जानिए कौन है सफदर नागौरी और कितना खूंखार है ये आतंकी
सफदर नागौरी उज्जैन के नागौरी गांव का रहने वाला है। उसने पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री ली हुई है। डिग्री लेने के बाद सिमी की गतिविधियों का प्रचार-प्रसार करने वाली पत्रिका तहरीर का संपादक रहा।
नई दिल्ली। आतंकी संगठन सिमी के मास्टर माइंड सफदर नागौरी समेत 11 आतंकियों को इंदौर की जिला अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। नागौरी और 10 अन्य के खिलाफ हथियार, विस्फोटक और गोला-बारूद रखने तथा 'राष्ट्र-विरोधी' गतिविधियों की योजना बनाने का दोषी पाया गया था। इन सभी आतंकवादियों को स्पेशल टास्क फोर्स ने मार्च 2008 में गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद इंदौर की विशेष सीबीआई अदालत में इनपर ट्रायल चला। आईए आज आपको तस्वीरों के माध्यम से विस्तार से बताते हैं कि कौन है सफदर नागौरी और ये कितना खूंखार है-

एक जमाने में संपादक था नागौरी
सफदर नागौरी उज्जैन के नागौरी गांव का रहने वाला है। उसने पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री ली हुई है। डिग्री लेने के बाद सिमी की गतिविधियों का प्रचार-प्रसार करने वाली पत्रिका तहरीर का संपादक रह चुका है।

1993 से है सिमी का सदस्य
नागोरी 1993 से सिमी का सदस्य रहा है, उसने ऐसे वक्त में हिंसक जिहाद का रास्ता चुना जब संगठन के कई अन्य सदस्यों ने धार्मिक और शैक्षिक गतिविधियों पर ध्यान देना शुरू कर दिया था। 2001 में संगठन पर प्रतिबंध लगने के बाद वह अंडरग्राउंड हो गया।

जम्मू-कश्मीर में ली थी ट्रेनिंग
पूछताछ में नागौरी ने एसटीएफ को बताया था कि सिमी के लड़ाकों को हिजबुल मुजाहिदीन के साथ जम्मू-कश्मीर में ट्रेनिंग मिली थी। नागोरी ने कहा कि उन्हें देशभर में विभिन्न तरह के आतंकी ऑपरेशनों के लिए ट्रेन्ड किया गया था।

कई शहरों में धमाके का मास्टरमाइंड है नागौरी
सफदर नागौरी पर साल 2008 में कई शहरों में हुए एक के बाद एक बम धमाकों का मास्टरमाइंड होने का आरोप था। आपको बता दें कि धमाके कथित तौर पर आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन द्वारा किए गए थे। 26 जुलाई 2008 को हुए इन धमाकों में 57 लोगों की मौत हुई थी।

साल 2000 में हुआ था भगोड़ा घोषित
सजा सुनाए जाने से पहले नागोरी को अहमदाबाद की साबरमती सेंट्रल जेल में रखा गया था। द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, 2001 में छात्र संगठन सिमी को बैन किए जाने से पहले, उज्जैन के महाकाल पुलिस थाने में नागोरी के खिलाफ 1997 में एक मुकदमा दर्ज किया गया था। उसे 11 दिसंबर, 2000 को भगोड़ा घोषित किया गया था।












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