Air India Plane Tragedy: हवाई-रोड यात्रा कर अपनों तक पहुंची 210 लाशें! 21 की क्यों नहीं हो पा रही शिनाख्त?
Air India Passenger DNA: अहमदाबाद में 12 जून 2025 को हुए एयर इंडिया विमान हादसे को 8 दिन बीत चुके हैं, लेकिन दर्द की आंच अब भी ठंडी नहीं हुई। फ्लाइट AI-171, जो लंदन के लिए उड़ान भर रही थी, महज 33 सेकंड में बीजे मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में जा गिरी। 242 यात्रियों में से सिर्फ एक जिंदा बचा, बाकी 241 की जिंदगियां आग की लपटों में खाक हो गईं। जमीन पर मौजूद 39 लोग भी इस त्रासदी का शिकार बने। कुल 280 मृतकों की इस दुखद गाथा ने पूरे देश को झकझोर दिया।
20 जून को अहमदाबाद सिविल अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी ने बताया कि 231 डीएनए नमूनों में से 210 शवों की पहचान कर उनके परिजनों को सौंप दिया गया है। इनमें से 16 शव हवाई मार्ग से (Dead Bodies Air Travel)और 194 सड़क मार्ग से उनके गंतव्य तक पहुंचाए गए। इन शवों में 160 भारतीय, 34 ब्रिटिश, 7 पुर्तगाली, 1 कनाडाई और 9 जमीन पर मौजूद लोग शामिल हैं। लेकिन यह आंकड़े सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि टूटे हुए सपनों और बिखरे परिवारों की कहानियां हैं।

किसी की दुल्हन नहीं रही, तो किसी का पूरा परिवार खत्म
कोई अपनी नई-नवेली दुल्हन को लंदन मिलने जा रहा था, कोई अपने बच्चों के साथ नई जिंदगी शुरू करने की उम्मीद में था। एक डॉक्टर दंपति अपने तीन बच्चों के साथ उड़ान में था, तो कोई अपनी मां के पास लौट रहा था। लेकिन, यह विमान सबको मौत की आगोश में ले गया। अब कहीं चिताएं जलेंगी, कहीं सुपुर्द-ए-खाक की रस्में होंगी। पीछे रह जाएंगी अधूरी बातें, अनकही ख्वाहिशें और आंसुओं की स्याही से लिखी यादें। यह दर्द हर उस दिल को चुभेगा, जो इस त्रासदी की खबर सुनेगा।
21 शव अभी भी तलाश रहे अपनों को
डॉ. जोशी ने बताया कि 21 शव अभी भी अपने परिजनों का इंतजार कर रहे हैं। 11 परिवार अपने किसी अन्य सदस्य के डीएनए मैच की प्रतीक्षा में हैं, जबकि 10 परिवारों से संपर्क किया जा चुका है, ताकि वे अपने प्रियजनों के शव ले सकें। तीन शव पोस्टमॉर्टम रूम में हवाई अड्डे की मंजूरी का इंतज़ार कर रहे हैं। यह इंतजार हर परिवार के लिए एक अनकहा दर्द है।
हादसे की आग और डीएनए की चुनौती
विमान में 125,000 लीटर ईंधन था, जिसके कारण हादसे में आग की लपटें 1,500 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गईं। इस भयावह आग ने अधिकांश शवों को क्षत-विक्षत और जला हुआ बना दिया, जिससे पहचान की प्रक्रिया बेहद जटिल हो गई। गांधीनगर, अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत और राजकोट के फॉरेंसिक साइंस लैब में 54 विशेषज्ञ दिन-रात डीएनए टेस्टिंग में जुटे हैं।
एकमात्र बचे यात्री की कहानी
40 वर्षीय ब्रिटिश-भारतीय मूल के विश्वासकुमार रमेश इस हादसे के एकमात्र जीवित बचे यात्री हैं। सीट 11A पर बैठे विश्वास ने कहा कि मुझे विश्वास नहीं होता कि मैं जिंदा हूं। सब कुछ इतनी जल्दी हुआ। मेरे आसपास सिर्फ शव थे, मैं डर गया था। उनकी यह कहानी एक चमत्कार की तरह है, लेकिन यह चमत्कार बाकी परिवारों के दुख को कम नहीं करता।
पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपानी भी शिकार
हादसे में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपानी की भी मौत हो गई। उनके शव की पहचान डीएनए और डेंटल रिकॉर्ड्स के जरिए हुई, जिसे 16 जून को उनके परिवार को सौंप दिया गया। राजकोट में उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया।
देश-विदेश में शोक की लहर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हादसे को 'हृदय विदारक' बताया और 13 जून को अहमदाबाद में हादसे की जगह का दौरा किया। ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर, किंग चार्ल्स और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी शोक जताया। लंदन में भारतीय उच्चायोग के बाहर 100 से ज्यादा लोग कैंडल जलाकर शोक व्यक्त करने पहुंचे।
कहां तक पहुंची हादसे की जांच?
हादसे की जांच के लिए एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो ने दोनों ब्लैक बॉक्स (फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर) बरामद कर लिए हैं। नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने बताया कि एयर इंडिया के सभी बोइंग 787 विमानों की जांच शुरू कर दी गई है। गुजरात सरकार ने पीड़ित परिवारों के लिए 230 राहत टीमें और दुख सहायता काउंसलर नियुक्त किए हैं।
यह दर्द भुलाया नहीं जा सकता
यह हादसा न केवल भारत की सबसे भीषण विमान दुर्घटनाओं में से एक है, बल्कि यह हर उस परिवार के लिए एक न भूलने वाला जख्म है, जिसने अपने प्रियजनों को खोया। 210 परिवार अपने प्रियजनों को अंतिम विदाई दे रहे हैं, लेकिन 21 शव अभी भी अपने अपनों की तलाश में हैं। यह त्रासदी हमें याद दिलाती है कि जिंदगी कितनी अनमोल है और हर पल अपनों के साथ बिताना कितना जरूरी है।
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