मानसून सत्र से पहले छलका कुलदीप बिश्नोई का दर्द, कहा- राजनीतिक रूप से नीचा दिखाने की कोशिश की गई
वह प्रोटोकॉल पर चलने वाले स्वाभिमानी व्यक्ति हैं और जूनियर विधायकों की चेयरमैनी वाली किसी कमेटी में सदस्य नहीं बन सकते।
चंडीगढ़, अगस्त 7, 2021। 20 अगस्त से विधानसभा के मानसून सत्र शुरू होने वाले हैं। मानसून सत्र शुरू होने से पहले ही विधानसभा कमेटियों को लेकर सियासी घमासान छिड़ गया है। कुलदीप बिश्नोई ने साफ़ तौर कहा है कि उन्हें राजनीतिक तौर पर नीचा दिखाने की कोशिश की गई है। उन्होंने कहा की मुझे राजनीतिक रूप से नीचा दिखाने के लिए जूनियर विधायक की चेयरमैनी वाली कमेटी में सदस्य बनाया गया है। ग़ौरतलब है कि कांग्रेस की केंद्रीय कार्यसमिति सदस्य और आदमपुर से चौथी बार विधायक कुलदीप बिश्नोई पहले ही विधानसभा सचिवालय को लिखकर दे चुके हैं कि वह ऐसी किसी कमेटी में सदस्य नहीं बनेंगे।

आपको बता दें कि विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने कमेटियों की बैठकों में नहीं आ रहे सदस्यों को हटाने के आदेश जारी किए थे। इस आदेश पर विधायक कुलदीप बिश्नोई ने कहा कि विधानसभा कमेटियों में पहली या दूसरी बार चुनकर आए विधायकों को चेयरमैन बनाया गया है। जबकि तीन-चार बार विधानसभा में चुनकर आए विधायकों को इनका सदस्य बनाया गया है। वह प्रोटोकॉल पर चलने वाले स्वाभिमानी व्यक्ति हैं और जूनियर विधायकों की चेयरमैनी वाली किसी कमेटी में सदस्य नहीं बन सकते। इस बाबत उन्होंने विधानसभा की पहली बैठक में ही लिखित में सूचित कर दिया था कि आगामी पांच वर्षों तक उन्हें किसी कमेटी में शामिल नहीं किया जाए। बिश्नोई ने आरोप लगाया कि असंवैधानिक रूप से विधानसभा सदस्य के रूप में उन्हें मिलने वाले फ़ंड में से नियमित दस हजार रुपये काटे जा रहे हैं। बीते तीन अगस्त को भी उन्होंने एक और पत्र लिखकर उनके फंड में से काटी गई राशि का ब्याज सहित भुगतान करने की मांग की है। उन्होंने विधानसभा स्पीकर पर नियमों की अनदेखी करने के आरोप भी लगाए।
कुलदीप बिश्नोई ने बताया कि हरियाणा विधानसभा की पहली बैठक में ही उन्होंने पत्र क्रमांक एमएलए/ सेक्रेटरी/विधानसभा 0003 के माध्यम से लिखित में सूचित कर दिया था कि आगामी पांच वर्षों तक उन्हें विधानसभा की किसी भी कमेटी में शामिल न किया जाए। उसके बावजूद राजनीतिक रूप से नीचा दिखाने के लिए उन्हें उनसे जूनियर विधायकों की चेयरमैनी वाली कमेटी में सदस्य बनाया गया और असंवैधानिक रूप से विधानसभा सदस्य के रूप में उन्हें मिलने वाले फंड में से नियमित 10 हजार रूपये की राशि काटी जा रही है।












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