OPINION: बेटियों की बेहतर शिक्षा के लिए समर्पित हरियाणा सरकार
हरियाणा सरकार ने पिछले 9 वर्षों में महिलाओं और लड़कियों के लिए अनेकों कल्याणकारी योजनाएं शुरू की हैं। इसी में लड़कियों की शिक्षा के स्तर को बढ़ाने के लिए मनोहर लाल खट्टर की सरकार ने हाल ही में एक और दूरदर्शी योजना की शुरुआत की है।
अब राज्य सरकार लड़कियों को सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों में मुफ्त में शिक्षा मुहैया करवाएगी और उसका खर्च खुद उठाएगी। यह व्यवस्था उन बेटियों के लिए की गई है, जिनके परिवार की सालाना आमदनी 1.80 लाख रुपए तक ही है। यानि हरियाणा में किसी छात्रा के परिवार की गरीबी उसकी उच्च शिक्षा में बाधक नहीं बनेगी।

हरियाणा सरकार का बड़ा कदम
सरकार का इरादा साफ है और लक्ष्य नेक है। क्योंकि, कोई सरकार ऐसे फैसले वोट बैंक के लिए नहीं लेती। अगर ऐसा करना होता तो इस मुफ्त शिक्षा का दायरा बढ़ा कर करदाताओं पर बोझ और बढ़ाया जा सकता था। लेकिन, खट्टर सरकार ने सिर्फ जरूरतमंदों पर फोकस किया है। एक क्लाणकारी राज्य का मतलब ही जिम्मेदारियों के साथ कार्य करना है। न कि सिर्फ सत्ता के लिए रेवड़ियों की ढेर लगाते जाना।

परिवार की आर्थिक स्थिति के आधार पर सहायता
हरियाणा सरकार की नीयत साफ है। क्योंकि, उसने परिवार की गरीबी के हिसाब से इस तरह की सहायता देने का फैसला किया है। मतलब, जिन लड़कियों के परिवार की वार्षिक आमदनी 1.80 लाख रुपए से लेकर 3 लाख रुपए तक के बीच की है, उनक कॉलेज फीस का आधा माफ होगा या वह सरकार उठाएगी। प्राइवेट कॉलेजों के मामले में इस तरह की फीस का जो भी भार होगा, वह हरियाणा सरकार उठाएगी।

'छात्रा परिवहन सुरक्षा' योजना का भी दायरा बढ़ा चुकी है खट्टर सरकार
इससे पहले खट्टर सरकार ने 'छात्रा परिवहन सुरक्षा' योजना का भी दायरा बढ़ा दिया था। इसके तहत ग्रामीण इलाकों में रहने वाली छात्राओं को भी मुफ्त परिवहन सेवा के दायरे में ले आया गया है।
इय योजना के तहत परिवहन विभाग उन गांवों को बस सेवा उपलब्ध कराता है, जहां 50 से अधिक बेटियां अपने घर से दूर स्कूलों में पढ़ने जाती हैं। जिन गांवों में ऐसी छात्राओं की संख्या 30 से 40 तक है, उसके लिए मिनी बस की व्यवस्था है।

राज्य सरकार की कोशिश है कि अगर किसी गांव में छात्राओं की संख्या 5 से 10 भी है तो उनकी यातायात सुविधा के लिए शिक्षा विभाग की ओर से ध्यान दिया जाएगा।

2015 में लॉन्च हुई 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' योजना ने हरियाणा की बेटियों को पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ने का हौसला दिया है। इस योजना की मकसद ही बेटियों की शिक्षा और उनके सशक्तिकरण का है, जिसे हासिल करने में राज्य सरकार कोई कसर नहीं छोड़ रही है।












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