आवारा कुत्तों के हमले से 18 महीने के मासूम की मौत, नोंच-नोंचकर लहूलुहान कर दिया था शरीर
पार्क में खेल रहे 18 महीने के एक बच्चे को आवारा कुत्तों ने नोच-नोच कर मार डाला। चंडीगढ़ में एक पार्क में 18 महीने का आयुष अपने भाई-बहनों के साथ खेल रहा था, जब आवारों कुत्तों के एक झुंड ने उसपर हमला कर दिया। कुत्तों के हमले से आयुष को इतनी चोटें आईं कि डॉक्टर भी उसे बचा नहीं पाए।
चंडीगढ़। पार्क में खेल रहे 18 महीने के एक बच्चे को आवारा कुत्तों ने नोच-नोच कर मार डाला। चंडीगढ़ में एक पार्क में 18 महीने का आयुष अपने भाई-बहनों के साथ खेल रहा था, जब आवारों कुत्तों के एक झुंड ने उसपर हमला कर दिया। कुत्तों के हमले से आयुष को इतनी चोटें आईं कि डॉक्टर भी उसे बचा नहीं पाए। आयुष को पास के अस्पताल में ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

चंडीगढ़ के सेक्टर 18 में पार्क में खेल रहे एक बच्चे की कुत्तों के काटने से मौत हो गई। सेक्टर 18 के एक पार्क में 18 महीने के आयुष को उसकी मां ममता उसके तीन बड़े भाई-बहनों के साथ छोड़कर आसपास के घरों में अपने काम पर गई थी। आयुष पार्क में अपने दो बड़े भाई और एक बहन के साथ खेल रहा था जब कुत्तों के झुंड ने उसपर हमला कर दिया।
आयुष के मामा पोपटलाल के अनुसार वो पार्क में झूले पर झूल रहा था जब कुत्तों ने उसपर हमला कर दिया। कुत्ते उसे खींच कर कीचड़ के गड्ढे में ले आए और उसपर हमला करना शुरू कर दिया। कुत्ते 8 मिनट तक उसे बेरहमी से उसे नोचते रहे। डर के मारे आयुष के भाई-बहन वहां से भाग गए। आयुष को पास के सरकारी मल्टी स्पेशिएलिटी अस्पताल ले जाया गया जहां उसकी मौत हो गई। डॉक्टरों ने बताया कि कुत्तों के नोचने से आयुष के शरीर पर गंभीर जख्म हो गए थे। उसके सिर और शरीर पर कुत्तों के दांतों के गहरे निशान थे।
आयुष का काफी खून भी बह गया था। पुलिस के अनुसार जिस गड्ढे में कुत्ते उसे खींचकर ले गए थे, वो उसके खून से पूरा लाल हो गया था। सेक्टर 19 पुलिस थाने के अधिकारी दविंदर सिंह ने बताया कि मामले में परिवार का बयान दर्ज कर लिया गया है और आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 174 के तहत मामले की जांच जारी है। आयुष के शव को पोस्टमॉर्टम के बाद परिवार को सौंपा जाएगा।
ये पहला मामला नहीं है जब आवारा कुत्तों के हमला करने से बच्चों को अपनी जान गंवानी पड़ी हो। अभी 6 जून को ही एक 13 साल के लड़के पर कुत्तों ने हमला कर दिया था, जिसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल में दर-दर भटकना पड़ा था। इससे पहले भी देश के कई शहरों में मासूम छोटे बच्चे कुत्तों का शिकार बन चुके हैं।
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