Pawan Khera को बेल देने वाले दो Justice कौन हैं? 40 से ज्यादा फैसले दे चुके, किन दलीलों पर कांग्रेस को राहत?
Pawan Khera Anticipatory Bail Case: 1 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा को बड़ी राहत देते हुए अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) दे दी। जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एएस चंदूरकर की बेंच ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के इनकार वाले फैसले को पलट दिया। बेंच ने साफ कहा कि यह मामला राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से उपजा लगता है। आरोप-प्रत्यारोप राजनीति से प्रेरित हैं। ऐसी स्थिति में निजी स्वतंत्रता की रक्षा जरूरी है। कस्टडी में लेकर पूछताछ की जरूरत नहीं दिखती।
यह फैसला तब आया जब पिछले तीन हफ्तों से पवन खेड़ा असम पुलिस से बचते फिर रहे थे। असम के मुख्यमंत्री हिमंत पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा (Riniki Bhuyan Sarma) की शिकायत पर दर्ज FIR में फर्जीवाड़ा, आपराधिक साजिश और मानहानि के आरोप लगे थे। पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दस्तावेज दिखाकर दावा किया था कि रिनिकी के पास कई देशों के पासपोर्ट हैं। अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह 'राजनीतिक रंग' वाला केस है। आइए जानते हैं कि पवन को अग्रिम जमानत देने वाले जज कौन हैं? ...

मामला क्या है? असम पुलिस vs पवन खेड़ा
पवन खेड़ा ने असम विधानसभा चुनावों (परिणाम 4 मई 2026 को आने थे) से ठीक पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने दस्तावेज दिखाते हुए आरोप लगाया कि CM हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के पास तीन देशों के पासपोर्ट और अघोषित संपत्तियां हैं। असम पुलिस ने इसे फर्जी दस्तावेज बताते हुए FIR दर्ज की। गुवाहाटी हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। खेड़ा ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
सुनवाई में क्या हुआ?
वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी (खेड़ा की तरफ) ने कहा कि जो दस्तावेज प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाए गए, वे पहले से ही अथॉरिटीज के पास थे। हिरासत में लेकर पूछताछ गैर-जरूरी है। यह राजनीतिक प्रचार का मामला है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (असम सरकार की तरफ) ने विरोध किया कि दस्तावेज फर्जी हैं। इन्हें कहां से लाए गए? किसने तैयार किया? कस्टोडियल इंटरोगेशन जरूरी है।
बेंच ने दोनों पक्ष सुनने के बाद टिप्पणी की:
- आरोप और प्रत्यारोप पहली नजर में राजनीति से प्रेरित लग रहे हैं।
- CM हिमंत बिस्वा सरमा ने खुद सार्वजनिक बयान दिए। रिकॉर्ड में जो चीजें हैं, वे राजनीतिक विवाद की ओर इशारा करती हैं।
- निजी स्वतंत्रता अहम है, खासकर जब मामला राजनीतिक रंग का हो।
कौन हैं ये दो जज? 40 से ज्यादा फैसले लिख चुके जस्टिस माहेश्वरी और नया चेहरा जस्टिस चंदूरकर
जस्टिस जितेंद्र कुमार माहेश्वरी (Who Is Justice J.K. Maheshwari)

उनकी उपलब्धियां (आंकड़ों में):
- 150+ बेंच का हिस्सा।
- 40 से ज्यादा फैसले लिखे (जिनमें सर्विस मामलों के 25%, क्रिमिनल 23%, सिविल 21%)।
- प्रमुख फैसले: भोपाल गैस त्रासदी अतिरिक्त मुआवजे वाली याचिका खारिज (2023)। शादी पूरी तरह टूटने पर अनुच्छेद 142 के तहत सीधा तलाक देने का ऐतिहासिक फैसला।
जस्टिस माहेश्वरी की कहानी छोटे शहर से सुप्रीम कोर्ट तक की मेहनत की मिसाल है।
जस्टिस अतुल शरचंद्र चंदूरकर (Who Is Justice A.S. Chandurkar)

इस फोटो के यूज से बिना चेहरा बदले, पोटफोलियो बनाकर AI की मदद से मोबाइल व्यू साइज में बनाकर दें। पूरी तरह हिंदी भाषा में दें, लेकिन हिंदी गलत न लिखें।
नए जज होने के बावजूद उनकी सिविल और प्रशासनिक मामलों में गहरी पकड़ है। यह बेंच उनकी शुरुआती महत्वपूर्ण सुनवाइयों में से एक थी।
राहत के साथ लगाई गई शर्तें
सुप्रीम कोर्ट ने खेड़ा को जमानत देते हुए सख्त शर्तें लगाईं:
- बिना अनुमति के देश छोड़कर नहीं जा सकते।
- सबूतों से कोई छेड़छाड़ नहीं।
- जांच में पूर्ण सहयोग करना होगा।
- अदालत ने साफ किया 'यह सिर्फ अग्रिम जमानत है। आपराधिक कार्यवाही जारी रहेगी।'
कांग्रेस को राहत किन दलीलों पर मिली?
सुप्रीम कोर्ट ने चार मुख्य आधारों पर राहत दी:
- राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता: CM के सार्वजनिक बयान और चुनावी माहौल में केस दर्ज होना।
- कस्टडी की जरूरत नहीं: दस्तावेज पहले से उपलब्ध, हिरासत में पूछताछ गैर-जरूरी।
- निजी स्वतंत्रता की रक्षा: राजनीतिक मामलों में व्यक्तिगत आजादी को प्राथमिकता।
- आरोपों का स्वरूप: प्रेस कॉन्फ्रेंस राजनीतिक प्रचार का हिस्सा, फर्जीवाड़ा साबित होने से पहले गिरफ्तारी जरूरी नहीं।
पवन खेड़ा का केस अब मुख्य मुकदमे की जांच का इंतजार कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया - जमानत अपराध से मुक्ति नहीं, सिर्फ स्वतंत्रता की सुरक्षा है। यह फैसला सिर्फ एक नेता की राहत नहीं, बल्कि राजनीतिक स्वतंत्रता और न्यायपालिका की भूमिका पर बड़ा संदेश है। जस्टिस माहेश्वरी (40+ फैसले) और जस्टिस चंदूरकर की बेंच ने एक बार फिर साबित किया कि अदालत राजनीतिक दबाव से ऊपर है। असम चुनावों के बीच यह फैसला पूरे देश की नजर में है।












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