अमिताभ ने लिखी नव्या-आराध्या के नाम भावुक चिट्ठी, बताई अपनी ख्वाहिश
नई दिल्ली। बॉलीवुड एक्टर अमिताभ बच्चन ने अपनी पोती आराध्या और नातिन नव्या के लिए बेहद खास खत लिखा है। भले ही ये खत उन्होंने अपने नातिन और पोती के लिए लिखा है लेकिन इसमें जिन बातों का जिक्र किया गया है उसे हर लड़की को पढ़ना चाहिए।

अमिताभ बच्चन ने लिखा बेहद खास खत
अपनी पोती और नातिन को संबोधित करते हुए अमिताभ बच्चन ने देश में महिलाओं की स्थिति का जिक्र अपने पत्र में किया है। उन्होंने लिखा है कि देश में महिलाओं को लेकर तरह-तरह की टिप्पणियां की जाती है। महिलाओं के खिलाफ अपराध लगातार बढ़ रहे हैं। उन्हें घर के बाहर ही नहीं अपनों के बीच भी डर का अहसास बना रहता है।
बिगबी ने अपने पत्र में आराध्या और नव्या को संबोधित करते हुए कहा कि आपको स्वेच्छा से अपना फैसला लेना चाहिए। अपनी इच्छा का चुनाव खुद से करना चाहिए और आपको ये चिंता नहीं करनी चाहिए कि लोग क्या कहेंगे।
अमिताभ ने माना कि आपके नाम और उपनाम से आपको थोड़ी सहूलियतें मिलेंगी लेकिन बावजूद इसके आप महिला हैं और इसलिए लोग अपनी सोच को आप पर थोपने की कोशिश करेंगे। आपको इससे पार पाने की कोशिश करनी होगी। जिससे कोई आप पर अपनी बातें थोप नहीं सके।
हालांकि महिलाओं को इस संसार कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है बावजूद इसके मेरी नातिन और पोती जैसी लड़कियां इस धारणा को बदल सकती हैं। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता है तो ये आराध्या और नव्या के दादा और नाना के लिए सम्मान होगा।
पढ़िए, बिगबी का पूरा पत्र
अमिताभ बच्चन ने पत्र में लिखा कि आप दोनों के कंधों पर बेहद खास विरासत है जिसे आप संभाल रही हैं। आराध्या पर उनके परदादा डॉक्टर हरिवंश राय बच्चन की विरासत है वहीं नव्या पर उनके परदादा एचपी नंदा की विरासत है। तुम दोनों को अपने परदादा से मिले सरनेम की प्रतिष्ठा को सहेजना होगा।
भले ही तुम लोग नंदा या बच्चन हो, लेकिन तुम लोग लड़कियां हो...महिला हो! और महिला होने की वजह से लोग तुम पर अपनी विचार थोपने की कोशिश करेंगे। तुम पर दबाव बनाएंगे। वो तुमसे कहेंगे कि तुम्हें कैसे कपड़े पहनने चाहिए, कैसा व्यवहार करना चाहिए, किससे तुम्हें मिलना चाहिए और कहां जाना चाहिए।
नव्या और आराध्या को लिखा पत्र
तुम्हें लोगों के फैसलों से दबने की जरूरत नहीं है। तुम्हें स्वविवेक से अपना फैसला लेने का हक है। किसी को तुम्हारे स्कर्ट का लंबाई से तुम्हारे चरित्र का पैमाना तय करने का हक बिल्कुल मत देना। किसी को भी ये सलाह देने का हक मत देना कि वो बताएं तुम्हें किसे दोस्त बनाना चाहिए और किसे नहीं बनाना चाहिए।
किसी के दबाव में या फिर किसी भी वजह से तुम लोग शादी के लिए तैयार नहीं होना जब तक कि तुम खुद शादी का फैसला नहीं कर लो। लोग बातें करेंगे। वो कई अजीब बातें करेंगे। लेकिन आपको उनकी सुनने की जरूरत नहीं है। कभी ये सोच के परेशान नहीं होना कि लोग क्या कहेंगे। आखिर तुम दोनों ही हो जिस पर खुद लिए गए फैसले का असर होगा इसलिए परेशान नहीं होना। किसी को भी अपने फैसले पर बोलने का हक नहीं देना।
4 सितंबर को लिखा पत्र
नव्या- तुम्हारा नाम, तुम्हारा सरनेम, तुम्हें उन समस्याओं से नहीं बचा सकता जो एक महिला के सामने आती हैं।
आराध्या- समय के साथ तुम इसे समझोगी, हो सकता है उस समय मैं तुम्हारे आस-पास नहीं रहूं, लेकिन जो मैं आज कह रहा हूं हो सकता है उस समय तुम्हारे लिए प्रासंगिक हो।
एक महिला के लिए ये दुनिया मुश्किल भरी हो सकती है, लेकिन मुझे लगता है कि तुम्हारी जैसी महिलाएं इसे बदल सकती हैं। ये इतना आसान नहीं हो सकता कि खुद से अपनी सीमा तय की जा सके, लेकिन तुम दूसरी महिलाओं के लिए एक मिसाल बनकर निकलोगी।
ऐसा ही करना और जो मैंने आज तक किया है तुम लोग उससे आगे निकलोगी। यही मेरे लिए सम्मान की बात होगी कि मैं अमिताभ बच्चन नहीं बल्कि तुम्हारे दादा-नाना के नाम से जाना जाऊं।












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