फोन टैपिंग के आरोपों को देवेंद्र फडणवीस ने किया खारिज, कही बड़ी बात
नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर से फोन टैपिंग के आरोपों के चलते सत्ता और विपक्ष के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई है। एक तरफ जहां शिवसेना और एनसीपी के नेताओं ने आरोप लगाया है कि देवेंद्र फडणवीस सरकार के दौरान उनके नेताओं के फोन टैप किए गए। वहीं दूसरी तरफ देवेंद्र फडणवीस ने इन आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि फोन टैपिंग करना महाराष्ट्र की राजनीति की संस्कृति नहीं है। फडणवीस ने कहा कि फोन टैपिंग महाराष्ट्र की राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा नहीं है, राज्य सरकार ने कभी भी इस तरह का कोई आदेश नहीं दिया था। जिन लोगों ने शिकायत की है, हर कोई जानता है वह कितने भरोसेमंद लोग हैं।
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चाहे तो इजरायल जाएं जांच के लिए
फडणवीस ने कहा कि अगर सरकार इन आरोपों की जांच करना चाहती है, तो वह यह करने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र हैं। महाराष्ट्र के लोग सच जानते हैं। गृह मंत्रालय में शिवसेना का मंत्री है। मैं सिर्फ अपील कर सकता हूं कि उन्हें जांच करनी चाहिए और जल्द से जल्द इसकी जांच पूरी करके इसकी रिपोर्ट को सार्वजनिक करना चाहिए। अगर जरूरत पड़े तो इन लोगों को जांच के लिए इजरायल भी जाना चाहिए। बता दें कि महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने आरोप लगाया था कि एनसीपी चीफ शरद पवार, शिवसेना मुखिया उद्धव ठाकरे और संजय राउत के फोन पूर्व की भाजपा सरकार ने टैप कराए थे।

राउत ने लगाया आरोप
गृहमंत्री के बयान के बाद संजय राउत ने ट्वीट करके इस आरोपों को और हवा दी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने खुद उन्हें बताया था कि उनका फोन टैप किया जा रहा है। मैंने उन्हें बताया था कि जो भी मेरा फोन सुनना चाहता है वह सुन सकता है। मैं बालासाहेब ठाकरे का शिष्य हूं, मैं कुछ भी छुप कर नहीं करता हूं। संजय राउत ने ट्वीट करके लिखा, आपके फोन टैप हो रहे है..ये जानकारी मुझे भाजपा एक वरिष्ठ मंत्रीने भी दे रखी थी. मैने कहां था..भाई साहेब..मेरी बात अगर कोई सुनना चाहता है. तो स्वागत है..मै बाळासाहेब ठाकरेजी का चेला हूं. कोई बात या काम छुप छुपकर नही करता..सुनो मेरी बात..

चुनाव बाद भी जारी थी टैपिंग
आरोप है कि फोन की टैपिंग चुनाव खत्म होने के बाद भी जारी थे और शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के गठबंधन को लेकर जब चर्चा चल रही थी तो इस दौरान भी फोन को टैप किया जा रहा था। एनसीपी ने यह भी आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार ने शरद पवार के दिल्ली आवास की सुरक्षा को हटा दिया था। यह फैसला बिना उन्हें पूर्व जानकारी दिए लिया गया था।












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