जानिए, कैसे डीएमके (DMK) की राह पर चली 'अम्मा' की पार्टी (AIADMK)?
नई दिल्ली- तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी (AIADMK) अब तक वंशवादी राजनीति करने के लिए डीएमके (DMK) की आलोचना करती थी। लेकिन, इसबार के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने अपने नेताओं के बच्चों में भी खूब टिकट बांटे हैं। यहां तक की इस बार उप मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम के बेटे तक को भी 18 अप्रैल के चुनाव के लिए टिकट दिया गया है।

नेताओं के परिवार की बल्ले-बल्ले
इसबार डीएमके (DMK) के 20 उम्मीदवारों में 6 पार्टी के बड़े नेताओं के बच्चे हैं, जबकि एआईएडीएमके (AIADMK)के 20 उम्मीदवारों में से 4 बड़े नेताओं के बच्चे हैं। दिलचस्प बात ये है कि दोनों दल ये दलील दे रहे हैं कि टिकट देते समय प्रत्याशियों का काम और पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा को ध्यान में रखा गया है। उनकी सफाई है कि सिर्फ इसलिए कि वो पार्टी नेता के बच्चे हैं उन्हें टिकट नहीं देना कितना जायज है? इस बात की चर्चा तब शुरू हुई जब एआईएडीएमके के संयजोक और उप मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम के बेटे रविंद्रनाथ कुमार को थेनी संसदीय सीट से टिकट दिया गया और इसके लिए पार्टी में उनके योगदान का कारण बताया गया। गौरतलब है कि पार्टी की सर्वेसर्वा रहीं जयललिता हमेशा वंशवाद के बहाने अपनी सियासी विरोधी डीएमके को निशाना बनाती थीं। लेकिन, इसबार शायद उनकी पार्टी शायद उनके विचारों को भुला देना चाह रही है।

'अम्मा' की पार्टी को भी लगी हवा!
उप मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम के बेटे रविंद्रनाथ कुमार और वी वी आर राजसत्यथन पहलीबार चुनाव लड़ने जा रहे हैं। इनमें राजसत्यथन के पिता पार्टी के मदुरई उत्तर से मौजूदा विधायक हैं और पहले मेयर भी रह चुके हैं। एआईएडीएमके वरिष्ठ नेता पी एच पांडियन और डी जयकुमार के बेटों को भी टिकट दिया है। इसमें डी जयकुमार के बेटे डॉ जे जयवर्धन मौजूदा सांसद भी हैं और पूर्व राज्यसभा सांसद पी एच मनोज पांडियन वरिष्ठ नेता पी एच पांडियन के पुत्र हैं। हालांकि,पार्टी के प्रवक्ता आर एम बाबू मुरुगवेल ने पार्टी में किसी भी तरह से वंशवादी राजनीति से इनकार किया है और सफाई दी है कि सिर्फ काम और पार्टी के प्रति निष्ठा को ही उम्मीदवारी का आधार बनाया गया है। रविंद्रनाथ कुमार ने भी उन्हें अपने पिता के नाम का फायदा दिए जाने से साफ इनकार किया है और कहा है कि वे 21 साल से पार्टी की सेवा में लगे हुए हैं।

डीएमके में वंशवाद की परंपरा
राजनीतिक जानकारों की राय में डीएमके तो काफी समय से वंशवाद से ग्रस्त है। पार्टी के सबसे बड़े नेता एम करुणानिधि ने अपने बेटे एम के स्टालिन,एम के अलिगिरी और बेटी कणिमोझी को अपने सामने ही राजनीति में उतार दिया था। स्टालिन अभी उनके उत्तराधिकारी के तौर पर पार्टी को संभाल रहे हैं, जबकि 2014 में पार्टी से निकाले जाने से पहले तक अलिगिरी केंद्र में यूपीए सरकार के मंत्री थे और कणिमोझी 2007 से ही राज्यसभा की सदस्य हैं। 18 अप्रैल के चुनाव में डीएमके के जिन नेताओं के बच्चों को टिकट दिया गया है, उनमें कणिमोझी, दयानिधि मारन के बच्चे भी शामिल हैं। इसी तरह डॉ. कलानिधि वीरस्वामी, गौथम सिंगामनी, टी सुमथि और डीएम कथिर आनंद के बच्चे भी शामिल हैं। इसी तरह टी आर बी राजा और आई पी सेंथिलकुमार राज्य विधानसभा के सदस्य हैं। राजा वरिष्ठ पार्टी नेता टी आर बालू के बेटे हैं, जो श्रीपेरम्बदुर से लोकसभा उम्मीदवार हैं। जबकि, सेंथिलकुमार पूर्व मंत्री और मौजूदा विधायक आई पेरियास्वामी के पुत्र हैं। कणिमोझी ने पार्टी के बचाव में कहा है कि जिन लोगों को भी टिकट दिया गया है, वो कोई बाहरी नहीं हैं और पार्टी के लिए काफी समय से काम कर रहे हैं।
इसबार दोनों द्रविड़ पार्टियां खुद 20-20 सीटों पर लड़ रही हैं और बाकी 19 सीटें अपने सहयोगियों के लिए छोड़े हैं। तमिलनाडु की सभी 39 सीटों पर 18 अप्रैल को मतदान होना है।












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