'संतों की वाणी का मानव जीवन पर गहरा प्रभाव', जूनाअखाड़ा के कार्यक्रम में बोले सीएम खट्टर
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर (CM Manoharlal Khattar) ने कहा की हमें अपनी परंपराओं और वैदिक रीतियों को भूलना नहीं चाहिए। सीएम ने याद दिलाया कि सदियों से भारत की पहचान एक धार्मिक देश के रूप में रही है। जूनाअखाड़ा के स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने पर हरिद्वार में आयोजित आध्यात्मिक महोत्सव सीएम ने कहा कि संतों की समाज के निर्माण में सबसे अधिक भूमिका रही है। सीएम ने कहा कि हरियाणा सरकार संतों, गुरुओं और महापुरुषों की सीख का प्रचार प्रसार कर रही है।
रविवार को जूनापीठाधीश्वर के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज के श्रीपंचदशनाम जूनाअखाड़ा की आचार्यपीठ की स्थापान के 25 वर्ष पूर्ण होने और श्रीदत्त जयंती पर हरिद्वार में एक आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसका शुभारंभ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डा. मोहनराव भागवत ने किया।

कार्यक्रम में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के अलावा गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज, स्वामी रामदेव, केन्द्रीय राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति, सांसद व भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव प्रताप रूडी, महाराष्ट्र के पूर्व-राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी, उत्तराखंड के वित्तमंत्री प्रेमचंद अग्रवाल सहित कई संत व राजनेता भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
समारोह में देश के नामी इन बड़े संतों ने जहां संत वाणी के महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं सीएम मनोहर लाल खट्टर ने संतों की समाज में अहम और महती भूमिका का उदाहरण दिया। सीएम ने बताया कि संतों की वाणी का मानव जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। उन्होंने बताया कि बेशक सरकार की ओर से व्यसनों पर अंकुश लगाने के लिए लोगों को काफी समझाने का प्रयास किया जाता है, मगर जब एक संत इनके खिलाफ आवाज उठाता है, तो मनुष्य संतों की बात को महत्व देते हुए व्यसनों के तिरस्कार की भावना अपने भीतर जागृत करता है।
सीएम आगे कहा कि जिस प्रकार बाबा रामदेव ने योग की अलख जगाई, तो आज पूरे विश्वभर में लोगों ने योग की महता को समझा। उन्होंने बताया कि संतों द्वारा दिए जाने वाले ज्ञान के यूं तो बहुत बड़े उदाहरण देखने को मिले हैं, मगर इनमें एक ये है कि संतों की ही बदौलत शासकीय और राजकीय व्यवस्था में तेजी से सुधार हुए हैं।












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