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छत्‍तीसगढ़: सत्‍ता की चाबी अजीत जोगी के पास, पढ़ें विधानसभा चुनाव 2018 का पूरा समीकरण

By Yogender Kumar
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    नई दिल्‍ली। 2019 लोकसभा चुनाव से पहले तीन राज्‍यों में बीजेपी की अग्निपरीक्षा है। संयोग तीनों ही राज्‍य ऐसे हैं, जहां बीजेपी को सत्‍ता विरोधी लहर का सामना करना है। ये तीन राज्‍य हैं- राजस्‍थान, मध्‍य प्रदेश और छत्‍तीसगढ़। राजस्‍थान और मध्‍य प्रदेश में कांग्रेस संगठित लग रही है। इस बात में कोई शक नहीं कि राजस्‍थान-मध्‍य प्रदेश के नतीजे चाहे कुछ भी हों, लेकिन कांग्रेस-बीजेपी के बीच कड़ी टक्‍कर तय है। अब बचा- छत्‍तीसगढ़, यहां बड़ी ही जटिल सी स्थिति बनी हुई है। राज्‍य में लगातार तीन बार रमन सिंह सरकार बना चुके हैं, तो क्‍या वह चौथी बार भी सफल होंगे? यह सवाल हर किसी की जुबान पर है। इसी बीच छत्‍तीसगढ़ के राजनीति गलियारों में एक और चर्चा गरम हो गई है। अटकलें लगाई जा रही हैं कि कांग्रेस से अलग जाकर जनता कांग्रेस छत्‍तीसगढ़ बनाने वाले अजीत जोगी कांग्रेस का खेल बिगाड़ सकते हैं।

    लगातार घट रहा है बीजेपी-कांग्रेस के बीच हार का अंतर

    लगातार घट रहा है बीजेपी-कांग्रेस के बीच हार का अंतर

    संयोग देखिए कि छत्‍तीसगढ़ वह राज्‍य है, जहां कांग्रेस की संभावनाएं काफी ज्‍यादा हैं, लेकिन भितरघात के चलते इसी राज्‍य में सबसे ज्‍यादा कांग्रेस लगातार इंच भर से हार का सामना कर रही है। इस कहानी की शुरुआत हुई थी 2003 में, जब भाजपा-कांग्रेस के बीच छत्‍तीसगढ़ में कांटे का मुकाबला हुआ था। 2003 विधानसभा चुनाव में दोनों दलों के बीच केवल 2.5 प्रतिशत वोटों का अंतर रहा। इसके बाद 2008 में दोनों दल आमने-सामने आए, इस बार अंतर घटकर महज 1.7 फीसदी रह गया और 2013 में तो यह बिल्‍कुल मामूली हो गया। सिर्फ 0.75 प्रतिशत के अंतर से कांग्रेस चुनाव हार गई।

    बीजेपी मंत्री ने की जोगी के जल्‍दी स्‍वस्‍थ होने की कामना

    बीजेपी मंत्री ने की जोगी के जल्‍दी स्‍वस्‍थ होने की कामना

    जानकारों की राय में अजीत जोगी फैक्‍टर के चलते 2018 में बीजेपी को लाभ होगा, जबकि कांग्रेस को नुकसान। बात सिर्फ जानकारों तक सीमित होती तो भी ठीक था, लेकिन यहां बीजेपी के छत्‍तीसगढ़ के मंत्री तक अजीत जोगी के जल्‍द स्‍वस्‍थ होने की दुआ मना रहे हैं, ताकि वे तूफानी प्रचार करें और कांग्रेस का वोट कटे। रायपुर में 29 जून को आयोजित इंडिया टुडे के स्टेट ऑफ द स्टेट कॉन्क्लेव में छत्तीसगढ़ के कृषि और जल संसाधन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि हम जोगी के जल्दी अच्छे होने की दुआ करते हैं। उन्हें सक्रिय रहना चाहिए, क्योंकि इससे हमें चौथी बार चुनाव जीतने में मदद मिलेगी। जोगी दिल्ली के अस्पताल में इलाज करवा रहे हैं।

    कांग्रेस को लग रहा अजीत जोगी डर

    कांग्रेस को लग रहा अजीत जोगी डर

    दूसरी ओर कांग्रेस भी यह मान रही है कि अजीत जोगी और रमन सिंह के बीच कुछ चुनावी साठगांठ हैं। कांग्रेस नेता आरोप लगा रहे हैं कि मई में बिलासपुर के पेंड्रा में जोगी की विशाल रैली राज्य सरकार की मदद से ही आयोजित हुई थी। गौर करने वाली बात यह भी है कि जिस दिन जोगी की पार्टी रैली थी, उसी दिन राहुल गांधी ने भी जनसभा की थी। कांग्रेस अध्‍यक्ष की जनसभा में भीड़ कम थी, जबकि जोगी की रैली में जनसैलाब उमड़ा था।

    त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में बीजेपी को समर्थन दे सकते हैं जोगी

    त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में बीजेपी को समर्थन दे सकते हैं जोगी

    यह बात तो अब करीब-करीब सामने आ ही चुकी है कि छत्‍तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018 में अजीत जोगी कांग्रेस का खेल बिगाड़ने वाले हैं, लेकिन महत्‍वपूर्ण बात एक और है कि अगर त्रिशंकु विधानसभा के आसार बने तो भी कांग्रेस के हाथ कुछ नहीं आना है। ऐसी स्थिति में भी जोगी रमन सिंह को बिना देरी किए समर्थन दे देंगे। अजीत जोगी की पार्टी की मध्‍य छत्‍तीसगढ़ में अच्‍छी पकड़ है और यहां की 10 आरक्षित सीटों पर जोगी पार्टी को अच्‍छा जनसमर्थन मिलने की पूरी उम्‍मीद है। इन सीटों पर सतनामी समुदाय का वर्चस्‍व है। इस समुदाय पर अजीत जोगी की अच्‍छी पकड़ मानी जाती है। मौजूदा समीकरण देखें तो इन 10 आरक्षित सीटों में से 9 बीजेपी के पास हैं।

    अजीत जोगी की कांग्रेस में वापसी की भी अटकलें

    अजीत जोगी की कांग्रेस में वापसी की भी अटकलें

    छत्‍तीसगढ़ में अटकलों का बाजार एक तरफा नहीं है। दूसरी चर्चा यह भी चल रही है कि अजीत जोगी कांग्रेस में वापस आ सकते हैं। हालांकि, यह काम अब इतना आसान नहीं रह गया है, क्‍योंकि रिश्‍तों में कड़वाहट अब काफी ज्‍यादा बढ़ चुकी है। वैसे अजीत जोगी की पत्‍नी रेणु जोगी अब भी कांग्रेस में है, लेकिन छत्‍तीसगढ़ कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता भूपेश बघेल जोगी की वापसी के खिलाफ हैं। ऐसे में जोगी और कांग्रेस की कहानी काफी उलझ चुकी है।

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    English summary
    Ajit Jogi lend Raman Singh led BJP the edge in Chhattisgarh election 2018.

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