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चुनावी साल में कई गुटों में बंटती जा रही है हिमाचल कांग्रेस, वीरभद्र सिंह के बिना गुजर रही है संकट के दौर से

चुनावी साल में कई गुटों में बंटती जा रही है हिमाचल कांग्रेस, वीरभद्र सिंह के बिना गुजर रही है संकट के दौर से

शिमला, 06 अक्टूबर: चुनावी साल में हिमाचल प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बिना कांग्रेस पार्टी संकट के दौर से गुजर रही है। पार्टी में कद्दावर नेता के अभाव में संगठन की एकता तार-तार हो रही है और निराशा के भाव में पार्टी नेता भाजपा में जा रहे हैं। अनिश्चितता के इस माहौल का लाभ भाजपा को मिलता दिखाई दे रहा है। हालांकि, कुछ माह पहले तक भाजपा सत्ता में वापसी को लेकर उतनी आश्वस्त नहीं थी, जितनी अब हैं। चूंकि कांग्रेस पार्टी का हर दांव फेल होता जा रहा है और पार्टी के लोग कांग्रेस छोड़ भाजपा में जा रहे हैं। कुछ माह पहले कांग्रेस आलाकमान ने पंजाब की तर्ज पर हिमाचल में संगठन में बदलाव करते हुए कुलदीप राठौर को हटा कर वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह को कमान सौंप कर उनके साथ चार कार्यकारी अध्यक्ष तैनात किए। लेकिन विडंबना है कि चार में से दो कार्यकारी अध्यक्ष और एक उपाध्यक्ष भाजपा में चले गये। जाहिर है कि संगठन में बदलाव करने का लाभ पार्टी को नहीं मिला।

Himachal Pradesh Assembly Election 2022 Himachal Congress Congress Party Virbhadra Singh

दरअसल, हिमाचल कांग्रेस पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के निधन के बाद एक सर्वमान्य नेता को आगे लाने में पूरी तरह नाकाम रही है। जिससे पार्टी में गुटबाजी को हवा मिल रही है। प्रदेश कांग्रेस इन दिनों तीन खेमों में बंटती नजर आ रही है। कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह के अलावा नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री और चुनाव प्रचार समिति अध्यक्ष सुखविन्दर सिंह सुक्खू अपने अपने समर्थकों के लिए टिकट की पैरवी में जुटे हैं। जिससे अब टिकट आबंटन में ही आम सहमति नहीं बन पा रही है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि पार्टी को चुनावों से पहले ही मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करना चाहिये। ताकि पार्टी में अनिश्चितता का माहौल खत्म हो।

बताया जा रहा है कि प्रतिभा सिंह और मुकेश अग्निहोत्री अपने-अपने तरीके से अपने लिए गोटियां बिठाने में लगे हैं, तो दूसरी ओर सुखविंदर सिंह सुक्खू भी अपनी दावेदारी मजबूत करने में लगे हैं। अपनी दावेदारी के सवाल सुक्खू ने बताया कि मुख्यमंत्री बनने की ख्वाहिश रखने में कोई बुराई नहीं है। आलाकमान इस बात से अच्छी तरह वाकिफ है कि पार्टी के सत्ता में लौटने के बाद संभावित नेता कौन हैं? या वास्तव में राज्य का नेतृत्व करने के गुण कौन रखते हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या मैं इस पद के लिए योग्य नहीं हूं? मेरी अपनी हैसियत और योग्यता है। मैंने जमीनी स्तर से पार्टी के सर्वोच्च पद तक काम किया है और राज्य में कांग्रेस को मजबूत किया है। मेरी पहली प्राथमिकता कांग्रेस को सत्ता में लाना है इसके लिए पार्टी को एक जुट होना जरुरी हैं।

कांग्रेस नेता ही मानते हैं कि हिमाचल प्रदेश में पार्टी इन दिनों संकट के दौर से गुजर रही है। आज पार्टी को पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह जैसे कद्दावर नेता की जरूरत है। जो सबको साथ लेकर चल सके और चुनावों में जीत दिला सके। वीरभद्र सिंह हमेशा ही पार्टी के लिए संकटमोचक साबित हुए। उन्होंने कई चुनाव अकेले ही जीतवा दिये, लेकिन आज हालात अलग हैं।

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