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वियतनाम में अडानी की बड़ी दस्तक: गौतम अडानी ने साझा की रणनीतिक साझेदारी की झलक, 10 अरब डॉलर तक निवेश की तैयारी

अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी ने वियतनाम के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के अहम संकेत दिए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर अडानी ने वियतनाम के कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव तो लैम से हुई मुलाकात को सम्मानजनक बताते हुए वियतनाम में लैम के द्वारा किए गए साहसिक सुधारों और दूरदर्शी एजेंडे की प्रशंसा की।

अडानी ने लिखा कि वियतनाम को ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, बंदरगाहों और एविएशन के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की लैम की रणनीति अत्यंत प्रेरणादायक और भविष्यदर्शी है।

Gautam Adani

बढ़ते संबंध और बढ़ता व्यापार

गौतम अडानी का यह बयान भारत-वियतनाम के बीच बढ़ती संस्थागत भागीदारी के बीच आया है। वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 15.76 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 6.4% की वृद्धि है। भारत ने वियतनाम को 5.43 अरब डॉलर का निर्यात किया, जबकि आयात 10.33 अरब डॉलर रहा।

यह आर्थिक जुड़ाव उच्च स्तरीय राजनीतिक संवादों के साथ भी आगे बढ़ा है। 2025 की BRICS समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वियतनामी पीएम फाम मिन चिन्ह के बीच वार्ता हुई थी। वियतनाम इस वर्ष BRICS का सदस्य बना है।

10 अरब डॉलर तक निवेश की योजना

2024 के मध्य में खबर आई थी कि अडानी समूह वियतनाम के लॉन्ग थान और चू लाई एयरपोर्ट्स में निवेश की योजना बना रहा है। इसके साथ ही वहां बंदरगाहों और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर में भी बड़े निवेश की तैयारी है। समूह को पहले ही दा नांग में एक बंदरगाह परियोजना के लिए मंजूरी मिल चुकी है।

इन सभी परियोजनाओं का संयुक्त निवेश 10 अरब डॉलर से अधिक हो सकता है, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र भी शामिल है। अडानी पोर्ट्स एंड एसईजेड (APSEZ) की वैश्विक मौजूदगी इन पहलों के साथ और विस्तृत होगी।

भारत-वियतनाम साझेदारी का भविष्य

गौतम अडानी की इस सार्वजनिक प्रतिबद्धता के पीछे एक व्यापक रणनीति है-वियतनाम की ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और एविएशन में उन्नति भारत की महासागर नीति और भारत-प्रशांत साझेदारी को मजबूती देती है।

आने वाले सालों में संभावित दिशा:

  • बुनियादी ढांचे का विस्तार: अडानी समूह के पोर्ट और एयरपोर्ट निवेश वियतनाम की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ाएंगे।
  • ऊर्जा सहयोग: ग्रीन एनर्जी में साझेदारी दोनों देशों की ऊर्जा रूपांतरण नीति को मजबूती देगी।
  • क्षेत्रीय एकीकरण: ASEAN और इंडो-पैसिफिक में भारत-वियतनाम की रणनीतिक साझेदारी को नए आयाम मिलेंगे।
  • गौतम अडानी का यह बयान केवल एक बिजनेस माइलस्टोन नहीं, बल्कि भारत और वियतनाम के बीच उभरती रणनीतिक साझेदारी की ठोस बुनियाद है, जिसका अगला पड़ाव आर्थिक, भू-राजनीतिक और ऊर्जा आधारित सहयोग होगा।
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