Aero India 2025: 'सूर्य किरण' से गूंजेगा आसमान, कौन हैं विंग कमांडर अर्जुन पटेल, जो दिखाएंगे हैरतअंगेज करतब
Aero India 2025: बेंगलुरु का आसमान एक बार फिर भारतीय वायुसेना (IAF) के जांबाज पायलटों के हैरतअंगेज करतबों से गूंज उठा। पांच दिवसीय एयरो इंडिया 2025 का आगाज सोमवार से हुआ। बेंगलुरू के येलाहंका वायुसेना स्टेशन पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एयरो इंडिया 2025 का उद्घाटन किया। एयरो इंडिया में वायुसेना की प्रतिष्ठित सूर्य किरण एरोबैटिक टीम (SKAT) अपनी कला का प्रदर्शन करेगी।

एयरो इंडिया 2025 में जयमहल निवासी विंग कमांडर अर्जुन के पटेल भी एयरो इंडिया 2025 में अपनी हवाई कलाबाजी का प्रदर्शन करेंगे। वह सूर्य किरण एरोबैटिक टीम के नौ पायलटों में शामिल होंगे। 39 वर्षीय विंग कमांडर पटेल 2004 में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) में शामिल हुए थे और उनके पास 2100 घंटे से अधिक का उड़ान अनुभव है। प्रदर्शन के दौरान वह सूर्य किरण-5 (बाएं बाहरी) की स्थिति संभालेंगे।
पहले दिन क्या-क्या हुआ?
प्रोजेक्ट कुशा, लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली, जो लगभग 400 किलोमीटर तक हवाई लक्ष्य पर हमला कर सकती है, बेंगलुरु में एयरो इंडिया एयर शो में प्रदर्शित की गई। इस मिसाइल को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा निजी क्षेत्र की फर्म सोलर इंडस्ट्रीज और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड के साथ साझेदारी में विकसित किया जाएगा।
भारतीय वायुसेना के मल्टीरोल लड़ाकू विमान सुखोई Su-30 MKI ने आसमान में करतब दिखाया।
भारतीय वायुसेना के एलसीए तेजस मार्क 1ए ने आसमान में करतब दिखाया।
सूर्य किरण एरोबैटिक टीम का बीएई हॉक एमके 132 राष्ट्रीय ध्वज के रंग बिखेरता हुआ रवाना हुआ, जिसे दर्शक देखते रहे।
मिग-21 और मिग-27 जैसे विमानों का अनुभव
विंग कमांडर पटेल ने सोवियत निर्मित मिग-21 और मिग-27 जैसे लड़ाकू विमानों के साथ-साथ स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) तेजस भी उड़ाया है। वह एक योग्य उड़ान प्रशिक्षक, उपकरण रेटिंग प्रशिक्षक और परीक्षक भी हैं। उन्हें पिलाटस पीसी-7 और तेजस एमके 2 पर एकल-विमान निम्न-स्तरीय एरोबेटिक्स के लिए प्रमाणित किया गया है।
माता-पिता से मिली प्रेरणा और छू लिया आसमां
एक रक्षा सूत्र के अनुसार, लड़ाकू विमानों के प्रति उनका रुझान उनके माता-पिता से प्रेरित था, जिन्होंने 1998 में उन्हें पहली बार एयरो इंडिया शो दिखाया था। इस अनुभव ने उन्हें लड़ाकू पायलट बनने के अपने सपने को पूरा करने के लिए प्रेरित किया।
कैसे हुआ चयन?
एनडीए खड़कवासला में प्रशिक्षण के बाद, उन्होंने हैदराबाद के पास डुंडीगल में वायु सेना अकादमी में उड़ान प्रशिक्षण पूरा किया और भारतीय वायु सेना (आईएएफ) की लड़ाकू शाखा में शामिल हुए। कठोर चयन प्रक्रिया के बाद, उन्हें प्रतिष्ठित सूर्य किरण एरोबैटिक टीम (एसकेएटी) में चुना गया, जहां केवल सर्वश्रेष्ठ फॉर्मेशन एरोबैटिक डिस्प्ले पायलट ही अर्हता प्राप्त करते हैं।
1996 में हुई थी एसकेएटी की स्थापना
बता दें कि 1996 में स्थापना के बाद से, SKAT ने भारत में 700 से अधिक प्रदर्शन किए हैं और चीन, श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड, सिंगापुर और यूएई में अंतर्राष्ट्रीय एयर शो में देश का प्रतिनिधित्व किया है। "सदैव सर्वोत्तम" (हमेशा सर्वश्रेष्ठ) के अपने आदर्श वाक्य के तहत काम करने वाली यह टीम उत्कृष्टता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने क्या कहा?
कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, "एयरो इंडिया हमें आपसी सम्मान, साझा हित और पारस्परिक लाभ के आधार पर हमारे रिश्तों को और बेहतर बनाने का अवसर प्रदान करता है। हमें मिलकर आज की अनिश्चितता और सामने आ रही चुनौतियों का सामना करने की कोशिश करनी चाहिए। सुरक्षा की कमजोर स्थिति में शांति कभी नहीं मिल सकती। हमें सभी को एक साथ होकर ताकतवर बनना होगा, तभी हम शांति को सुनिश्चित कर सकेंगे। मजबूत बनकर ही हम एक बेहतर वैश्विक व्यवस्था के लिए काम कर पाएंगे। इस वैश्विक अस्थिरता के माहौल में, भारत एक बड़ा देश है, जहां हम शांति और समृद्धि देख सकते हैं।"












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