Israel Vs Türkiye: इजराइल को तुर्किए में क्यों दिखने लगा 'दूसरा ईरान'? अगला टारगेट एर्दोगन हैं!

Israel Vs Turkiye: मिडल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच तुर्की अपनी सैन्य ताकत को खतरनाक रफ्तार से बढ़ा रहा है। तुर्की अपना पहला स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर 'मुगेम' (MUGEM) बना रहा है, जो 2026 के अंत तक तैयार हो जाएगा।

यह विशाल युद्धपोत 60,000 टन का होगा और इस पर 50-60 लड़ाकू विमान और ड्रोन तैनात किए जा सकेंगे। दिलचस्प बात यह है कि इजराइल के नेता तुर्की को 'अगला ईरान' कह रहे हैं, जिससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या भविष्य में इजरायल और तुर्की के बीच सीधा टकराव हो सकता है।

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इजराइल की नज़र में 'अगला ईरान'

इजराइल और तुर्की के रिश्ते पिछले कुछ समय में बेहद खराब हुए हैं। इजराइल के बड़े नेता, जैसे नफ्ताली बेनेट, अब खुलेआम तुर्की को 'अगला ईरान' करार दे रहे हैं। इजराइल का मानना है कि तुर्की की बढ़ती सैन्य ताकत और राष्ट्रपति एर्दोगन के कड़े तेवर उसके लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। जब से अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर दबाव बढ़ाया है, तुर्की ने अपनी सुरक्षा को लेकर चौकसी दोगुनी कर दी है।

'मुगेम': तुर्की का समुद्र में बढ़ता कद

तुर्की का नया एयरक्राफ्ट कैरियर 'मुगेम' आकार में फ्रांस के मशहूर युद्धपोत 'चार्ल्स डी गौले' से भी बड़ा होगा। इसकी लंबाई 285 मीटर है और इसे खास तौर पर स्वदेशी लड़ाकू विमानों और ड्रोन्स के लिए डिजाइन किया गया है। तुर्की इसे अपनी आन-बान और शान का प्रतीक मान रहा है। यह जहाज न केवल तुर्की की समुद्री सीमा की रक्षा करेगा, बल्कि खुले समुद्र में दुश्मन के छक्के छुड़ाने की ताकत भी रखेगा।

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अमेरिका से मिला धोखा और नई तैयारी

पहले तुर्की की योजना अमेरिका के F-35 लड़ाकू विमानों को अपने जहाजों पर तैनात करने की थी। लेकिन अमेरिका ने तुर्की को इस प्रोग्राम से बाहर कर दिया। इसके बाद तुर्की ने हार नहीं मानी और अपने खुद के फाइटर जेट 'कान' (KAAN) और 'किजीलेल्मा' जैसे घातक ड्रोन्स पर काम शुरू किया। अब तुर्की किसी दूसरे देश पर निर्भर रहने के बजाय अपनी खुद की टेक्नोलॉजी के दम पर महाशक्ति बनना चाहता है।

भूमध्य सागर में अकेले पड़ने का डर

तुर्की को लग रहा है कि इजराइल, ग्रीस और साइप्रस मिलकर एक गुट बना रहे हैं, जिससे पूर्वी भूमध्य सागर में तुर्की अलग-थलग पड़ सकता है। जानकारों का कहना है कि यह गठबंधन तुर्की के लिए एक बड़ी चुनौती है। इसी घेराबंदी को तोड़ने के लिए तुर्की 'मुगेम' जैसे प्रोजेक्ट्स को समय से पहले पूरा कर रहा है ताकि वह क्षेत्र में अपनी धाक जमा सके और किसी भी हमले का जवाब दे सके।

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नाटो और तुर्की की नई रणनीति

तुर्की भले ही नाटो का सदस्य है, लेकिन वह अपनी अलग पहचान बनाना चाहता है। पूर्व राजदूतों का मानना है कि इस विमानवाहक पोत से तुर्की की सौदेबाजी करने की ताकत बढ़ जाएगी। अमेरिका अब चाहता है कि उसके सहयोगी देश अपनी सुरक्षा खुद संभालें, और तुर्की ठीक वही कर रहा है। हालांकि, तुर्की की यह बढ़ती ताकत पड़ोसी देशों और इजराइल के बीच तनाव को और बढ़ा सकती है, जिससे नया खतरा पैदा होने का डर है।

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