'छोटे व्यापारी भुक्तेंगे': भारत में कई चीजों के वायदा व्यापार पर बैन

नई दिल्ली, 21 दिसंबर। भारत ने पांच उपभोक्ता वस्तुओं का वायदा व्यापार पर रोक लगा दी है. खाद्य तेलों, गेहूं और चावल जैसी मूलभूत चीजों की महंगाई रोकने में नाकाम रही सरकार ने सोमवार को यह फैसला तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया.
सरकार का यह फैसला लाखों निवेशकों के लिए बुरी खबर बनकर आया जिन्होंने इन जिन्सों में भारी निवेश किया हुआ है. यह फैसला तब लिया गया है जबकि कीमतें आसमान पर हैं.
देखिए, सबसे अमीर भारतीय
खाद्य तेलों के व्यापारियों के संगठन सोल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अतुल चतुर्वेदी कहते हैं, "यह तो संदेशवाहक को गोली मारने जैसा है. हालांकि वे तेल के कीमतों को लेकर चिंतित थे इसलिए हमें सरकार से सहानुभूति है."
अपने आदेश में बाजार नियामक सेबी ने विभिन्न कमॉडिटी एक्सेचेंज को सोयाबीन, सोय ऑयल, क्रूड पाम ऑयल, धान, सफेद छोले, हरे चने, सफेद सरसों और सरसों के वायदा बाजारों के लिए भविष्य में एक साल तक नए अनुबंध जारी ना करने का आदेश दिया. मौजूदा अनुबंधों के लिए भी नई खरीद-फरोख्त की इजाजत नहीं होगी.
भारी दबाव में है सरकार
व्यापारियों का कहना है कि सरकार खाद्य कीमतों की बढ़ोतरी के कारण भारी दबाव में है. इसकी बड़ी वजह अगले साल होने वाले अहम चुनाव भी हैं, जिस कारण इस तरह के फैसले लिए जा रहे हैं. एक ट्रेडर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "कोई मतलब बनता हो या नहीं, इससे कुछ फर्क नहीं पड़ता. सरकार बस कुछ करना चाहती थी."
इसी साल भारत में खाद्य तेलों की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थीं. तब अक्टूबर में सरकार ने पाम, सॉय और सूरजमुखी तेलों के आयात पर कर कम कर दिया था. लेकिन उसका बहुत कम असर हुआ क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कीमतें अस्थिर और ऊंची बनी हुई हैं.
कन्सल्टेंसी ग्रुप सनविन के चीफ एग्जेक्यूटिव संदीप बजोरिया कहते हैं कि सोमवार को उठाया गया कदम आयातकों और व्यापारियों के लिए खाद्य तेलों में धंधे को मुश्किल बना देगा क्योंकि वे अपने जोखिम को कम करने के लिए बहुतायत में वायदा बाजारों का प्रयोग करते हैं. वह कहते हैं, "चूंकि ट्रेडर्स के पास कोई हेजिंग प्लैटफॉर्म नहीं होगा तो कुछ समय के लिए आयात धीमा हो जाएगा."
छोटे व्यापारियों पर होगा असर
जानकारों का मानना है कि इस कदम से सबसे ज्यादा तो छोटे खरीददार और व्यापारी भुक्तेंगे क्योंकि उनके सामने अंतरराष्ट्रीय अस्थिर कीमतों और रूपये की घटती कीमतों के रूप में दो चुनौतियां एक साथ मौजूद होंगी.
एक ट्रेडर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "बड़े ट्रेडिंग घरानों पर तो ज्यादा असर नहीं होगा. वे बरसा मलयेशिया और शिकागो बोर्ड ऑफ ट्रेड जैसे विदेशी प्लैटफॉर्म पर ट्रेड करते हैं. छोटे ट्रेडर ऐसा नहीं कर सकते, उन्हें बहुत सारी परमिशन लेनी पड़ती हैं."
एक सरकारी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त परक कहा कि नेशनल कमॉडिटी ऐंड डेरीवेटिव्स एक्सचेंज (NCDEX) पर इस कदम का बुरा असर पड़ेगा क्योंकि वहां बड़ा व्यापार इन्हीं चीजों का होता था.
इस फैसले के बाद सोयाबीन की कीमतों में साढ़े तीन प्रतिशत की कमी तो देखी गई लेकिन जानकारों का कहना है कि इससे खाद्य तेलों में आई महंगाई पर ज्यादा असर नहीं होगा. मुंबई स्थित एक डीलर ने कहा, "खाद्य तेलों के लिए भारत आयात पर निर्भर है और घरेलू कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजारों की ऊंच-नीच से प्रभावित होतती हैं. स्थानीय वायादा व्यापार को रोक देने से समस्या नहीं सुलझेगी."
वीके/एए (रॉयटर्स)
Source: DW












Click it and Unblock the Notifications