अमित शाह ने संभाली दिल्ली चुनाव की जिम्मेदारी, जानिए 'बीजेपी के चाणक्य' की क्या है रणनीति ?
Amit Shah Takes Charge Of Delhi Elections, Know What is the Strategy of 'Chanakya of BJP'दिल्ली चुनाव की पूरी जिम्मेदारी भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने अपने कंधों पर ले ली हैं। जानें क्या रहेंगी उनकी चुनावी रणनीति?
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बेंगलुरु। झारखंड के नतीजे बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के लिए बहुत बड़ा सबक हैं। महाराष्ट्र और हरियाणा चुनावों में भी बीजेपी की फजीहत की वजह सीटों की कम संख्या ही बनी। लिहाजा दिल्ली चुनाव भाजपा के लिए आन, बान और शान की बात बन चुका हैं इसलिए वह इस चुनाव को हल्के में नहीं ले सकती। यही कारण है कि दिल्ली चुनाव की सीधी जिम्मेदारी अब अमित शाह ने अपने कंधों पर ली हैं। हालांकि हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड में भी उन्होंने चुनावी कमान संभाली थी लेकिन वहां नजीते भाजपा की उम्मीद के अनुसार नहीं आए। इसलिए दिल्ली चुनाव को लेकर अमित शाह बहुत सतर्क नजर आ रहे हैं।

बता दें भारतीय निर्वाचन आयोग अब कभी भी दिल्ली विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर देगा, क्योंकि दिल्ली विधानसभा का कार्यकाल 22 फरवरी तक है, ऐसे में 22 फरवरी तक नई सरकार का गठन जरूरी है। वर्तमान में दिल्ली की सत्ता संभाल रही आम आदमी पार्टी समेत अन्य राजनीतिक दलों ने अपने-अपने स्तर पर चुनावी तैयारी शुरू कर दी है। वहीं लगभग 21 सालों से दिल्ली की सत्ता से बाहर बीजेपी, मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर फ़िलहाल कोई फैसला नहीं लिया हैं। वह चुनाव के नफ़े-नुक़सान का आकलन कर रही है कि विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल के मुक़ाबले वह सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़े या फिर मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में किसी चेहरे पर दांव लगाए।

भाजपा नफा-नुकसान देखकर बढ़ा रही कदम
पार्टी सूत्रों का कहना है कि अब तक नेतृत्व की ओर से कोई साफ़ संकेत नहीं दिए गए हैं लेकिन पार्टी में एक बड़ा वर्ग ऐसा है, जिसका मानना है कि किसी चेहरे की बजाय सामूहिक नेतृत्व में पार्टी चुनाव लड़ती है तो उसे दिल्ली में फ़ायदा होगा। लेकिन एक दूसरा वर्ग यह चाहता है कि अगर अरविंद केजरीवाल को कड़ी टक्कर देनी है तो इसके लिए किसी चेहरे को ही सामने लाना होगा।

मोदी के चेहरे पर ही भाजपा लड़ेगी चुनाव!
पार्टी में मुख्यमंत्री के चेहरे पर तब चर्चा शुरू हुई जब एक के बाद लगातार दो कार्यक्रमों में अमित शाह ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बीजेपी सांसद प्रवेश वर्मा से बहस की चुनौती दे डाली थी। इसके बाद माना जा रहा था कि प्रवेश वर्मा को कोई बड़ी ज़िम्मेदारी दी जा सकती है। लेकिन अभी भी असमंजस है कि भाजपा पीएम के चेहरे पर यह चुनाव लड़ेगी या फिर केजरीवाल के मुकाबले में कोई चेहरा मैदान में उतारेगी। पिछले दिनों कुछ राज्यों में हुए चुनाव के परिणामों में मुख्यमंत्री के चेहरे ने कोई कमाल नही किया इसलिए संभावना इस बात की ज्यादा है कि भाजपा यह चुनाव पीएम मोदी के दम पर लड़ेगी।

