Opinion: हरियाणा में लाडली योजना से बेटियों का संवर रहा है भविष्य
हरियाणा सरकार बेटियों के भविष्य को लेकर काफी सजग है। इसका फर्क जमीन पर नजर भी आता है। राज्य में बेटियों के बेहतर भविष्य के लिए चलने वाली योजनाओं में लाडली सामाजिक सुरक्षा भत्ता योजना भी शामिल है।

हरियाणा में लिंगानुपात हमेशा से एक समस्या रही है। लेकिन, पिछले कुछ वर्षों में इसे एक चुनौती की तरह लिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार साल 2022 की ही बात करें तो जन्म के समय लिंगानुपात में वहां 2021 के मुकाबले सुधार हुआ है। पिछले साल वहां 1000 लड़कों के मुकाबले 917 बच्चियों का जन्म हुआ है। जो कि एक साल पहले के मुकाबले 3 अंक का सुधार है। लिंगानुपात को सुधारने के लिए राज्य में जो कई तरह से प्रयास हो रहे हैं, उनमें 'लाडली सामाजिक सुरक्षा भत्ता' योजना भी शामिल है। यह योजना ना सिर्फ कन्या भ्रूण हत्या को खत्म करने के लिए चलाई जा रही है, बल्कि बच्चियों के जन्म को बढ़ावा देने और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ समानता बढ़ाने के इरादे से भी चल रही है।

सालाना 30,000 रुपए की सहायता
हरियाणा सरकार लाडली योजना को कितना महत्त्व दे रही है इसका अनुमान इसी से लग सकता है कि इसके तहत लाभार्थी परिवारों को अब 2,500 रुपए मासिक (01-04-2021 से प्रभावी) के हिसाब से सालाना 30,000 रुपए दिए जा रहे हैं। 5 मार्च, 2023 तक राज्य में इस योजना का लाभ उठाने वालों की संख्या 36,615 हो चुकी है।

वृद्धावस्था सम्मान भत्ता योजना का पैटर्न
हरियाणा सरकार की लाडली योजना वृद्धावस्था सम्मान भत्ता योजना के पैटर्न पर चल रही है। यह योजना सिर्फ उन परिवारों के लिए जिनके घर में सिर्फ बेटियां हैं। जैसे ही बेटी के माता-पिता में से किसी का भी (जो बड़ा हो) 45वां जन्मदिन होता है, वह इसके तहत रजिस्ट्रेशन के पात्र हो जाते हैं। तब से लेकर 60 साल की उम्र तक यानि 15 साल तक उन्हें लाडली भत्ता मिलता है। 60 साल होते ही वह वृद्धावस्था सम्मान भत्ता के पात्र हो जाते हैं।
किन्हें मिलता है लाडली योजना का लाभ
यदि बीच में दुर्भाग्य से माता या पिता में से किसी एक की मौत हो जाती है तो योजना का लाभ जीवित माता या पिता में से किसी को तबतक दिया जाता है, जबतक वह 60 साल की उम्र के हो जाते हैं। बाद में वह भी वृद्धावस्था सम्मान भत्ता के पात्र हो सकते हैं। इस योजना के पात्र परिवारों के लिए आवश्यक है कि जैविक माता-पिता में से कोई एक या दोनों हरियाणा के निवासी हों या हरियाणा सरकार में काम करते हों और उनका कोई बेटा न हो। मतलब इस योजना का लाभ सिर्फ उन्हें दिया जाता है, जिनकी सिर्फ बेटी/बेटियां हैं। इस योजना के लाभार्थियों के लिए यह भी आवश्यक है कि परिवार की कुल सालाना आय 2,00,000 रुपए से अधिक न हो।
इस योजना का लाभ माता को दिया जाता है। यदि माता जीवित नहीं है तो उस केस में पिता को लाभ दिया जाता है। हरियाणा के सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के मुताबिक साल 2014 के अप्रैल तक इस योजना के तहत सिर्फ 1,000 रुपए मासिक या 12,000 रुपए सालाना की रकम मिलती थी, जो आज की तारीख में डेढ़ गुनी बढ़ चुकी है। (तस्वीरें-सांकेतिक)












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