हिमाचल: हर 20 साल पर 13 अगस्त को यहां गिरता है मौत का पहाड़
मंडी-पठानकोट एनएच पर कोटरोपी में भयानक हादसा हुआ जिसमें कई जानें चली गईं। यहां यह पहली बार नहीं हुआ है।
शिमला। आम तौर पर 13 के अंक को अशुभ माना जाता है। भले ही इस मामले में अपने-अपने मत हो सकते हैं। 13 अगस्त का दिन मंडी जिला के कोटरोपी के लिये अशुभ ही रहा। इसी दिन मंडी-पठानकोट एनएच पर कोटरोपी में भयानक हादसा हुआ जिसमें कई जानें चली गईं। यहां यह पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले भी यहां दो बार 13 तारीख को ही भू-स्खलन हो चुका है। इस बार की 13 तारीख ऐसे जख्म दे गई, जिसे लोग ताउम्र न भूल पाएंगे।

13 अगस्त को होता है प्रकृति का प्रकोप
कोटरोपी में हर 20 साल बाद 13 अगस्त हो ही प्रकृति के प्रकोप का शिकार हो रहा है। यह अजीब संयोग की बात है कि शनिवार देर रात जहां भारी भू-स्खलन हुआ वहां हर 20 साल बाद उसी महीने उसी तारीख को दो बार भू-स्खलन हो चुका है। हालांकि ताजा घटनाक्रम में पूरा का पूरा पहाड़ अपने साथ कई जिंदगियां लील गया।

1977 और 1997 में हो चुका है हादसा
बताया जा रहा है कि सबसे पहले मंडी-पठानकोट एनएच-154 पर कोटरोपी में 13 अगस्त, 1977 को पहली बार भू-स्खलन हुआ था। उस समय में भी काफी नुकसान क्षेत्र में हुआ था। हालांकि उस दौरान किसी जानी नुकसान की जानकारी सामने नहीं आई। इसके बाद ठीक 20 साल बाद 13 अगस्त, 1997 को एक बार फिर कोटरोपी में भू-स्खलन हुआ और इसमें रवा पुल का नामोनिशान मिट गया था।

पहाड़ दरका और 48 जिंदगियां दफन कर गया
उस समय इस रोड पर आवाजाही करीब तीन दिन तक पूरी तरह ठप रही थी। इसके बाद एक बार फिर 13 अगस्त, 2017 को जब पहाड़ दरका तो 48 जिंदगियां दफन कर गया। यह अब तक के कोटरोपी व प्रदेश के इतिहास का भयावह भू-स्खलन साबित हुआ।

कंडक्टर का मोबाइल नंबर भी 813
चंबा-मनाली की जिस बस में परिचालक भी काल का ग्रास बन गया, उसके मोबाइल के आखिरी तीन नंबर भी 813 ही थे। कई जिंदगियां लीलने के बाद कोटरोपी का यह पहाड़ी अब शांत है, लेकिन अब कब यह फिर प्रलय लाएगा, यह कहा नहीं जा सकता।












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