दलितों-अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न के मामलों में यूपी बहुत आगे, 43 फीसदी दर्ज हैं मामले

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और यूपी पुलिस कानून-व्यवस्था में सुधार के भले ही लाख दावे कर रहे हों, लेकिन राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट का कुछ और ही कहना है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी अभी भी दलितों और अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न के मामले में आगे है। पिछले तीन सालों में दलितों और अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न के 43 फीसदी मामले मामले यूपी में रजिस्टर्ड किए गए हैं, जिनमें मॉब लिंचिंग के मामले भी सामने हैं।

यूपी में अकेले 43 फीसदी मामले दर्ज

यूपी में अकेले 43 फीसदी मामले दर्ज

साल 2016 से साल 2019 (15 जून तक) के बीच एनएचआरसी ने 2,008 मामले दर्ज किए जिनमें अल्पसंख्यकों/ दलितों का उत्पीड़न किया गया। इनमें से 869 मामले अकेले उत्तर प्रदेश में सामने आए हैं। हालांकि, ऐसे मामलों में सबसे अधिक केस यूपी में सामने आए हैं, फिर भी अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न के मामलों में तुलनात्मक रूप से कमी आई है। साल 2016-17 से 2018-19 ऐसे मामलों में 54 फीसदी (42 से घटकर 19) कमी आई है। राजस्थान में 131 केस, हरियाणा में 106 केस, बिहार में 97 केस, मध्य प्रदेश और गुजरात में 88-88 केस, दिल्ली में 76 और उत्तराखंड में 58 केस दर्ज हैं।

संसद में गृह मंत्रालय की तरफ से दिया गया जवाब

संसद में गृह मंत्रालय की तरफ से दिया गया जवाब

वहीं, दलितों के उत्पीड़न की बात करें तो, साल 2016-2017 से 2018-19 के बीच इनमें 41 फीसदी (221 से बढ़कर 311) इजाफा हुआ है। ये जानकारी संसद में 16 जुलाई को गृह मंत्रालय द्वारा लिखित में दी गई है। तमिलनाडु के आईयूएमएल सांसद के. नवसकानी के सवालों के जवाब में ये जानकारी दी गई। उन्होंने सरकार से दलितों और अल्पसंख्यकों पर उत्पीड़न के पिछले तीन साल के मामलों की जानकारी मांगी थी। इसमें मॉब लिंचिंग के मामले भी शामिल हैं।

अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न के मामलों में कमी लेकिन दलित उत्पीड़न के केस बढ़े

अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न के मामलों में कमी लेकिन दलित उत्पीड़न के केस बढ़े

मानवाधिकार आयोग द्वारा दर्ज मामलों में अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न का ट्रेंड घटता दिखाई दे रहा है लेकिन दलितों के उत्पीड़न के मामले में इजाफा होता दिखाई दिया है। साल 2016-17 में मानवाधिकार आयोग ने देश भर में अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न के 117 केस दर्ज किए थे। 2017-18 में ये संख्या घटकर 67 तक आ गई लेकिन फिर अगले साल ये बढ़कर 79 जा पहुंची। इस साल (1 अप्रैल से 15 जून तक) मानवाधिकार आयोग ने अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न के 5 मामले दर्ज किए हैं।

हिंदी बेल्ट के राज्यों में ज्यादा मामले आए सामने

हिंदी बेल्ट के राज्यों में ज्यादा मामले आए सामने

दलितों के उत्पीड़न के मामलों की बात करें तो एनएचआरसी द्वारा दर्ज मामलों में पिछले तीन सालों में 33 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। 2016-17 में एनएचआरसी ने 505 मामले दर्ज किए जबकि 2018-19 में यह आंकड़ा बढ़कर 672 हो गया, यानी हर दिन लगभग दो मामले। वहीं, इस साल (15 जून तक) मानवाधिकार आयोग ने पहले ही 99 मामले दर्ज किए हैं जहां दलितों का उत्पीड़न किया गया था। देश में अल्पसंख्यकों और दलितों के उत्पीड़न के मामलों में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, हरियाणा और मध्य प्रदेश (इन राज्यों में 'गायों' की तादाद अधिक है) में 64 फीसदी मामले सामने आए हैं। अगर इसमें दिल्ली, गुजरात और उत्तराखंड को जोड़ दिया जाए तो ये आंकड़े 75 फीसदी तक पहुंच जाते हैं।

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