ये नानी वॉट्सएप पर सुनाती हैं कहानी, विदेशों में भी है फैन फॉलोइंग
बेंगलुरु। आज की डिजिटल दुनिया में दादी-नानी की कहानी शायद ही किसी बच्चे को सुनने को मिलती हो। वक्त के साथ दादी और नानी की कहानियां गायब होती जा रही हैं। ऐसे में डिजिटल प्लेटफॉर्म को अपना नया हथियार बनाकर बेंगलुरु की सरला मिनी वॉट्सएप और अन्य सोशल नेटवर्किंग साइट्स के जरिए बच्चों को कहानियां सुना रही हैं। वे बच्चे जो अपनी दादी-नानी से दूर रहते है उनके लिए वे किसी वरदान से कम नहीं है। पेशे से रिटायर्ड टीचर सरला को अब बच्चे 'कहानी वाली नानी' कहकर बुलाते हैं। सरला हफ्ते में शुक्रवार और शनिवार को कहानियों को अपनी ही जादुई आवाज में रिकॉर्ड कर बच्चों को भेजती हैं।


10 हजार से ज्यादा सब्सक्राइबर
कहानियों की ये क्लिप 8 से 10 मिनट की होती है। यह हिंदी और अंग्रेजी में होती हैं। जिसमें वे बड़े ही मजेदार लहजे में कहानियों के गढ़ती हैं। सरला देवी ने इसकी शुरुआत करीब 4 महीने पहले की थी। अब उनके देश-विदेश में उनके 10 हजार से ज्यादा सब्सक्राइबर हैं। शुरूआत में सरला ने अपने भाई के बच्चों को कहानियां रिकॉर्ड कर वॉट्सएप पर भेजा करती थीं। घर के लोगों और दोस्तों को उनकी कहानी कहने का तरीका बहुत ही पसंद आया। घर के लोगों और दोस्तों ने इस तरीके को काफी तारीफ की। उन्होंने सरला को वॉट्सएप पर ग्रुप बनाने की सलाह दी। कहा कि वह हर हफ्ते एक कहानी रिकॉर्ड करें। इसके बाद ये सिलसिला चल निकला। सरला ने वॉट्सएप पर 40 से ज्यादा ब्रॉडकास्ट ग्रुप बना डाले। उनके इन ग्रुप में 10 हजार से ज्यादा नंबर हो गए। इसके चलते कुछ दिन पहले सरला का वॉट्सएप क्रैश कर गया।

कहानी वाली नानी के चर्चे अब विदेशों में
फिर उन्होंने टेलीग्राम पर अपना अकाउंट बनाया। जिस पर अब वे बच्चों को 'बेड टाइम' कहानी भेजती हैं। सरला इसके लिए कोई चार्ज नहीं लेती हैं। बच्चे भी उन्हें मैसेज भेजकर बताते हैं कि कहानी कैसी लगी। यही नहीं, कहानी वाली नानी के चर्चे अब दुबई, ब्रिटेन, अमेरिका, स्विट्जरलैंड, ऑस्ट्रेलिया आदि देशों तक है। सरला जी बताती है कि जब वे छोटी थी, तब ऐसा एक दिन भी नहीं गुजरता था, जब मैंने अपनी नानी या दादी से कहानी ना सुनी हो। बिस्तर पर जाने के बाद उन्हें अपनी पसंदीदा कहानी का बेसब्री से होता था, वे बताती है कि वे अपनी नानी का इंतजार करती थीं कि कब आकर वह मुझे कहानी सुनाएंगी। मैं सुनते-सुनते सो जाया करती। वे बताती हैं कि तब मेरे मोबाइल फोन और कंप्यूटर नहीं होते थे आज के बच्चों के पास ये सब तो हैं लेकिन नानी और दादी की कहानियां नहीं हैं। क्योंकि परिवार छोटे होते जा रहे हैं। बच्चों की अपने नाना-नानी या दादा-दादी से बिछडते जा रहे हैं।

ऐसे तैयार होती हैं कहानियां
सरला बताती हैं कि मेरी कोशिश है कि मैं हर बच्चे तक दादी-नानी की कहानियों को पहुंचा सकूं, क्योंकि ये उनका अधिकार है। मैं बच्चों के पैरेंट्स को 'बेड टाइम' कहानियां भेजती हूं। ताकि वे बच्चों को सुना सकें। सरला अपने यूजर्स के लिए इंटरनेट पर काफी कहानियां सर्च करती है। जिससे वे बच्चों तक अच्छी से अच्छी कहानियां पहुंचा सकें। वे कहानियों का अनुवाद करती हैं। फिर स्क्रिप्ट तैयार करती हूं और तब जाकर रिकॉर्ड होती एक कहानी। सरला मिनी बताती हैं कि एक पास एक कश्मीर की महिला का फोन आया। उसने उन्हें बताया कि उसका परिवार सीमा से सटे एक छोटे कस्बे में रहता है। वहां पर ना तो अच्छे स्कूल हैं और ना अच्छी इंटरनेट कनेक्टिविटी। उसने बच्चों के लिए इंटरनेट कनेक्शन लिया है। बच्चे उनकी कहानी का बेसब्री से इंतजार करते हैं।












Click it and Unblock the Notifications