US Israel Iran War: 'ट्रंप ने संसद से 200 मिल‍ियन डॉलर की डिमांड', क्या खत्म होने वाली है जंग?

US Israel Iran War Update: पश्चिमी एशिया क्षेत्र में चल रहे युद्ध ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस गंभीर स्थिति के बीच, अमेरिका ने ईरान के साथ जारी संघर्ष के लिए भारी-भरकम फंडिंग की मांग की है। वहीं, इन तनावों के बीच, इज़रायल ने कैस्पियन सागर में ईरान की नौसेना को निशाना बनाने का दावा करके एक नए मोर्चे को सक्रिय कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से नज़र रखे हुए है, क्योंकि युद्ध अब एक व्यापक रूप लेता जा रहा है।

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने मांगी 200 अरब डॉलर की धनराशि

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने कांग्रेस से इस संघर्ष के लिए 200 अरब डॉलर की भारी-भरकम धनराशि की मांग की है। इस संबंध में अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने टिप्पणी की थी, "बुरे लोगों को मारने के लिए पैसा लगता है।"

US Israel Iran War

यह मांग तब सामने आई है जब ट्रंप प्रशासन कांग्रेस की पूर्व मंजूरी के बिना ईरान पर लगातार हमले कर रहा है। हेगसेथ ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सटीक राशि की पुष्टि नहीं की थी, लेकिन उन्होंने जोर दिया कि पेंटागन ने यह फंडिंग सुनिश्चित करने के लिए आवेदन किया है। रक्षा सचिव पीट हेगसेथ का कहना है कि अमेरिका "युद्ध जीत रहा है" और उसकी सैन्य कार्रवाई "सटीक और निर्णायक" रही है।

ट्रंप बोले- मैं कहीं भी सेना नहीं भेज रहा

इसके बावजूद, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया कि फिलहाल अमेरिकी सैनिक क्षेत्र में तैनात नहीं किए जाएंगे। ट्रंप ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि वह इस क्षेत्र में अमेरिकी सैनिकों को तैनात नहीं करेंगे। ईरान के साथ युद्ध के बढ़ते तनाव के बीच पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, "अगर मैं ऐसा करता, तो मैं निश्चित रूप से आपको नहीं बताता। लेकिन मैं सैनिक नहीं भेज रहा हूं।" उन्होंने यह बयान ओवल ऑफिस में जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची से मुलाकात के दौरान दिया, जिससे अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप की अटकलों पर विराम लगा।

इज़रायल ने ईरान के जहाजों पर किया हमला

इज़रायल ने कैस्पियन सागर में ईरानी नौसैनिक जहाजों पर हमला किया, जो इतिहास में उनका पहला हमला माना जा रहा है। इसके साथ ही इज़रायल ने ईरान के 'साउथ पार्स' गैस क्षेत्र को भी निशाना बनाया, जिससे खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा स्थलों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न हुआ।

ईरान ने किए जवाबी हमले

ईरान ने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और कुवैत में ऊर्जा स्थलों पर जवाबी हमले किए। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी कि यदि ईरानी बुनियादी ढांचे पर फिर हमला हुआ, तो तेहरान "शून्य संयम" बरतेगा।

अन्‍य देशों का क्‍या है रूख?

इस बीच, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और नीदरलैंड सहित छह पश्चिमी देशों ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के प्रयासों में योगदान देने की अपनी तैयारी व्यक्त की है। गुरुवार को जारी एक संयुक्त बयान में, इन सहयोगियों ने "तैयारी योजना में शामिल देशों की प्रतिबद्धता का स्वागत" किया। यह कदम ऐसे समय में आया है जब ईरान लगातार इस महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य की नाकेबंदी कर रहा है।

पश्चिमी देशों ने हमले बंद करने का किया आह्वान

अपने संयुक्त बयान में, पश्चिमी देशों ने ईरान से खाड़ी क्षेत्र में ड्रोन, मिसाइलों और खदानों के माध्यम से अपने हमलों को तुरंत बंद करने का भी आह्वान किया। बयान में स्पष्ट रूप से कहा गया, "नेविगेशन की स्वतंत्रता अंतरराष्ट्रीय कानून का एक मौलिक सिद्धांत है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि के तहत भी यह शामिल है।" इन देशों ने ईरान द्वारा की गई नाकेबंदी की कड़ी निंदा की, इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा के लिए खतरा बताया।

साउथ पार्स गैस क्षेत्र पर हमला होते ही युद्ध हुआ तेज

गौरतलब है कि युद्ध तब और तीव्र हो गया जब इज़रायल ने ईरान के 'साउथ पार्स' गैस क्षेत्र पर हमला किया, जो दुनिया के सबसे बड़े गैस क्षेत्र का ईरानी हिस्सा है। इस हमले के जवाब में, तेहरान ने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कतर और कुवैत में ऊर्जा स्थलों को निशाना बनाते हुए जवाबी हमले किए। इन ईरानी हमलों ने खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे क्षेत्रीय तनाव में भारी वृद्धि हुई है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+