हरियाणा के पूर्व CM हुड्डा के खिलाफ CBI जांच के आदेश, 400 एकड़ भूमि अधिग्रहण का मामला

रोहतक। देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ सीबीआई जांच कराने के आदेश दे दिए हैं। हुड्डा अपने शासनकाल के दौरान हुए भूमि अधिग्रहण के एक मामले में अदालत के आरोपों का सामना कर रहे हैं। उन पर भ्रष्टाचार का आरोप है। वहीं, पंचकूला स्थित सीबीआई अदालत ने उनके खिलाफ आईपीसी की धारा-420, 120-बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा-13 के तहत आरोप तय किए थे। इस मामले की पिछले दिनों पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई हुई, जहां हुड्डा को राहत मिल गई। मगर, फिर रोहतक वाला मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया और अब सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ सीबीआई से जांच कराने के आदेश दे दिए हैं।

 Hooda

सुप्रीम कोर्ट के इस अहम फैसले से हुड्डा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। चूंकि, सीबीआई ही रोहतक जमीन मामले की जांच करेगी। यह मामला रोहतक में कांग्रेस शासन के दौरान अधिग्रहीत करीब 400 एकड़ भूमि रिलीज करने से जुड़ा है। दरअसल, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) ने 2002 में रोहतक में आवासीय व व्यावसायिक क्षेत्र विकसित करने के लिए हुड्डा सरकार के पास 850 एकड़ जमीन अधिगृहीत (क​ब्जाने) करने का प्रस्ताव भेजा था। हालांकि, वर्ष 2005 के अप्रैल महीने में उसे 422 एकड़ जमीन अधिगृहीत करने का आदेश मिला। वहीं, उससे महीनेभर पहले यानी मार्च, 2005 में उद्दार गगन प्रापर्टीज लिमिटेड नामक रियल एस्टेट कंपनी ने कुछ किसानों के साथ समझौता कर लिया था, जिनकी जमीन कॉलोनी तैयार करने के लिए अधिगृहीत की जानी थी। उस रियल एस्टेट कंपनी ने 280 एकड़ जमीन पर एक कॉलोनी बसाने करने के लिए लाइसेंस मांगा। जिसे 2006 के जून महीने में हुड्डा सरकार के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डायरेक्टर से मंजूरी मिल गई। लाइसेंस दिए जाने के बाद संबंधित जमीन को अधिग्रहण से मुक्त कर दिया गया।

वहीं, बिल्डर को लाइसेंस जारी किए जाने के बाद भू-मालिकों के पावर आफ अटार्नी रखने वालों के माध्यम से जमीन भी उसके नाम कर दी गई। बाद में जब सरकार बदली तो नए मुख्यमंत्री ने इस मामले की सीबीआई से जांच कराने की बात कही थी। कई सालों तक चले आरोप-प्रत्यारोपों के बाद मामला जब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो अब सुप्रीम कोर्ट ने इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी है। साथ ही कोर्ट ने 280 एकड़ भूमि पर आवासीय कॉलोनी बनाने के लिए रियल एस्टेट कंपनी को लाइसेंस जारी करने की जांच भी सीबीआई को सौंपी है।

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