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Himachal Election Results 2022: हिमाचल में नहीं टूटी 5 साल बाद सरकार बदलने की 3 दशक पुरानी परंपरा,जानें इतिहास

Himachal Election Results 2022: हिमाचल में पिछले तीन दशक से कोई भी पार्टी लगातार दूसरी बार सरकार नहीं बना पाई। 1985 से यहां की जनता ने हर बार सत्‍ता के खिलाफ वोट करके दूसरी पार्टी को मौका दिया है। इस बार भी ऐसा ही हुआ।

bjpcongress

हिमाचल प्रदेश में पिछले तीन दशक से हर बार सत्‍ता परिवर्तन का ट्रेंड रहा है। हिमाचल में पिछले तीन दशकों से कोई भी पार्टी अपनी सत्‍ता को बरकरार रखने में सफल नहीं हो पाई। हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 के परिणाम में एक बार फिर ये ही पैटर्न देखने को मिला।भाजपा सत्‍ता में वापसी नहीं करती नजर आ रही है। जबकि प्रदेश में भाजपा की कमान राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष जेपी नड्डा ने खुद संभाली थी और Anti-incumbency के हिमाचल के रिवाज को तोड़ने की ठानी थी लेकिन अपने गृह राज्‍य में नड्डा की सारी गणित यहां के लोगों के मूड के पैटर्न को नहीं बदल सकी।

1985 के बाद से जनता अल्‍टरनेट पार्टी को वोट देती आई है

1985 के बाद से जनता अल्‍टरनेट पार्टी को वोट देती आई है

हिमाचल में एंटी-इनकंबेंसी (Anti-incumbency)का ट्रेंड रहा है। पहाड़ी राज्य में 1985 के बाद से अल्टरनेटिंग पार्टी को यहां की जनता ने वोट दिया है। हालांकि हिमाचल में हर विधानसभा चुनाव बीजेपी और कांग्रेस के बीच मुकाबला रहा है, 1985 के बाद से प्रत्येक पार्टी वैकल्पिक रूप से सत्ता में आ रही है।

कांग्रेस और भाजपा दाे ही पार्टी है वैकल्पिक रूप से सत्ता में आ रही

कांग्रेस और भाजपा दाे ही पार्टी है वैकल्पिक रूप से सत्ता में आ रही

उत्तरी राज्य हिमाचल में हर विधानसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला रहा है, जिसमें ये ही दो पार्टी वैकल्पिक रूप से 1985 से सत्ता में आ रही है।

 सत्‍ता विरोधी रिवाज

सत्‍ता विरोधी रिवाज

एंटी-इनकंबेंसी मौजूदा राजनेताओं को वोट देने के पक्ष में एक भावना है। द्वि-दलीय प्रणाली में, सत्ता-विरोधी मतदाताओं के पास मतदान करने के लिए केवल एक पार्टी होती है, जब वे सत्ताधारी के विरुद्ध मतदान करते हैं।

हिमाचल में तीन दशकों से वैकल्पिक पार्टी को जनता ने दिया मौका

हिमाचल में तीन दशकों से वैकल्पिक पार्टी को जनता ने दिया मौका

1985 के विधानसभा चुनाव

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 68 में से 58 सीटें जीतीं, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने 7 सीटें जीतीं, और वीरभद्र सिंह को हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त किया गया। भारत के परिसीमन आयोग की सिफारिश के अनुसार निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या 68 के रूप में निर्धारित की गई थी।

1990 के विधानसभा चुनाव

यू-टर्न लेते हुए, भाजपा ने 46 सीटों के साथ लोकप्रिय जनादेश जीता, जबकि कांग्रेस ने 9 सीटों पर जीत हासिल की। शांता कुमार को मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त किया गया था।

1993 के चुनाव परिणाम

1993 के चुनावों में एक और स्विंग में, कांग्रेस ने 52 सीटों पर जीत हासिल की और उसके नेता, वीरभद्र सिंह को दूसरे कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त किया गया।बीजेपी ने 8 सीटों पर जीत हासिल की।

2003 के विधानसभा चुनाव

कांग्रेस ने 68 में से 43 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा ने 16 सीटें जीतीं, और वीरभद्र सिंह को हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में फिर से नियुक्त किया गया।

2007 हिमाचल विधानसभा चुनाव परिणाम

भाजपा ने 41 सीटों के साथ फिर से मुख्यमंत्री की कुर्सी हथिया ली और प्रेम कुमार धूमल को फिर से मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया। उस साल कांग्रेस ने 23 सीटें जीती थीं।

2012 हिमाचल विधानसभा परिणाम

कांग्रेस ने लोकप्रिय वोट के साथ-साथ 36 सीटें जीतीं, वीरभद्र सिंह को शीर्ष पद पर वापस ला दिया। 2012 में, कांग्रेस ने लोकप्रिय वोट के साथ-साथ 36 सीटें जीतीं, वीरभद्र सिंह को शीर्ष पद पर वापस ला दिया। बीजेपी ने 26 सीटों पर जीत हासिल की थी।

2017 हिमाचल प्रदेश चुनाव परिणाम

भाजपा ने 68 में से 44 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि कांग्रेस को 21 सीटों पर जीत मिली थी। बीजेपी ने जहां दो-तिहाई बहुमत हासिल किया था।

2022 में भी वो ही पुरानी परंपरा है जारी

2022 में भी वो ही पुरानी परंपरा है जारी

वहीं इस बार भी हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के परिणामों में वो ही पुरानी परंपरा नजर आई। नतीजों में सत्‍ता पर काबिज भाजपा को कांग्रेस ने बड़ा झटका दिया।

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