बर्खास्त IAS पूजा खेडकर के बाद, अब 6 अफसरों की नौकरी भी मुश्किल में! विकलांग प्रमाणपत्र की हो रही है जांच
6 Civil Servants DoPT Scanner: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने ट्रेनी IAS पूजा खेडकर की उम्मीदवारी रद्द करने के बाद अब अन्य 6 प्रोबेशनरों और अधिकारियों के विकलांगता प्रमाण पत्रों की जांच शुरू की है। सूत्रों के मुताबिक, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) छह अन्य सिविल सेवकों के मेडिकल प्रमाण पत्रों की जांच कर रहा है।
6 अधिकारियों के विकलांग प्रमाणपत्र की जांच पूजा खेडकर की उम्मीदवारी रद्द करने के बाद शुरू की गई है। हाल ही में यूपीएससी ने पूजा खेडकर की उम्मीदवारी रद्द कर दी है। पूजा खेडकर पर खिलाफ परीक्षा नियमों और दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने के आरोप सही पाए गए हैं।

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कौन हो सकते हैं वो 6 अधिकारी, जिनके विकलांग प्रमाणपत्र की होगी जांच
रिपोर्ट के मुताबिक कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) जिन छह सिविल सेवकों के विकलांग प्रमाणपत्र की जांच कर रहा है, उनमें पांच IAS और एक IRS अधिकारी शामिल है।
सूत्रों के मुताबिक ये अधिकारी वही हो सकते हैं, जिनके विकलांग प्रमाणपत्र को लेकर पिछले कुछ दिनों में सोशल मीडिया पर काफी ज्यादा चर्चा हुई है। हालांकि अधिकारियों के नाम को उजागर नहीं किया गया है।
UPSC ने क्यों रद्द की पूजा खेडकर की उम्मीदवारी?
- पूजा खेडकर की उम्मीदवारी रद्द करते हुए केंद्र सरकार के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने बयान जारी कर कहा है कि, 'यूपीएससी ने उपलब्ध रिकॉर्ड की सावधानीपूर्वक जांच की है और पूजा खेडकर को सीएसई-2022 नियमों के प्रावधानों के उल्लंघन में काम करने का दोषी पाया है। सीएसई-2022 के लिए उनकी अनंतिम उम्मीदवारी रद्द कर दी गई है और उन्हें यूपीएससी की सभी भावी परीक्षाओं/चयनों से भी स्थायी रूप से वंचित कर दिया गया है।"
- दूसरी ओर दिल्ली की एक अदालत ने धोखाधड़ी और जालसाजी के एक मामले में आरोपी पूजा खेडकर की अग्रिम जमानत याचिका गुरुवार (1 अगस्त) को खारिज कर दी।
- इसके साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया है कि, यूपीएससी उन उम्मीदवारों का पता लगाए, जिन्होंने ओबीसी कोटे के तहत अनुमेय आयु सीमा से अधिक का लाभ उठाया है और हकदार नहीं होने के बावजूद बेंचमार्क विकलांग कोटे का भी फायदा उठाया है।
- यूपीएससी ने 18 जुलाई को पूजा खेडकर को "अपनी पहचान को गलत तरीके से पेश करके परीक्षा नियमों में निर्धारित सीमा से अधिक प्रयास करने" के लिए कारण बताओ नोटिस भेजा था।
- यूपीएससी के मुताबिक, पहले पूजा खेडकर ने 25 जुलाई से 4 अगस्त तक का समय मांगा था। आयोग ने उनके अनुरोध पर विचार किया और 30 जुलाई को दोपहर 3.30 बजे तक का समय दिया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि यह उनका अंतिम अवसर था। लेकिन फिर भी वह अपना जवाब देने नहीं आई थीं।
- पूजा खेडकर ने 2023 में अपनी उम्मीदवारी पर यूपीएससी के फैसले को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के समक्ष चुनौती दी थी। अगर वह 2024 के यूपीएससी के फैसले को फिर से कैट के समक्ष चुनौती देती है, तो आयोग यह तर्क दे सकता है कि उसे अपना मामला पेश करने के लिए समय दिया गया था लेकिन उसने पेश नहीं होने का फैसला किया।
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