आप के अयोग्य विधायकों की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट का निर्देश, अगली सुनवाई तक EC नहीं करे उपचुनाव का ऐलान

आप के अयोग्य विधायकों की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट का निर्देश, अगली सुनवाई तक EC नहीं करे उपचुनाव का ऐलान

नई दिल्ली। अयोग्य करार दिए गए दिल्ली की सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से जवाब मांगा है, साथ ही कोर्ट ने अगली सुनवाई तक के लिए उपचुनाव की अधिसूचना जारी करने पर भी रोक लगा दी है। बुधवार को इन विधायकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने इस मामले में चुनाव आयोग समेत सभी पक्षों से जवाब मांगा है। कोर्ट ने चुनाव आयोग से अगली सुनवाई तक दिल्ली में उपचुनाव की तारीखों का ऐलान ना किया जाए जाने को भी कहा है। मामले की अगली सुनवाई अब सोमवार को होगी।

चुनाव आयोग की सिफारिश पर राष्ट्रपति ने लगाई थी मुहर

चुनाव आयोग की सिफारिश पर राष्ट्रपति ने लगाई थी मुहर

आम आदमी पार्टी (आप) के बीस विधायकों को अयोग्य घोषित करने की सिफारिश चुनाव आयोग ने की थी। जिस पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपनी मुहर लगाई थी। 20 विधायकों को अयोग्य करार दिए जाने पर आम आदमी पार्टी ने दिल्ली हाईकोर्ट का रूख किया है, पार्टी ने इसको लेकर याचिका कोर्ट में दायर की है, जिस पर आज सुनवाई हुई। इससे पहले लाभ के पद के मामले को चुनौती देने के लिए जो याचिका आप पार्टी के दायर की थी उसको उन्होंने सोमवार को वापस ले लिया था।

प्रशांत पटेल नाम के वकील ने की थी शिकायत

प्रशांत पटेल नाम के वकील ने की थी शिकायत

मार्च 2015 में आप ने 21 विधायकों को संसदीय सचिव के पद पर नियुक्त किया जिसको लेकर प्रशांत पटेल नाम के वकील ने लाभ का पद बताकर राष्ट्रपति के पास शिकायत करते हुए इन विधायकों की सदस्यता खत्म करने की मांग की थी। हालांकि विधायक जनरैल सिंह के पिछले साल विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद इस मामले में फंसे विधायकों की संख्या 20 हो गई थी।

रिमूवल ऑफ डिस्क्वॉलिफिकेशन ऐक्ट

रिमूवल ऑफ डिस्क्वॉलिफिकेशन ऐक्ट

केजरीवाल सरकार ने दिल्ली असेंबली रिमूवल ऑफ डिस्क्वॉलिफिकेशन ऐक्ट-1997 में संशोधन किया था, जिससे कि संसदीय सचिव के पद को लाभ के पद से छूट मिल सके लेकिन तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने विधेयक को मंजूरी नहीं दी थी। चुनाव आयोग ने आम आदमी पार्टी के सभी 20 विधायकों को अयोग्‍य करार दिया और इनकी सदस्‍यता रद्द करने के लिए राष्‍ट्रपति के पास सिफारिश भेज दी थी, जिस पर रविवार को राष्ट्रपति कोविंद ने भी अपनी मंजूरी दे दी। सीएम केजरीवाल ने कहा था कि विधायक अयोग्य या योग्य, इसका फैसला चुनाव आयोग नहीं कर सकता, इसका फैसला अदालत में किया जाना चाहिए।

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