछ रहा है। वो बोले- 'अंधेरा होने लगा था, इसलिए मैंने उस लड़के को अपने इंजन में बिठाया और अपनी टिफिन से खाना खिलाया। उसे जल्द ही झपकी सी आ गई।' जब आधी रात के बाद उनकी ड्यूटी पूरी हुई तो उन्होंने बच्चे को उठाया और उसके परिवार वालों के बारे में पूछा।

यूपी में नाना-नानी के साथ रहता था बच्चा

यूपी में नाना-नानी के साथ रहता था बच्चा

बच्चे ने सैनी से कहा कि उसके माता-पिता नहीं हैं और वह बुढेड़ा में अपने नाना-नानी के साथ रहता था। लेकिन, ना तो उसे अपने पते की जानकारी थी और ना ही कोई फोन नंबर पता था। इसपर सैनी ने उसे घर ले जाने का फैसला किया। रेल मंत्रालय के स्पेशल ऑपरेटिंग प्रोसेड्योर के मुताबिक अगर कोई खोया हुआ बच्चा मिलता है, तो उसे मिलने के 24 घंटों के अंदर बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश करना होता है। उन्होंने कहा, 'बच्चे ने बताया था कि घर पर उसका एक आधार कार्ड है। इसलिए मैंने सोचा कि उसे एक आधार केंद्र ले जाता हूं और उनसे मदद मांगता हूं।'

बच्चे के अंकल उसे ले जाने के लिए तैयार हो गए

बच्चे के अंकल उसे ले जाने के लिए तैयार हो गए

इस दौरान सैनी ने क्या किया कि लोको पायलट के एक व्हाट्सऐप ग्रुप पर उस बच्चे के मिलने की जानकारी, उसकी पूरी डिटेल के साथ शेयर कर दी। कुछ ही घंटों बाद सैनी को फोन आने शुरू हो गए। उनके मुताबिक, 'आखिरकार लड़के के गांव का एक निवासी पहुंचा।' काफी इधर-उधर करने के बाद बच्चे के अंकल 13 जुलाई को मुंबई आने के लिए तैयार हो गए। इस तरह से ड्यूटी से अलग निभाई गई एक जिम्मेदारी ने उस बच्चे की जिंदगी बचा ली है।(बाकी तस्वीरें- प्रतीकात्मक)

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