प्रतिभा सिंह के सबको साथ लेकर चलने के बयान पर सीएम सुक्खू का रिएक्शन, देखें क्या कहा

हिमाचल प्रदेश में हाल ही में हुए राज्यसभा चुनावों में पार्टी की शर्मनाक हार की पटकथा लिखने वाले कांग्रेस के 6 बागी विधायकों के अयोग्य घोषित होने के बाद सियासी पारा और गरमाया हुआ है। पार्टी के राज्यसभा चुनाव हारने के अगले दिन विक्रमादित्य सिंह ने विधायकों के बीच असंतोष की बात कहते हुए मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।

बेटे के इस्तीफे के बाद हिमाचल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी की सराहना की थी और बीजेपी के कार्य को कांग्रेस से बेहतर बताया था। जिसके बाद अब हिमाचल प्रदेश के सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू का बयान सामने आया है।

CM Sukhwinder Singh Sukhu

प्रतिभा सिंह की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए सुक्खू ने कहा, "किसी व्यक्ति के पास 80% विधायकों का समर्थन हो, इससे बड़ी बात क्या होगी? मुझे नहीं पता कि उन्होंने यह सवाल क्यों उठाया।"

सुक्खू ने दावा किया है कि विधायकों का विद्रोह भाजपा के कारण हुआ। उन्होंने कहा, "बीजेपी ने राज्यसभा चुनाव के दौरान खरीद-फरोख्त की और क्रॉस वोटिंग कराई...विपक्ष का काम आरोप लगाना है और वे यही करेंगे।"

उन्होंने कहा, ''80 फीसदी कांग्रेस एक साथ है और बाकी 20 फीसदी में भी कुछ लोग छोटी-छोटी बातों को लेकर हमसे नाराज हैं। चीजों को स्पष्ट करना मेरी जिम्मेदारी है, इसलिए मैंने उनसे (कांग्रेस से छह निष्कासित विधायकों) चर्चा की है। क्रॉस वोटिंग से बीजेपी के हौंसले बुलंद हैं लेकिन ऐसी स्थिति दोबारा पैदा नहीं होगी।"

प्रतिभा सिंह ने एएनआई से बात करते हुए कहा था, "कांग्रेस में बहुत सी चीजें की जानी बाकी हैं। एक सांसद के रूप में, मैं अपने निर्वाचन क्षेत्र का दौरा करता हूं और स्थानीय लोगों से बातचीत करने और उनकी समस्याओं को हल करने का प्रयास करता हूं। भाजपा का कामकाज वास्तव में हमसे बेहतर है।"

हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने 29 फरवरी को राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग करने वाले छह बागी कांग्रेस विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया था। राज्यसभा चुनाव के दौरान तीन निर्दलीय विधायकों के साथ क्रॉस वोटिंग करने वाले छह विधायकों को क्रॉस वोटिंग के लिए अयोग्य नहीं ठहराया गया है, बल्कि व्हिप का उल्लंघन करने और बजट सत्र में भाग लेने के लिए अयोग्य ठहराया गया है।

अयोग्य ठहराए गए विधायकों में राजिंदर राणा, सुधीर शर्मा, इंदर लखनपाल, देविंदर कुमार, रवि ठाकुर और चेतन्य शर्मा हैं। कांग्रेस पार्टी ने छह बागी विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग करते हुए हिमाचल प्रदेश स्पीकर का रुख किया था। दलबदल विरोधी कानून के तहत कांग्रेस विधायक और संसदीय कार्य मंत्री हर्ष वर्धन चौहान ने याचिका दायर की थी।

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