इन मुद्दों पर भाजपा करेगी टारगेट
गौरतलब है कि दिल्ली की राजनीति के हिसाब से पिछले पांच साल बहुत महत्वपूर्ण रहे हैं। सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी जहां अपने काम के बारे में लोगों को बताते हुए चुनाव में उतरने की तैयारी कर रही है, वहीं बीजेपी इस केंद्र सरकार के काम को भुनाने की तैयारी में है। अन्य राज्यों में जहां जातिगत समीकरण सबसे आगे होते हैं लेकिन दिल्ली में स्थानीय मुद्दे हावी रहेंगे। इसलिए अमित शाह भी स्थानीय मुद्दों को टारगेट करके अपनी चुनावी रणनीति तैयार कर रहे हैं। इस चुनाव में बीजेपी का पूरा फोकस अपने वोट पर्सेंटेज को बढ़ाने पर होगा। आम आदमी पार्टी को सत्ता से हटाने के लिए बीजेपी अपने 30 फीसदी के वोट फीसदी को आगे बढ़ाने की जुगत में लगी है।

समितियों का किया गठन
बता दें पिछले दिनों भाजपा ने कच्ची कालोनियों को नियमित करके जनता का दिल जीत लिया था। इसी को ध्यान में रखते हुए अमित शाह दिल्ली के हर क्षेत्र की जनता से जुड़ी समस्याओं और मांगों को टटोल चुके हैं। बता भाजपा ने विधानस्भा चुनाव के लिए चुनावी समितियों का गठन भी कर दिया हैं। इन समितियों के पदाधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई है। इस समिति में सोशल मीडिया से लेकर कैंपेनिंग तक के लिए अलग-अलग स्तर की समिति का गठन किया है।

सांसदों को दिया गया है ये टास्क
इतना ही नहीं अमित शाह ने दिल्ली के सांसदों को चुनावी टास्क दिया हैं। जिसमें दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी पूर्वांचल से जुड़े लोगों पर फोकस करेंगे। इसी तरह प्रवेश वर्मा को ओबीसी तबके से जुड़े मामले और हंसराज हंस को अनुसूचित जाति से जुड़े मसले देखने को कहा गया है। युवाओं से जुड़ी समस्याओं पर गौतम गंभीर काम कर रहे हैं। जबकि महिलाओं के मुद्दे मीनाक्षी लेखी देखेंगी और कारोबारियों और पार्टी के बीच विजय गोयल सेतु बनने की कोशिश करेंगे।

भाजपा के सामने ये है बड़ी चुनौती
ऐसे में आम आदमी पार्टी की दिल्ली विधानसभा चुनाव में ये ही प्रयास रहेगा कि स्थानीय मुद्दे को हावी बनाये रखे। लोकसभा चुनाव में दिल्ली की जंग केजरीवाल बनाम मोदी की हो गयी थी, इस बार आप को इससे वह अपना बचाव करेंगी। आम आदमी पार्टी सरकारी स्कूल में शिक्षा, अस्पताल, मोहल्ला क्लिनिक, फ्री बस यात्रा, फ्री पानी, 200 यूनिट फ्री बिजली आदि जैसे मुद्दे पर खेल रही है तो बीजेपी कच्ची कॉलोनियों को नियमित करने जैसे मसले निकाल रही है। दिल्ली के वोटर चुनाव से एक हफ्ते पहले के मसले पर वोट करते हैं। इस हिसाब से स्थिति बहुत ही दिलचस्प होने वाली है। दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल वोट बैंक साधने के लिए लोगों को यह समझा सकते हैं कि नागरिकता कानून मुसलमान विरोधी नहीं बल्कि गरीब विरोधी है।

बूथ लेवल मैनेजमेंट में जुटी भाजपा
चुनावों में अमित शाह की कामयाबी का राज उनके बूथ लेवल मैनेजमेंट में छिपा होता है। दिल्ली चुनाव में भी अमित शाह इसमें जुट चुके हैं। आगामी 5 जनवरी को अमित शाह 15000 बूथ कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे। अमित शाह 15 हजार बूथ कार्यकर्ताओं को दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में संबोधित करेंगे। दरअसल, अमित शाह को केजरीवाल ही नहीं उनकी चुनावी मुहिम देख रहे प्रशांत किशोर को भी ध्यान में रख कर रणनीति तैयार करनी है और वो उनके भी दांवपेच से बखूबी वाकिफ हैं । देखें तो अमित शाह को पीके के हुनर से भी टक्कर लेनी है। साथ ही, शाह को साबित करना है कि बीजेपी को पीके की जरूरत नहीं है। कुछ भी हो, चुनावी मुकाबला काफी दिलचस्प होने वाला है।












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