छात्र खुद यूक्रेन छोड़ने को तैयार नहीं थे क्योंकि..., छात्रोंं को निकालने में देरी के आरोपों पर केंद्र सरकार
भारत सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि सरकार ने यूक्रेन से अपने नागरिकों को निकालने में देरी कर दी। वहीं, भारत सरकार ने इन आरोपों का खंडन किया है।
नई दिल्ली, 2 मार्च। रूस-यूक्रेन युद्ध का आज सातवां दिन है। दोनों सेनाओं के बीच जबरदस्त जंग जारी है। रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किा है कि उसकी सेना ने यूक्रेन के दक्षिणी शहर खेरसन पर भी कब्जा कर लिया है। संकटग्रस्त यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों को जल्द से जल्द निकालने के भारत सरकार द्वारा लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों को वहां से निकालने के लिए ऑपरेशन गंगा चलाया गया है। इसी बीच भारत सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि सरकार ने यूक्रेन से अपने नागरिकों को निकालने में देरी कर दी। वहीं, भारत सरकार ने इन आरोपों का खंडन किया है। भारत के विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि यह आरोप की हमने अपने छात्रों को निकालने में देरी की, सही नहीं है।

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उन्होंने कहा देरी हमारी वजह से नहीं बल्कि खुद छात्रों की वजह से ही हुई। छात्र यूक्रेन छोड़ना ही नहीं चाहते थे। छात्रों का कहना था कि विश्वविद्यालय ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हमने 24 फरवरी से पहले छात्रों को यूक्रेन छोड़ने के लिए पहली एडवाइजरी जारी की थी।
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एक कार्यक्रम में संवाददाताओं से बातचीत में वी मुरलीधर ने कहा कि यूक्रेन में लगभग 20,000 छात्र फंसे हुए थे जिसमें से 4 हजार छात्रों को 24 फरवरी को ही वापस लाया गया था। इसके बाद 2 हजार छात्रों को मंगलवार को वापस लाया गया। उन्होंने कहा कि यूक्रेन की सीमा से लगे अन्य देशों के माध्यम से भारतीय छात्रों को वहां से निकालन का प्रयास जारी है। मुरलीधरन ने कहा कि चूंकि यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों की संख्या काफी अधिक है, इसलिए उन्हें लाने के लिए रक्षा विमानों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यूक्रेन के पड़ोसी देशों-रोमानिया, पोलैंड, हंगरी और स्लोवाकिया की मदद से भारतीयों को वहां से सुरक्षित निकालकर भारत लाया जा रहा है।












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